
प्रतीकात्मक तस्वीर
केरल में एक बार फिर से महिलाओं के अधिकारों और आधुनिक जीवनशैली को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। वहां के एक मजहबी संगठन ‘समस्ता केरल जेम-इय्यातुल उलमा’ की युवा शाखा ‘समस्ता युवाजन संघम’ (SYS) के एक वरिष्ठ नेता ने मुस्लिम महिलाओं के आचरण को लेकर ऐसी बातें कही हैं जिनसे एक नई बहस शुरू कर दी है।
दरअसल, समस्ता युवाजन संघम (SYS) के एक प्रमुख नेताअब्दुल हमीद फैसी अंबालकक्कडावु ने हाल ही में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने आजकल की मॉर्डन मुस्लिम महिलाओं के व्यवहार पर असहमति जताई। उन्होंने अपने भाषण में केरल में मुस्लिम महिलाओं द्वारा अपनाई जा रही जीवनशैली को ‘इस्लामी शिक्षाओं के विरुद्ध’ करार दिया। फैसी ने खासतौर पर उन महिलाओं की आलोचना की जो सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं, कला के क्षेत्र में काम कर रही हैं या गैर-महरम पुरुषों (अजनबी पुरुषों) के साथ उठती-बैठती हैं। उनके इस बयान को एक फतवे की तरह देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने इस्लामिक परंपराओं से भटकने वाली महिलाओं को अल्लाह के प्रकोप का डर दिखाया है।
अब्दुल हमीद फैसी के भाषण का सबसे विवादित हिस्सा वह था जहां उन्होंने पैगम्बर साहब के हवाले से कुछ भविष्यवाणियों का जिक्र किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मुस्लिम समुदाय, विशेषकर महिलाएं, पारंपरिक मानदंडों और मजहबी सीमाओं का उल्लंघन करना जारी रखती हैं तो उन्हें भयानक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मर्यादा खोने वाले समाज पर खुदा का कहर टूट सकता है। ऐसे लोगों को जमीन निगल सकती है। वे लोग सुअर और बंदरों में बदल सकते हैं। उनपर आसमान से पत्थरों की बारिश हो सकती है। इन चेतावनियों के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि महिलाओं का वर्तमान आचरण विनाशकारी साबित हो सकता है।
अपनी बात को वजन देने के लिए फैसी ने करीब 50 साल पहले के समाज का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि उस समय मुस्लिम महिलाएं इतनी मर्यादित थीं कि जब वे बाहर निकलती थीं तो अजनबी पुरुषों को देखकर अपना चेहरा छाते से ढक लिया करती थीं ताकि कोई उन्हें देख न सके। उन्होंने आजकल की महिलाओं के व्यवहार को उस दौर के मुकाबले अत्यंत गिरा हुआ बताया। फैसी ने इस तथाकथित ‘मूल्यों के क्षरण’ के लिए ‘मुजाहिद’ और ‘जमात-ए-इस्लामी’ जैसे मुस्लिम गुटों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संगठनों ने मजहब की आधुनिक व्याख्या पेश करके पारंपरिक मूल्यों को कमजोर किया है जिससे महिलाएं अपनी सीमाओं को लांघ रही हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ‘समस्ता’ से जुड़े नेताओं ने महिलाओं की सार्वजनिक आचरण पर सवाल उठाए हैं। 2022 में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें एम.टी. अब्दुल्ला मुसलियार ने एक कक्षा 10 की छात्रा को मंच पर पुरस्कार लेने के लिए बुलाए जाने पर सार्वजनिक रूप से आपत्ति जताई थी। उस समय भी अब्दुल हमीद फैसी ने मुसलियार का बचाव किया था और कहा था कि बड़ी लड़कियों को पुरुषों के सामने मंच पर नहीं आना चाहिए।
फैसी के इस ताजा बयान की केरल के बहुत से लोग आलोचना कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान समाज को 7वीं सदी की रूढ़ियों की ओर ले जाने की कोशिश हैं। यह महिलाओं की शिक्षा, कला और सार्वजनिक स्वतंत्रता के खिलाफ एक गहरी साजिश है। इससे मुस्लिम महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी उन्नति में बाधा आएगी। वहीं कुछ कट्टरपंथी विचारधारा रखने वाले लोग इसे धर्म को बचाने के लिए एक आवश्यक ‘चेतावनी’ मान रहे हैं। उनका तर्क है कि अपनी मजहबी पहचान बनाए रखने के लिए इन सीमाओं का पालन करना अनिवार्य है।