तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी का अपने सहयोगियों के प्रति दोहरा रवैया
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होम भारत तमिलनाडु

तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी का अपने सहयोगियों के प्रति दोहरा रवैया

कांग्रेस ने तमिलनाडु में अपने पुराने सहयोगी DMK को छोड़कर विजय की तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन करने का फैसला लिया है। राहुल गांधी और स्टालिन के खराब रिश्ते, स्वार्थपूर्ण राजनीति और कांग्रेस की परजीवी रणनीति की पूरी डिटेल।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
May 7, 2026, 10:59 am IST
in तमिलनाडु
राहुल गांधी

राहुल गांधी

कांग्रेस पार्टी अन्य दलों के साथ केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए करती है और जब उसे कोई विकल्प मिल जाता है तो बिना देरी किये नया गठबंधन कर लेती है। कांग्रेस ऐसा ही स्वार्थपूर्ण गठबंधन तमिलनाडु में करने जा रही है, जहाँ वो अपने पुराने सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का साथ छोड़कर नई जे जोसफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के साथ गठबंधन करने जा रही है।

इंडि गठबंधन के दो प्रमुख दलों द्रमुक और कांग्रेस के बीच दो दशक से ज़्यादा पुराना रिश्ता समाप्त हो चुका है। वर्तमान में यह गठबंधन केवल नाममात्र का रह गया था। विधानसभा चुनाव में द्रमुक और स्टालिन की हार से सबसे ज्यादा कोई दल और नेता खुश था को कांग्रेस पार्टी और कोई राहुल गांधी थे। राहुल किसी भी प्रकार से स्टालिन को मुख्यमंत्री पद पर नहीं देखना चाह रहे थे।

स्वार्थ पर टिका था डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन

यह गठबंधन 2014 के लोकसभा चुनाव में भी टूट गया था। यह गठबंधन केवल आपसी स्वार्थ और लाभ पर टिका था। कांग्रेस पार्टी का तमिलनाडु में जनाधार नहीं बचा है और राज्य में पार्टी को अपने पहचान का संकट था। अतएव कांग्रेस पार्टी ने द्रमुक के साथ गठबंधन में रहती थी। कांग्रेस पार्टी 1996 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अपना खाता भी नहीं खोल सकी थी। कांग्रेस पार्टी तमिलनाडु में पूर्णतः परजीवी पार्टी बन गई थी और द्रमुक के सहारे ही अपनी राजनीति करती थी। कांग्रेस पार्टी और द्रमुक में अभी भी संबंध सहज नहीं रहे और 2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने गठबंधन में द्रमुक से 90 सीटों की मांग की थी और द्रमुक पर दबाव बनाकर आखिरकार 63 सीट आवंटित करवा लिया।

दोनों दलों में घमासान 2004 के लोकसभा चुनाव के बाद यूनाइटेड प्रोग्रेसिव गठबंधन सरकार के गठन के समय दिखा जब तत्कालीन द्रमुक प्रमुख करुणानिधि ने चुनाव पूर्व हुए शर्तों के मुताबिक, अपनी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण मंत्रालयों के मांग करते हुए कहा था कि जब तक उनकी मांग नहीं मान ली जाती है, तब तक उनके पार्टी के लोग मंत्रालय में शामिल नहीं होंगे। अंत में कांग्रेस पार्टी को करूणानिधि के मांग के सामने कांग्रेस पार्टी को झुकना पड़ा था।

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तमिलनाडु में द्रमुक से क्यों चिपकी रही कांग्रेस

कांग्रेस पार्टी भाजपा के पूरे देश में बढ़ते जनाधार के मद्देनज़र तमिलनाडु में द्रमुक के साथ चिपकी रही, क्योंकि उसे भय था कि अगर कांग्रेस द्रमुक का साथ छोड़ देगी तो भाजपा तमिलनाडु में भी तेजी से विस्तार कर लेगी। दूसरी तरफ अन्नाद्रमुक हमेशा से हिंदुत्ववादी राजनीति की तरफ झुकी रही है और कांग्रेस पार्टी को इस कारण हमेशा से अन्नाद्रमुक से परेशानी से भरा रहा है।  2016 के विधानसभा चुनाव के समय भी कांग्रेस पार्टी और द्रमुक के संबंध टूटने के कगार तक पहुंच गया था।

वर्तमान विधानसभा चुनाव से पूर्व भी दोनों दलों का संबंध लगभग टूट के कगार पर पहुंच गया था और अंतिम समय में सोनिया गांधी और पी चिदंबरम के हस्तक्षेप के बाद यह गठबंधन बच सका था। मगर दोनों दलों और खासकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन और लोकसभा में कांग्रेस पार्टी के नेता राहुल गांधी के आपसी खराब संबंध के कारण यह गठबंधन केवल नाममात्र का ही बचा था।

पुडुचेरी में कांग्रेस ने दिखाया अपना असली रंग

कांग्रेस पार्टी ने अपनी असल रंगत और द्रमुक के प्रति अपने नफरत का इजहार तमिलनाडु के पड़ोसी प्रदेश पुडुचेरी में किया जहाँ राहुल गाँधी ने द्रमुक के खिलाफ चुनाव लड़ रहे अपने पार्टी के बागी सदस्यों के साथ 6 अप्रैल, 2026 को ना सिर्फ मुलाकात की। बल्कि, उनके साथ के फोटो को सार्वजनिक भी किया। राहुल गांधी ने इस फोटो के माध्यम से अपनी पार्टी से समर्थन मतदाताओं को यह संदेश दिया कि आप द्रमुक के लिए मतदान नहीं करो। स्टालिन के साथ मंच नहीं साझा करके और कई अन्य तरीकों से कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी ने अपने समर्थकों को यह संदेश कई अवसरों पर दिया था कि वो द्रमुक को मतदान नहीं करे।

कांग्रेस पार्टी का जनाधार तमिलनाडु में ना के बराबर है और 2014 के लोकसभा चुनाव में अकेले अपने बूते सभी 39 सीटों पर चुनाव लड़कर पार्टी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। 2014 में अकेले लड़कर कांग्रेस महज 4.37 प्रतिशत मत ही प्राप्त कर सकी थी। 2014 के लोकसभा के चुनाव में अपने बूते सभी सीटों पर चुनाव लड़कर कांग्रेस पार्टी महज एक विधासभा की सीट किल्लियूर पर ही बढ़त बना सकी थी। दूसरी तरफ भाजपा भी 2014 में बिना अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन के चुनाव लड़कर सात विधानसभा की सीटों पर प्रथम पायदान पर आयी थी। भाजपा 2014 में एक सीट कन्याकुमारी सीट जीतने में सफल भी हुई थी। अतएव 2014 के लोकसभा चुनाव में यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा तमिलनाडु में कांग्रेस पार्टी से बड़ी पार्टी है।

अतएव 2014 के बाद कांग्रेस पार्टी राज्य में भाजपा से बड़ी पार्टी और अपनी सार्थकता बनाये रखने के लिए कभी भी द्रमुक से अलग होने का हिम्मत नहीं जुटा सकी। मगर अब द्रमुक के हाथों से सत्ता जाने के साथ ही कांग्रेस पार्टी ने उससे दूरी बनाकर अब विजय जोसेफ की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम के साथ हाथ मिला लिया है। ऐसी भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कझगम के बीच समझौता चुनाव पूर्व का था, जिसके तहत कांग्रेस पार्टी द्रमुक के साथ गठबंधन में रहकर भी तमिलगा वेत्री कझगम के लिए अंदर से काम करते हुए उसके जीत का रास्ता साफ़ करेगी?

कांग्रेस के राजनीतिक आचरण के कारण ही अन्य दल उससे हो रहे दूर

कांग्रेस पार्टी के द्रमुक के साथ इस तरह के राजनीतिक आचरण के कारण ही अन्य दल भी इससे दूरी बनाते जा रहे है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी, अखिलेश यादव सहित कई इंडि गठबंधन के दलों ने कांग्रेस के बदले आम आदमी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भी अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव ने तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में प्रचार करके कांग्रेस पार्टी की आलोचना भी की है। बिहार में राजद और अन्य दलों के साथ कांग्रेस पार्टी का गठबंधन लगभग समाप्त हो चुका है। झामुमो प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के लिए प्रचार किया है, तब जबकि झारखण्ड राज्य मंत्रिमंडल में कांग्रेस पार्टी के तीन सदस्य शामिल है। अतएव कांग्रेस पार्टी की परवाह अब किसी भी दल ने करना बंद कर दिया है।

केंद्रशासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस ने कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह हासिए पर लाकर खड़ा कर दिया है और कांग्रेस पार्टी के छह विधायकों में से किसी को भी मंत्रिमंडल में स्थान नहीं दिया है। नेशनल कांफ्रेंस ने निर्दलीय सतीश शर्मा को मंत्रालय में शामिल किया है मगर कांग्रेस को स्थान नहीं दिया है।

Topics: कांग्रेस TVK गठबंधनकांग्रेस DMK गठबंधन टूटातमिलनाडु कांग्रेस नई रणनीतिविजय जोसेफ TVK कांग्रेसराहुल गांधी स्टालिन
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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