उत्तर प्रदेश एटीएस ने नोएडा और बिजनौर में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। गिरफ्तार किए गए आतंकियों के मंसूबे इतने खतरनाक थे कि वे देश की राजधानी दिल्ली और यूपी की राजधानी लखनऊ को दहलाने की साजिश रच रहे थे। जांच में सामने आया है कि इन आतंकियों के निशाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय थे, जहां वे हैंड ग्रेनेड से हमला करने की तैयारी में थे।
नोएडा से गिरफ्तार किए गए इन दो आतंकियों के नाम हैं तुषार चौहान उर्फ हिजबुल्ला अली खान और समीर खान। दोनों ने पूछताछ में सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों को पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट ने दिल्ली और लखनऊ स्थित आरएसएस कार्यालयों पर धमाका करने का लक्ष्य दिया था।
संघ के कार्यालयों की रेकी और नक्शे की तस्वीरें हुईं बरामद
आतंकियों के पास से दिल्ली और लखनऊ के महत्वपूर्ण ठिकानों के नक्शे बरामद हुए हैं। हिजबुल्ला ने स्वीकार किया है कि उसने संघ के कार्यालयों की रेकी भी की थी। हिजबुल्ला मूल रूप से एक हिंदू परिवार से है। वो इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के संपर्क में आया था। भट्टी ने उसका ब्रेनवॉश किया और उसे इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद उसने अपना नाम हिजबुल्ला अली खान रख लिया।
इनके मोबाइल फोन से कई महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों की तस्वीरें भी मिली हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि इनके निशाने पर कई वीआईपी ठिकाने थे।
पाकिस्तानी हैंडलर्स ने सौंपा था काम
एटीएस की कार्रवाई केवल नोएडा तक सीमित नहीं रही। बिजनौर से भी दो संदिग्ध आतंकियों जुल्फिकार उर्फ राका और आरिफ मलिक को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों को पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स ने विशेष रूप से आगजनी के जरिए दहशत फैलाने का काम सौंपा था।
इससे पहले 3 अप्रैल को लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन से साकिब, अरबाब, लोकेश और विकास गहलावत को पकड़ा गया था। इन्हीं से पूछताछ के आधार पर बिजनौर और नोएडा के नेटवर्क का पता चला।
वीडियो कॉल पर होती थी बात
जांच में एक वीडियो सामने आया है जिसमें दुबई में बैठा आकिब नामक शख्स AK-47 और हैंड ग्रेनेड लेकर ग्रुप कॉल पर इन आतंकियों से बात कर रहा था। पुलिस की सक्रियता देख आकिब ने जुल्फिकार को व्हाट्सएप कॉल कर सारे सबूत डिलीट करने का निर्देश भी दिया था। यह पूरा मॉड्यूल पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टरों के समन्वय से चल रहा था। शहजाद भट्टी ने कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए भारत के कई प्रभावशाली लोगों को धमकियां भी दिलवाई थीं।
सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी कामयाबी
एटीएस की इस समयबद्ध कार्रवाई ने एक बड़े संभावित हमले को टाल दिया है। फिलहाल पुलिस इस गिरोह में शामिल अन्य युवकों की तलाश कर रही है। इनके खातों की भी जांच चल रही है ताकी इनसे जुड़े विदेशी दहशतगर्दों का भी पता चल सके और इनके नेटवर्क का पूरी तरह से सफाया किया जा सके। सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की यह प्रवृत्ति सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक नई और गंभीर चुनौती बन गई है।

















