खाड़ी में चल रहे युद्ध के बीच अमेरिका ने ईरान के जहाजों को बंद कर दिया है। इसी क्रम में बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका ने ईरान के एक बड़े तेल व्यापारी मोहम्मद हुसैन शमखानी और उनके नेटवर्क पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। शमखानी, ईरान के पूर्व सीनियर सिक्योरिटी अधिकारी अली शमखानी के बेटे हैं। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने मंगलवार को शिपिंग, लॉजिस्टिक्स कंपनियों, जहाजों और कुछ लोगों पर सैंक्शन लगाए, जो ईरान के पेट्रोलियम एक्सपोर्ट को चलाने में मदद कर रहे थे।
भारत समेत कई देशों में फैला है व्यापार
ये नेटवर्क संयुक्त अरब अमीरात, भारत और मार्शल आइलैंड्स जैसे देशों में फैला हुआ है। इसमें ऑयल और गैस टैंकरों का बेड़ा शामिल है, जो ईरानी और रूसी पेट्रोलियम उत्पादों को ट्रांसपोर्ट करता है। अमेरिका का कहना है कि ये काम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को को चकमा देकर ईरान को अरबों डॉलर की कमाई करा रहा था, जो तेहरान की सरकार और उसके करीबियों को फायदा पहुंचाता था।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा, “ट्रेजरी अब आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रही है और आर्थिक दबाव बना रही है। हम उन रेजिम एलीट्स को निशाना बना रहे हैं जैसे शमखानी परिवार, जो ईरानी लोगों की कीमत पर फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।”
ईरान पर अवैध तेल बेचने का आरोप
उन्होंने आगे कहा कि ईरान फाइनेंशियल सिस्टम का इस्तेमाल करके अवैध ऑयल बेचता है, पैसे को धोता है, न्यूक्लियर और हथियारों के पार्ट्स खरीदता है और अपने आतंकवादी प्रॉक्सी को सपोर्ट करता है। बेसेंट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में ट्रेजरी ईरान पर अधिकतम दबाव जारी रखेगी ताकि उसके हथियार कार्यक्रम और आतंकवाद सपोर्ट को रोका जा सके, जिसे रेजिम ईरानी लोगों की जिंदगी से ज्यादा प्राथमिकता दे रही है।
इसी के साथ अमेरिका ने एक अलग फाइनेंशियल नेटवर्क पर भी सैंक्शन लगाए हैं, जो सैयद नईमाई बदरुद्दीन मूसावी से जुड़ा है। इस नेटवर्क पर आरोप है कि ये हिजबुल्लाह और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) से जुड़े ऑयल स्मगलिंग और गोल्ड ट्रांसफर में मदद करता था। ये सैंक्शन ऐसे समय में लगाए गए हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं। क्षेत्रीय देशों के डिप्लोमैट्स एक व्यापक समझौते के लिए प्रयास कर रहे हैं। ईरानी अधिकारी बार-बार कह चुके हैं कि किसी भी डील में अमेरिकी सैंक्शन से राहत शामिल होनी चाहिए, क्योंकि ये ईरान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं।
अमेरिका का ये कदम दिखाता है कि डिप्लोमैटिक बातचीत के बावजूद वो आर्थिक दबाव का रास्ता नहीं छोड़ रहा है। शमखानी परिवार और मूसावी नेटवर्क दोनों ही ईरान की ऑयल कमाई और उसके सहयोगियों को सपोर्ट करने वाले माने जा रहे हैं।











