नोएडा में कामगारों के द्वारा किए गए बड़े प्रदर्शन, नोएडा में 80 से 83 जगहों पर हुआ। ये प्रदर्शन सेक्टर 63, फेज-2, 63, 60, 84 और ग्रेटर नोएडा के कुछ इलाकों में हुए। मजदूर ज्यादा न्यूनतम वेतन, तय काम के घंटे, ओवरटाइम पे और बेहतर काम की हालत मांग कर रहे थे। लेकिन इन प्रदर्शनों को हिंसक रूप देने और हालात को और बिगाड़ने में विदेशी ताकतों (पाकिस्तान) के भी शामिल होने की खबरें सामने आ रही हैं। एजेंसियों ने इसकी जांच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा मामला
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में वेतन 35 प्रतिशत बढ़ाकर 14000 से 19000 रुपये महीना कर दिया गया था। वहीं नोएडा में मजदूरों को करीब 13,000 रुपये मिलते हैं, और हर छह महीने में सिर्फ 280-300 रुपये की बढ़ोतरी होती है। वे 12 घंटे की शिफ्ट करते हैं। मजदूर 8 घंटे के लिए 20,000 रुपये न्यूनतम वेतन चाहते थे। प्रदर्शन दो-तीन दिन से बन रहा था और सोमवार सुबह 9:30 बजे से शुरू हुआ। शुरू में ज्यादातर जगहों पर शांतिपूर्ण धरना और बैठे रहना था।
अचानक से बिगड़े हालात
पुलिस और प्रशासन ने बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की। कई जगहों से मजदूर शांतिपूर्वक लौटने लगे थे। लेकिन मोथरसन जैसे कारखानों के पास हालात बिगड़ गए। कुछ लोग दीवारें फांदकर, बाड़ काटकर अंदर घुसे। वहां पथराव शुरू हो गया। पुलिस ने हल्का बल इस्तेमाल किया। फिर सेक्टर 62 और फेज-2 में भीड़ ने कारखानों के शीशे तोड़े, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और गाड़ियां जलानी शुरू कर दी।
कम से कम एक दर्जन गाड़ियां जलाई गईं, जिनमें पुलिस की गाड़ियां भी शामिल थीं। सेक्टर 63 के एक सर्विस सेंटर के बाहर 4-5 कारें जल गईं। दो जगहों पर आगजनी हुई, जिसे दमकल ने काबू किया। कम से कम पांच पुलिस वाले घायल हुए। अफवाहें फैलीं कि पुलिस ने फायरिंग की, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
बाहर से आए लोगों ने माहौल बिगाड़ा
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि मजदूर शांतिपूर्वक लौट रहे थे, तभी बाहर से कुछ लोग आए और तनाव बढ़ाने की कोशिश की। कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है, बाकी की पहचान हो रही है। करीब 350 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं। इस मामले में नौ एफआईआर दर्ज हुईं हैं, सात हिंसा के लिए अज्ञात लोगों के खिलाफ और दो सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ दर्ज की गई हैं।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने करीब 3,000 जवान तैनात किए। एसटीएफ ने पता लगाया कि 24 घंटे के अंदर 50 से ज्यादा बॉट अकाउंट बनाए गए, जो मौत औऱ चोटों की गलत खबरें फैला रहे थे। इनकी डिजिटल ट्रेसिंग चल रही है। मजदूरों की मांगों में से चार को सरकार ने मान लिया। एक हाई पावर कमिटी बनाई गई, जिसमें लेबर, एमएसएमई और इंडस्ट्री के अधिकारी शामिल हैं। करीब 2500 मजदूरों से बैठक हुई। सरकार ने साप्ताहिक छुट्टी, डबल ओवरटाइम, नवंबर 30 तक बोनस, समय पर सैलरी, मेडिकल कवर और बेहतर सुविधाएं देने को कहा। कारखानों को साफ पानी, आराम की जगह, स्वास्थ्य सुविधाएं, सेफ्टी उपकरण और लेबर कानून मानने के निर्देश दिए गए।
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पाकिस्तानी लिंक की हो रही है जांच
प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने इसे विकास और कानून व्यवस्था को तोड़ने की साजिश करार दिया है। हाल के मेरठ और नोएडा में पकड़े गए आतंकियों के पाकिस्तान हैंडलर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान लिंक की जांच चल रही है। एंटी-नेशनल ताकतें इस मौके का फायदा उठा सकती हैं।
बाहरी तत्व मजदूरों के बीच घुसे
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नक्सलवाद खत्म होने के करीब है, लेकिन इसे दोबारा जगाने की कोशिश हो सकती है। कुछ बाहरी तत्व मजदूरों के बीच घुसकर गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत सिर्फ असली मजदूरों से होनी चाहिए। इंटेलिजेंस को मजबूत करने और उकसाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।











