अमेरिका के सिएटल शहर में शनिवार (12 अप्रैल) को भारतीय दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद की आदमकद (लाइफ साइज) भव्य कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। स्वामी विवेकानंद की इस प्रतिमा को प्रसिद्ध भारतीय मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत ने जीवंत रूप दिया है। इसे सिएटल के डाउनटाउन स्थित वेस्टलेक स्क्वायर में स्थापित किया गया है। इस प्रतिमा को इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन ने सिएटल शहर को भेंट किया है।
मेयर, भारतीय महावाणिज्य दूत ने मिलकर किया अनावरण
सिएटल की मेयर केटी विल्सन और भारत के महावाणिज्य दूत प्रकाश गुप्ता ने मिलकर इस प्रतिमा का उद्घाटन किया। भारतीय वाणिज्य दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, अमेरिका में यह पहली बार है जब किसी शहर की सरकार ने स्वामी विवेकानंद की मूर्ति को आधिकारिक तौर पर अपने सार्वजनिक स्थान पर जगह दी है। यह प्रतिमा शहर के सबसे व्यस्त इलाके वेस्टलेक स्क्वायर में लगाई गई है, जहां हर दिन करीब चार लाख लोग आते हैं। यह जगह अमेजन हेडक्वार्टर (द स्फीयर्स) और सिएटल कन्वेंशन सेंटर से कुछ ही दूरी पर है।
‘शिकागो 1893 से सिएटल 2026 तक
भारत के महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “शिकागो 1893 से सिएटल 2026 तक! सिएटल का प्रशासन शहर के मध्य क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद स्मारक स्थापित करने वाला पहला नगर प्रशासन बन गया है।” मेयर केटी विल्सन ने इस समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद का यह स्मारक सिएटल की समावेशी भावना को दर्शाता है। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) ने सिएटल शहर को यह मूर्ति तोहफे में दी है, जिसका अनावरण ICCR दिवस के मौके पर किया गया। इसका मकसद भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक रिश्तों व लोगों के आपसी जुड़ाव को और मजबूत करना है। आईसीसीआर लंबे समय से कला और संस्कृति के जरिए दुनिया के अलग-अलग देशों से रिश्ते मजबूत करने पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि समारोह में ग्रेटर सिएटल क्षेत्र के कई स्थानीय नेता, मेयर, समुदाय के प्रतिनिधि और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
शिकागो में स्वामी विवेकानंद का ऐतिहासिक भाषण
स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में वर्ष 1893 में ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने हिंदू दर्शन, वेदांत और योग को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया था। शिकागो 1893 से सिएटल 2026 तक की यह यात्रा भारत-अमेरिका की सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक बन गई है। सिएटल में स्वामी की प्रतिमा लगाना इस बात का संकेत है कि आज भी दुनियाभर में उनके विचार युवाओं और समाज को प्रेरित करते हैं। यह कदम भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को मजबूत करने की दिशा में अहम है।
80 से ज्यादा देशों में लगी हुई हैं भारतीय मूर्तिकार की मूर्तियां
स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा के अलावा मशहूर मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत की बनाई मूर्तियां दुनिया के 80 से ज्यादा देशों में लगी हुई हैं, जो भारतीय संस्कृति की पहचान बनी हुई हैं। कनाडा में उनके द्वारा बनाई गई भगवान शिव और राम की सबसे ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। कुमावत की कृतियों ने भारतीय सांस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को दुनियाभर में पहचान दिलाई है।
















