देहरादून: विकास नगर क्षेत्र में रुद्र सेना के द्वारा जन जाति क्षेत्र की भूमि मुस्लिम वन गुज्जरों को दिए जाने की जांच पड़ताल में उक्त प्रकरण के सही पाए जाने पर प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
रुद्र सेना के सरक्षक राकेश उत्तराखंडी ने वर्ष 2025 में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर जौनसार बावर क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति (जौनसारियों) की भूमि को 1983-84 के दौरान गलत तरीके से वन गुर्जरों के नाम बंदोबस्त किए जाने की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री धामी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करते हुए उप जिलाधिकारी त्यूनी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं जिला शासकीय अधिवक्ता के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की थी।
अवैध तरीके से मुस्लिम वन गुज्जरों के नाम रजिस्टर जमीन
जांच कमेटी ने निष्पक्ष जांच के बाद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पाया कि जौनसार बावर क्षेत्र की अनुसूचित जनजाति की भूमि गलत तरीके से वन गुर्जरों के नाम दर्ज की गई थी। कमेटी ने सिफारिश की कि उक्त गलत बंदोबस्त को निरस्त कर भूमि को राज्य सरकार के नियंत्रण में वापस लिया जाए। इस फैसले पर राकेश उत्तराखंडी ने प्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से चले आ रहे इस जनजातीय भूमि के हक-हकूक के मुद्दे पर शासन द्वारा की गई सकारात्मक कार्रवाई से जौनसार बावर के स्थानीय जनजातीय समुदाय में राहत और विश्वास की भावना जगी है।
रुद्र सेना के माध्यम से क्षेत्र की जनजातीय भूमि, जंगल और हक-हकूक की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष करते रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि शासन अब शीघ्र ही रिपोर्ट के आधार पर भूमि को मूल स्वामियों (अनुसूचित जनजाति) के हित में बहाल करने की प्रक्रिया पूरी करेगा। यह फैसला जौनसार बावर जैसे संवेदनशील जनजातीय क्षेत्र में भूमि संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय जनजातीय संगठनों और कार्यकर्ताओं ने भी इस प्रशासनिक निर्णय का स्वागत किया है।











