भारत में इस साल मानसून की रफ्तार थोड़ी धीमी रहने वाली है। स्काईमेट वेदर ने 2026 के लिए दक्षिण-पश्चिम मानसून का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके मुताबिक, जून से सितंबर तक कुल बारिश सामान्य से 6 प्रतिशत कम हो सकती है। यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का 94 प्रतिशत ही बारिश होने का अनुमान है।
स्काईमेट के शुरुआती अनुमान में कहा गया है कि इन चार महीनों में औसतन 868.6 मिलीमीटर बारिश सामान्य मानी जाती है, लेकिन इस बार करीब 817 मिलीमीटर के आसपास ही रह सकती है। कम बारिश का असर खेती-बाड़ी पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। फसलें प्रभावित होंगी, जिससे खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं। साथ ही कुछ इलाकों में पानी की कमी और बिजली की मांग भी बढ़ने की संभावना है। धीमी मानसून की वजह से हीटवेव का असर भी ज्यादा महसूस हो सकता है।
महीने के हिसाब से कितनी बारिश का है अनुमान
स्काईमेट ने महीनों के हिसाब से भी अलग-अलग अनुमान दिए हैं। जून में मानसून की शुरुआत अच्छी रहने की उम्मीद है। इस महीने LPA की 101 प्रतिशत बारिश हो सकती है, यानी थोड़ी ज्यादा या सामान्य स्तर पर। जुलाई से स्थिति में थोड़ी कमी आ सकती है। इस महीने 95 प्रतिशत बारिश का अनुमान है। वहीं अगस्त में बारिश और घटकर 92 प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है। जबकि सितंबर के महीने में मानसून सबसे कमजोर रह सकता है। इस महीने सिर्फ 89 प्रतिशत बारिश ही होने का अनुमान है।
किन इलाकों में होगा असर
रिपोर्ट्स के अनुसार, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तर-पश्चिमी राज्यों में सूखे की करीब 30 प्रतिशत आशंका है। मध्य और पश्चिम भारत के कई राज्यों में भी बारिश कम रहने की संभावना है। दूसरी ओर, पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में स्थिति बेहतर रह सकती है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय आदि राज्यों में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है।
अल नीनो है कारण
कम बारिश का मुख्य कारण अल नीनो को बताया जा रहा है। अल नीनो एक मौसमी घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे दुनिया भर के मौसम के पैटर्न प्रभावित होते हैं। भारत में अल नीनो के दौरान अक्सर मानसून कमजोर पड़ता है और बारिश घट जाती है। स्काईमेट का यह पूर्वानुमान कृषि क्षेत्र के लिए थोड़ी चिंता का सबब है क्योंकि बारिश पर निर्भर फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।










