केरल विधानसभा चुनाव के बाद यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट गठबंधन में कांग्रेस के बाद दूसरा सबसे बड़ा दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग बड़े राजनीतिक फेरबदल की तैयारी में है। यूडीएफ गठबंधन के गठन के बाद से आईयूएमएल हमेशा से कांग्रेस पार्टी की पिछलग्गू बनकर केरल में राजनीति करती रही है। आईयूएमएल ने लगभग सभी लोकसभा चुनावों में दो लोकसभा की सीट पोन्नानी और मल्लपुरम सीटों पर चुनाव लड़ा है। 2004 में मल्लपुरम लोकसभा की सीट को छोड़कर आईयूएमएल हमेशा से इन सीटों पर जीत दर्ज़ करती आ रही है।
यूडीएफ में रहते हुए भी असंतोष
विधानसभा चुनाव 2016 और 2021 में आईयूएमएल यूडीएफ गठबंधन के प्रदर्शन के अंदर ही अंदर काफी क्षुब्ध है। पार्टी मजबूरी में यूडीएफ गठबंधन में बनी हुई है। आईयूएमएल ना तो एकला चलो की राजनीति कर सकती है और ना ही लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट में शामिल हो सकती है। मगर हाल के दिनों में आईयूएमएल को महसूस हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी उसके जनधार का प्रयोग अपने फायदे के लिए कर रही है। आईयूएमएल को इस तथ्य का भी भान है कि कांग्रेस पार्टी विधानसभा का चुनाव मजबूती से ना लड़कर केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा भर बनने का काम कर रही है। पार्टी को इसका आश्चर्य है कि कांग्रेस पार्टी लोकसभा का चुनाव जीत जाती है मगर विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है।
कांग्रेस और माकपा पर साठगांठ के आरोप
आईयूएमएल पार्टी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि सोनिया गाँधी और पी विजयन में एक प्रकार का गुप्त साठगांठ हैं। इस पार्टी के एक बड़े वर्ग को आशंका है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी के वायनाड से लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद माकपा और कांग्रेस पार्टी के बीच साठगांठ हो गई है, जिसमे लोकसभा चुनाव में माकपा कमजोरी से चुनाव लड़कर वायनाड से गाँधी परिवार के सदस्यों को चुनाव जीतने में मदद करेगी, वहीं विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कमजोरी से चुनाव लड़कर पी विजयन को मुख्यमंत्री बने रहने में मदद करेगी। आईयूएमएल इस तथ्य से परेशान है कि 2021 में पांच साल विपक्ष में रहने के बावजूद 2021 में कांग्रेस पार्टी की सीट घट गई थी। आईयूएमएल को सरकार नहीं बनाने से ज्यादा इस बात से दुख है कि कांग्रेस के मजबूती से चुनाव नहीं लड़ने के कारण यह हुआ था।
विधानसभा चुनाव में आईयूएमएल और कांग्रेस का तुलनात्मक प्रदर्शन
| चुनाव | आईयूएमएल सीट लड़े | आईयूएमएल जीते | आईयूएमएल % जीते | आईयूएमएल % वोट | कांग्रेस सीट लड़े | कांग्रेस जीते | कांग्रेस % जीते | कांग्रेस % वोट | परिणाम |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| 2021 | 25 | 15 | 60 | 8.27 | 93 | 21 | 22.58 | 25.12 | विपक्ष |
| 2016 | 23 | 18 | 78.26 | 7.4 | 87 | 22 | 25.29 | 23.8 | विपक्ष |
| 2011 | 23 | 20 | 86.96 | 7.92 | 82 | 38 | 46.34 | 26.73 | सरकार |
| 2006 | 21 | 7 | 33.33 | 7.3 | 77 | 24 | 31.17 | 24.09 | विपक्ष |
| 2001 | 23 | 16 | 69.57 | 8 | 88 | 63 | 71.59 | 31.4 | सरकार |
| 1996 | 22 | 13 | 59.09 | 7.19 | 94 | 37 | 39.36 | 30.43 | विपक्ष |
| 1991 | 22 | 19 | 86.36 | 7.37 | 91 | 55 | 60.44 | 47.86 | सरकार |
| 1987 | 23 | 15 | 65.22 | 7.73 | 76 | 33 | 43.42 | 24.83 | विपक्ष |
| 1982 | 18 | 14 | 77.78 | 6.17 | 36 | 20 | 55.56 | 11.9 | सरकार |
आईयूएमएल नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में
इन सभी कारणों से अब आईयूएमएल अपने लिए नए राजनीतिक आयाम की तलाश में है और इस चुनाव में भी अगर यूडीएफ चुनाव में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती है तो पार्टी अपने को कांग्रेस पार्टी से अलग करके नए ढंग से राजनीती करेगी। यह स्थिति कांग्रेस पार्टी के लिए केरल में सबसे बुरा दौर होगा और एक अन्य राज्य में कांग्रेस पार्टी अपनी समाप्ति की और बढ़ेगी।

















