केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव में भाजपा अपने सहयोगी ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस पार्टी के साथ बड़े बहुमत के साथ दोबारा सरकार बनाने की ओर अग्रसर है। भाजपा अपने सहयोगियों के साथ गठबंधन धर्म निभाने के लिये जानी जाती है। भाजपा 2021 के पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में स्थानीय आल इंडिया एन आर कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी और कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को करारी शिकस्त देकर सरकार बनाई थी। 2021 से पूर्व भाजपा ने पुडुचेरी में केवल 2001 के विधानसभा चुनाव में एक सीट जीतने में सफलता प्राप्त की थी। 2021 में भाजपा एआईएनआरसी के साथ गठबंधन में 9 सीटों पर चुनाव लड़कर 6 सीट जीतकर गठबंधन की सरकार बनाई थी।
पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन

भाजपा ने 2021 में गठबंधन द्वारा चुनाव जीतने पर अपने सहयोगी एआईएनआरसी से ना तो मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद की मांग की गई और ना ही कार्यकाल के अनुसार, मुख्यमंत्री पद की अदला-बदली के लिए दवाब बनाया गया। पुडुचेरी की तरह ही भाजपा का जम्मू कश्मीर, बिहार और अन्य कई राज्यों में अपने सहयोगी पर बिना किसी दबाव के सरकार चलाने का इतिहास है। जम्मू कश्मीर में भाजपा ने 2014 में पीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार चलाया। मगर, मुख्यमंत्री पद के लिए दबाव नहीं बनाया। बिहार में भाजपा नीतीश कुमार के साथ लगभग दो दशक सरकार में है, मगर भाजपा ने कभी भी जनता दल यू पर मुख्यमंत्री पद के लिए दबाव नहीं बनाया। इसी तरह उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में भाजपा ने मायावती और कुमार स्वामी के साथ गठबंधन में सरकार बनाई, मगर मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल अदल- बदल वाले समझौते में भी अधिक सीट होने के बावजूद भी मुख्यमंत्री का पद पहले अपने से कम सीट वाले सहयोगियों को दिया।
पुडुचेरी में भी पूरा किया 5 साल का कार्यकाल
पुडुचेर्री में भी भाजपा और एआईएनआरसी पांच सालों का कार्यकाल पूरा करने के बाद सफलतापूर्वक सीटों का बंटवारा करके इस बार फिर से चुनावी समर में जा रही हैं। भाजपा गठबंधन में अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को भी 2021 की तरह इस चुनाव में भी शामिल किया गया हैं। विगत चुनाव में अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने गठबंधन में पांच सीटों पर लड़कर कोई भी सीट जीतने में नाकाम रही थी अतएव कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम को गठबंधन में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन, भाजपा अपने सहयोगी को सीट जीतने के आधार पर नहीं, बल्कि संबंधों के आधार पर निर्धारित करती हैं। एनडीए गठबंधन में एलजेके दल को भी शामिल किया गया है।
पु़डुचेरी में भाजपा सरकार है बड़े बदलाव का संकेत
पुडुचेरी में भाजपा का अपने सहयोगी के साथ सरकार बनाना देश और दक्षिणी राज्यों के लिए बड़ा राजनीतिक बदलाव था। पुडुचेरी यद्यपि छोटा प्रदेश है, लेकिन इस प्रदेश की राजनीति का बहुत बड़ा असर होता है। पुडुचेर्री की राजनीति का पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में बहुत असर पड़ता है। 1972 में द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से अलग होकर एम जी रामचंद्रन द्वारा अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम बनाने के बाद इस पार्टी की पहली सरकार तमिलनाडु में नहीं, बल्कि पुडुचेरी में बनी थी। 1974 में पुडुचेरी में अखिल भारतीय द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम द्वारा विधानसभा जीतकर एस रामासामी के नेतृत्व में सरकार बनाई गई थी। पुडुचेरी में अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के सरकार बनाने का सीधा असर 1977 में तमिलनाडु में देखने को मिला जब इस पार्टी ने अखिल भारतीय द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने करुणानिधि के नेतृत्ववाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम को बुरी तरह चुनाव हराकर तमिलनाडु में पहली बार सरकार बनाई थी। 1974 में पुडुचेर्री के जनमत का सीधा असर तमिलनाडु में 1977 में देखने को मिला था।
गठबंधन धर्म निभाना भाजपा से सीखे कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों को भाजपा से गठबंधन धर्म को निभाना सीखना चाहिए। कांग्रेस और उसके इंडि गठबंधन के सहयोगी दल आपस में लगभग सभी राज्यों में एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोकते रहते हैं। कांग्रेस पार्टी पुडुचेरी विधानसभा चुनाव में किसी भी प्रकार की तैयारी में नहीं दिख रही है। कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों की तरह ही पुडुचेरी में केवल चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बन रही है।













