खाड़ी युद्ध के बीच ईरान ने ट्रंप की धमकियों को धता बताते हुए उनके बयानों को वेबकूफाना कदम करार दिया है। इसके साथ ही ये भी कहा कि इस संदेश का सीधा मतलब है कि तुम्हारे लिए नर्क के दरवाजे खुल जाएंगे। साथ ही इस्लामी शासन ने होर्मुज खोलने से इंकार कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट लिखा कि उन्होंने ईरान को पहले 10 दिन का समय दिया था। इसमें उन्होंने धमकी दी थी कि या तो ईरान कोई डील कर ले या होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दे। अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं। उन्होंने कहा, “समय खत्म हो रहा है – 48 घंटे बाद तुम पर सब कुछ बरस पड़ेगा।” ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना तो उसके जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
इससे पहले 26 मार्च को ट्रंप ने कहा था कि बातचीत अच्छी चल रही है। उन्होंने ईरान की अनुरोध पर एनर्जी प्लांट्स पर हमले की समयसीमा को 10 दिन बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 तक कर दिया था। उन्होंने मीडिया को “फेक न्यूज” कहते हुए कहा कि बातें ठीक से चल रही हैं।
इरान का जवाब
ईरान की खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के जनरल अली अब्दोल्लाही अलीआबादी ने ट्रंप के बयान को “बेबस, घबराया हुआ, असंतुलित और बेवकूफाना कदम” बताया। उन्होंने साफ कहा कि इस मैसेज का सीधा मतलब है – “तुम्हारे लिए नर्क के द्वार खुल जाएंगे।” ईरान ने इस अल्टीमेटम को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने या कोई नई डील करने से इनकार कर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है महत्वपूर्ण
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे जरूरी तेल शिपिंग रूट है। यहां से बहुत सारा कच्चा तेल गुजरता है। अगर यह बंद रहता है तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई प्रभावित होती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। इस समय यह इलाका तनावपूर्ण है और तेल की कीमतें पहले ही काफी ऊंची चल रही हैं।
ट्रंप लगातार इस रूट को खोलने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो अमेरिका इसे खोल सकता है, लेकिन अभी बातचीत का रास्ता भी रखा हुआ है। ईरान की तरफ से अभी तक कोई नरमी नहीं दिखी है। जनरल अलीआबादी का बयान साफ दिखाता है कि ईरान इस दबाव को स्वीकार नहीं कर रहा। दोनों तरफ से सख्त बयानबाजी जारी है, लेकिन फिलहाल कोई नई डील या खुलासा नहीं हुआ है।

















