मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में “दून बुक फेस्टिवल 2026” का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने अलग-अलग पब्लिशर्स के लगाए गए स्टॉल्स का भी दौरा किया और गढ़वाली और कुमाऊंनी किताबों का विमोचन किया। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित इस फेस्टिवल में मुख्यमंत्री ने देश भर के लेखकों, कलाकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह फेस्टिवल साहित्य, संस्कृति और कला का एक अद्भुत संगम है, जो समाज में ज्ञान और विचारों के आदान-प्रदान को एक नई दिशा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ दिन का यह फेस्टिवल अलग-अलग सेशन, इंटरैक्टिव प्रोग्राम, बुक डिस्कशन और “लेखक से मिलें” जैसे इवेंट के जरिए साहित्यिक चर्चा को और बेहतर बनाएगा। उन्होंने खास तौर पर बच्चों के लिए बनाए गए “चिल्ड्रन पैवेलियन” की तारीफ करते हुए इसे एक सराहनीय पहल बताया और कहा कि इससे नई पीढ़ी में पढ़ने का शौक बढ़ेगा।
उत्तराखंड: साहित्य, संस्कृति और सृजन का उभरता केंद्र
उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा का ज़िक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि की इस पवित्र धरती ने कई महान साहित्यकारों को जन्म दिया है और यह राज्य हमेशा से ज्ञान, संस्कृति और क्रिएटिविटी का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार साहित्य और संस्कृति को बचाने और बढ़ावा देने के लिए लगातार काम कर रही है। लेखकों को “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान”, “साहित्य भूषण” और दूसरे अवॉर्ड से सम्मानित किया जा रहा है, और अलग-अलग भाषाओं में किताबों के प्रकाशन के लिए ग्रांट भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में लिटरेरी विलेज बनाए जा रहे हैं, जो लेखकों को उत्तराखंड को लिटरेरी टूरिज्म का एक बड़ा सेंटर बनाने और डेवलप करने के लिए अच्छा माहौल देंगे।
किताबें और पौधे: ज्ञान व पर्यावरण का संदेश
अपने भाषण में, मुख्यमंत्री ने किताबों के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि किताबें सिर्फ़ शब्दों का कलेक्शन नहीं हैं, बल्कि ज्ञान का एक स्थायी सोर्स हैं जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी समाज को गाइड करती हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अलग-अलग मौकों पर किताबें और पौधे गिफ्ट करने को बढ़ावा देने की अपील की, जिससे समाज में ज्ञान और पर्यावरण दोनों के बारे में जागरूकता बढ़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को फिर से स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार भी उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को बचाने और बढ़ावा देने के लिए कमिटेड है। उन्होंने फेस्टिवल के सफल आयोजन के लिए सभी ऑर्गनाइज़र को बधाई दी और भरोसा जताया कि इससे राज्य की साहित्यिक चेतना को नई एनर्जी मिलेगी। इस मौके पर कैबिनेट मंत्री खजान दास, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल, आचार्य बालकृष्ण, नेशनल बुक ट्रस्ट के प्रेसिडेंट प्रो. मिलिंद मराठी, नेशनल बुक ट्रस्ट के डायरेक्टर युवराज मलिक और देवभूमि उत्तराखंड यूनिवर्सिटी के वाइस प्रेसिडेंट अमन बंसल मौजूद थे।

















