कोटद्वार में कैसे हुआ 'मुस्लिम तुष्टिकरण'? सिद्धबली मंदिर के पास बनी है 'ईदगाह'! सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल
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कोटद्वार में कैसे हुआ ‘मुस्लिम तुष्टिकरण’? सिद्धबली मंदिर के पास बनी है ‘ईदगाह’! सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल

उत्तराखंड के कोटद्वार को गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यहां हुए मुस्लिम तुष्टिकरण को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाए हैं।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Apr 3, 2026, 01:29 pm IST
inउत्तराखंड

नई दिल्ली/देहरादून: उत्तराखंड के कोटद्वार को गढ़वाल का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यहां का न सिर्फ ऐतिहासिक बल्कि पौराणिक महत्व भी है। यही पौराणिक कण्वनगरी है। कण्वाश्रम यहां के मालिनी नदी के तट पर ही था। यह महर्षि कण्व की तप स्थली है। कण्व सप्तर्षियों में से एक थे। राजा भरत के जन्म कण्व ऋषि के आश्रम में ही हुआ था। राजा भरत के नाम पर ही हमारे देश का नाम भारत पड़ा है। लेकिन कण्व ऋषि की यह तपस्थली राजनीति के कारण मुस्लिम ‘तुष्टिकरण का शिकार’ हुई। इसे लेकर ही सोशल मीडिया पर सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर किसने कोटद्वार को मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का मैदान बनाया।

हनुमानजी का प्रसिद्ध मंदिर है सिद्धबली, उससे थोड़ा दूरी पर ‘ईदगाह’
कोटद्वार का पुराना नाम खोहद्वार था। क्योंकि यह खोह नदी का द्वार माना जाता था। यहां प्रसिद्ध सिद्धबली मंदिर है। इस मंदिर में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से हनुमानजी की विशेष कृपा मिलती है। लेकिन इसी मंदिर से करीब दो किमी दूरी पर एक ईदगाह है। अब सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहा है कि आखिर कैसे कण्व ऋषि की यह तपस्थली मुस्लिम तुष्टिकरण का शिकार हुई।

सोशल मीडिया यूजर्स इसके लिए पूर्व की कांग्रेस सरकार को दोष दे रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि कांग्रेस ने मुस्लिम वोटबैंक के लिए पहाड़ों में मुस्लिमों को बसाया और लाभ पहुंचाया है। क्यों सिद्धबली मंदिर के पास ही ग्रास्टनगंज में यह मरकज बनाई गई। और इसे किसने बनाया? एक यूजर ने लिखा कि  कांग्रेसियो द्वारा वोट बैंक के लिए दिया गया बहुत ही सुन्दर व शानदार तोहफा है ये!

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क्या है सिद्धबली मंदिर की मान्यता
कोटद्वार में स्थित श्री सिद्धबली मंदिर हनुमान जी को समर्पित है। गोरख पुराण के अनुसार, गोरखनाथ के गुरु का नाम गुरू मछेंद्र नाथ था। वह एक बार बजरंगबली जी की आज्ञा से त्रिया राज्य की रानी मैनाकनी के साथ रह रहे थे। जब इस बात के बारे में गोरखनाथ को जानकारी प्राप्त हुई तो वह गुरु मछेंद्र नाथ को रानी मैनाकनी से मुक्त कराने को चल पड़े। मान्यता है कि सिद्धबली में हनुमान जी ने अपना रूप बदल कर गुरु गोरखनाथ का मार्ग रोक लिया। इसके बाद दोनों के बीच युद्ध हुआ। इस दौरान दोनों किसी को हरा नहीं पाए। इसके बाद हनुमान जी ने अपना असली रूप धारण किया और गुरु गोरखनाथ से वरदान मांगने को कहा। ऐसे में गुरु गोरखनाथ ने हनुमान से इसी जगह पर उनके पहरेदार के रूप में रहने की प्रार्थना की। इस मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी मिलता है। मान्यता है कि यहां दर्शन से श्रद्धालु की सभी मुरादें पूरी होती हैं।

कोटद्वार में मुस्लिम आबादी बढ़ने का दावा
वैसे भी कोटद्वार में मुस्लिम आबादी में वृद्धि होने को लेकर हिंदूवादी संगठनों ने कई बार चिंता व्यक्त की है। इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किए हैं। हिंदूवादी संगठनों ने दावा किया था कि कोटद्वार की डेमोग्राफी बदल रही है। यहां मुस्लिमों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। जिसे लेकर  प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की गई थी।

Topics: Kotdwar Eidgah controversySiddhbali Temple KotdwarMuslim appeasement KotdwarEidgah near Siddhbali Temple
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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