अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी लोगों को एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने साफ कहा है कि ईरानी लोगों में आम अमेरिकियों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं है। यह पत्र ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत ज्यादा है और युद्ध की स्थिति बनी हुई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अपने पत्र में पेजेश्कियन ने सरकारों और आम नागरिकों के बीच फर्क साफ किया। उन्होंने लिखा कि ईरानी लोग दूसरे देशों के लोगों से, खासकर अमेरिका, यूरोप या पड़ोसी देशों के लोगों से कोई दुश्मनी नहीं रखते। यह उनकी गहरी जड़ों वाली सोच है, न कि कोई राजनीतिक बयानबाजी। उन्होंने कहा कि ईरान को खतरा बताना न तो इतिहास से मेल खाता है और न ही आज की हकीकत से।
अमेरिकी कार्रवाई पर उठाया सवाल
पेजेश्कियन ने अमेरिका की सैन्य कार्रवाइयों पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या ईरान से अमेरिका को कोई असली खतरा था, जिसकी वजह से ऐसी कार्रवाई की गई? उन्होंने निर्दोष बच्चों की हत्या और किसी देश को “पत्थर के युग में वापस ले जाने” जैसी बातों पर सवाल किया। कहा कि इससे अमेरिका की दुनिया में इज्जत ही खराब होती है।
उन्होंने यह भी इशारा किया कि अमेरिका शायद इजरायल की तरफ से इस लड़ाई में शामिल हुआ है। क्या वाशिंगटन इस भूमिका में आया है? पत्र में ईरान के अमेरिका पर भरोसा न करने की वजह भी बताई गई। 1953 का तख्तापलट, लंबे सालों के प्रतिबंध और पुरानी सैन्य टकरावों का जिक्र किया। 1953 में अमेरिका ने ईरान के अपने संसाधनों को राष्ट्रीय बनाने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया था।
पेजेश्कियन ने जोर दिया कि आधुनिक इतिहास में ईरान ने कभी आक्रामक रास्ता नहीं चुना। जब हमला हुआ, तब सिर्फ खुद की रक्षा की। प्रतिबंधों के बावजूद ईरान ने शिक्षा, टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य क्षेत्र में अच्छी तरक्की की है। ये हकीकतें देखी जा सकती हैं, जो ईरान के बारे में दी जा रही गलत तस्वीर से मेल नहीं खातीं।
अमेरिकियों से सच्चाई देखने की अपील
पत्र में वर्तमान स्थिति को एक मोड़ बताया गया। आगे बढ़ने का रास्ता चुनना होगा टकराव या बातचीत। उनका कहना है कि टकराव महंगा और बेकार है। पेजेश्कियन ने अमेरिकियों से अपील की कि वे ईरान के बारे में जो कुछ बताया जा रहा है, उसे सवालों से देखें और सच्चाई समझें।
यह पत्र प्रेस टीवी के जरिए सामने आया है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्र को संबोधन से ठीक पहले जारी किया गया, जिसमें ट्रंप ईरान संघर्ष पर अपना अगला कदम बताने वाले थे। पत्र में सीधे परमाणु मुद्दे का जिक्र नहीं है, लेकिन ऐतिहासिक शिकायतों और सैन्य कार्रवाइयों का संदर्भ है।

















