आतंक का पालनहार पाकिस्तान इसके लिए दुनिया भर में कुख्यात है। इसे अब अमेरिकी रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान कई तरह के आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित ठिकाना बना हुआ है। ‘आतंकी और पाकिस्तान के दूसरे आतंकी संगठन’ शीर्षक से इस रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस (CRS) ने बनाया है।
पाकिस्तान में 15 आतंकी संगठन सक्रिय हैं
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 15 बड़े आतंकी और सशस्त्र मिलिटेंट ग्रुप सक्रिय हैं। इनमें से 12 को अमेरिका ने विदेशी आतंकी संगठन के रूप में नामित किया हुआ है। ज्यादातर ग्रुप इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित हैं। इनमें भारत पर फोकस करने वाले, अफगानिस्तान पर फोकस करने वाले, ग्लोबल, घरेलू और शिया विरोधी सेक्टेरियन ग्रुप शामिल हैं।
इसमें कहा गया है कि 1980 के दशक से कुछ ग्रुप पाकिस्तान में काम कर रहे हैं। पाकिस्तान की सरकार ने कई बड़े सैन्य अभियान चलाए, एयर स्ट्राइक्स कीं और इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशंस किए, लेकिन फिर भी ये संगठन जमीन पर सक्रिय बने हुए हैं। 2014 में पाकिस्तान ने नेशनल एक्शन प्लान बनाया था, जिसमें सभी सशस्त्र मिलिशिया को खत्म करने की बात कही गई थी। लेकिन रिपोर्ट कहती है कि उस प्लान के बावजूद ये ग्रुप अभी भी वहां मौजूद हैं।
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भारत में आतंक फैलाते हैं ये आतंकी
भारत पर फोकस करने वाले ग्रुपों में लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और हिजबुल मुजाहिदीन (HM) जैसे आतंकी संगठन शामिल हैं। इनमें से हिजबुल और जैश जैसे ग्रुपों के पास 1,500 से ज्यादा सक्रिय समर्थक बताए गए हैं। ये ग्रुप जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की कोशिश करते हैं और भारत पर हमले की प्लानिंग करते रहते हैं। रिपोर्ट में हक्कानी नेटवर्क का भी जिक्र है, जो अफगानिस्तान पर फोकस करता है और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों से जुड़ा हुआ माना जाता है।
पाकिस्तान का झूठा दावा
रिपोर्ट में पाकिस्तान के कुछ दावों को भी झूठा बताया गया है। पाकिस्तान अक्सर बलूचिस्तान में हो रही अशांति को भारत प्रायोजित आतंकवाद बताता रहा है, लेकिन यह रिपोर्ट उसकी पोल खोलती है। भारत ने हमेशा ऐसे आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पाकिस्तान को अपनी असफलताओं से ध्यान हटाने की बजाय अपनी जमीन पर आतंकियों को पनाह देना बंद करना चाहिए।
रिपोर्ट यह साफ करती है कि पाकिस्तान में अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित कई आतंकी संगठन बिना किसी रुकावट के काम कर रहे हैं। ये ग्रुप न सिर्फ पाकिस्तान के लिए बल्कि पूरे इलाके के लिए सुरक्षा चुनौती बने हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान अभी भी इन नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने में नाकाम रहा है।











