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ईरान की फुटबॉल टीम की कैप्टन ने अब ऑस्ट्रेलिया से शरण की अर्जी वापस ली: क्या है कारण?

ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने वाली ईरानी महिला फुटबॉल खिलाड़ियां परिवार की सुरक्षा के लिए वापस लौट रही हैं। जाहरा घानबरी समेत कई पर मौत की सजा का डर।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Mar 16, 2026, 11:11 am IST
in विश्व, विश्लेषण
Iran women Football Player Austrelia Assylum

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलिया में ईरान की कई महिला फुटबॉल खिलाड़ियों ने शरण ली थी। औपचारिक रूप से मांगी गई शरण को ऑस्ट्रेलिया सरकार ने इस मांग को स्वीकार भी कर लिया था। मगर धीरे-धीरे महिला खिलाड़ियों ने अपने निर्णय से वापस हटने का निर्णय लिया है। धीरे-धीरे वे उसी देश में वापस जा रही हैं, जहां पर उन्हें लगता है कि उन्हें दंड दिया जाएगा। उन्हें “वार ट्रेटर्स” की संज्ञा पहले ही दी जा चुकी है।

फुटबॉल टीम की कप्तान का परिवार ही गायब

जिस खिलाड़ी ने अब नाम वापस लिया है वह है ईरान की फुटबॉल टीम की कप्तान। 34 वर्षीय जाहरा घानबरी अब अपने देश ईरान वापस लौट रही हैं। न्यूयॉर्कपोस्ट के अनुसार, जाहरा ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि उनके परिवार का कहीं पता नहीं चल रहा है। ईरान की न्यूज़ एजेंसी आईआरएनए ने यह खबर दी कि जाहरा ने ऑस्ट्रेलिया से अपनी शरण की अर्जी वापस ले ली है।

तीन खिलाड़ियों ने पहले ही वापस ले ली थी अर्जी

वहीं इससे पहले जिन पाँच खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में शरण की अर्जी दी थी, उनमें से तीन खिलाड़ियों ने 14 मार्च को अपनी अर्जी वापस ले ली थी, क्योंकि उनके परिजनों की सुरक्षा लगातार खतरे में आ रही थी। इस खबर की पुष्टि रीड शहर की मेयर टीना कोरदिस्तमी ने की थी कि ऑस्ट्रेलिया में शरण मांगने वाली ईरानी खिलाड़ियों में से तीन खिलाड़ी ईरान वापस लौट रही हैं। उन्होंने फॉक्स न्यूज चैनल को बताया था कि कि तीनों खिलाड़ी वापस लौट रही हैं। हालांकि, इसे उन्होंने एक परेशान करने वाला तथ्य बताया था। उन्होंने इसका कारण कुछ नहीं बताया था। हाँ, उन्होंने इतना अवश्य कहा था कि ईरान की सरकार चूंकि खिलाड़ियों से सीधा संपर्क कर रही है, तो इसलिए वे बहुत ज्यादा डरी हुई हैं।

उनसे यह भी पूछा गया था कि क्या खिलाड़ियों को धमकाया जा रहा है, तो कोर्डरोस्तमी ने कहा, “मुझे ऐसा लगता नहीं, मुझे यह पक्का पता है।”

इसे भी पढ़ें: खाड़ी युद्ध का असर: होर्मुज स्ट्रेट बंद, ब्रेंट क्रूड $106 पार, तेल कीमतें आसमान छू रही हैं

खिलाड़ियों के परिवारों को हिरासत में लेने का दावा

इसके आगे उन्होंने स्पष्ट कहा था कि उन्हें यह भली तरह से पता है कि इन खिलाड़ियों के परिवारों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा था, “मुझे पता है कि उनके परिवारों को हिरासत में भी लिया गया है। मुझे पता है कि परिवार के कुछ सदस्य लापता हैं। एक बात जो मैं पश्चिम के लोगों को सच में समझाना चाहती हूँ, वह यह है कि देश के अंदर रहने वाले ईरानी कई मायनों में पश्चिम से उम्मीद छोड़ चुके हैं, और इस सरकार के राज में ज़िंदा रहने के लिए वे सिर्फ़ एक-दूसरे पर ही निर्भर हैं।”

“इसलिए, जब हम उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता दिखाते हैं, तो उनके लिए यह समझना अक्सर आसान नहीं होता कि यह सच में बाहर निकलने का ही एक रास्ता है। उन्हें एक-दूसरे पर निर्भर रहने की ज़्यादा आदत है, और उनके लिए यही ज़िंदा रहने का तरीका है।”

बेरहमी की आशंका

कोर्डरोस्तमी ने आगे कहा कि जो महिलाएँ वापस लौटती हैं, तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्हें खिलाड़ियों की बहुत चिंता है। उन्होंने कहा था, “हमें उनकी बहुत चिंता है। हमें पक्का पता है कि वे सुरक्षित नहीं रहेंगी। मैंने यह बात पहले भी कही है। जब आप ईरान में एक खिलाड़ी के तौर पर अपना कॉन्ट्रैक्ट तोड़ते हैं, तो आपको मौत की सज़ा भी मिल सकती है। इसलिए, मुझे पता है कि ये महिलाएँ अभी जवान हैं। वे एक बहुत ही मुश्किल फ़ैसला ले रही हैं, और मेरे मन में उनके लिए बहुत इज़्ज़त है।”

दुर्भाग्य से यह सभी को पता है कि इन महिला खिलाड़ियों के साथ क्या होगा, यह सभी को पता है, परंतु उसके लिए कोई कुछ कर पाएगा, इसमें संदेह है। और अब इन तीन खिलाड़ियों के बाद फुटबॉल टीम की कप्तान जाहरा भी ईरान वापस जा रही हैं, और वह भी यह जानते हुए कि अब उनके साथ क्या हो सकता है?

हिजाब विरोधी खिलाड़ी शिवाय अमीनी का चौंकाने वाला दावा

हिजाब न पहनने के कारण ईरान से निष्कासित महिला फुटबॉल खिलाड़ी शिवाय अमीनी ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि उन्हें जो सूचना मिली है उसके अनुआर ईरान फुटबॉल फेडरेशन, इस्लामिक रेवलूशनेरी गार्ड आईआरजीसी के साथ मिलकर ईरान में खिलाड़ियों के परिजनों पर बहुत ही अधिक दबाव डाल रहा है।

कप्तान जाहरा की अम्मी पर IRGC का दबाव

उन्होंने जाहरा के परिजनों को निशाना बनाया है और वह भी यह जानते हुए कि उसने अभी हाल ही में अपने पिता को खोया है और अब वे उसकी माँ पर दबाव डाल रहे हैं। यह दबाव यह दिखाता है कि किस सीमा तक इन खिलाड़ियों के साथ अत्याचार हो सकता है। उन्होंने लिखा कि “कई खिलाड़ियों ने वापस लौटने का फ़ैसला किया, क्योंकि उनके परिवारों को मिल रही धमकियाँ असहनीय हो गई थीं और उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा था।

हालाँकि, अभी भी कई खिलाड़ी वहीं मौजूद हैं। उन पर बहुत ज़्यादा दबाव है और उन्हें तुरंत सहायता और सुरक्षा की ज़रूरत है। स्थिति बेहद गंभीर हो गई है, क्योंकि उनके परिवारों के ख़िलाफ़ धमकियाँ और डराने-धमकाने की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं।“

यह और भी अधिक दुर्भाग्यपूर्ण है कि इन लड़कियों के लिए न ही यूएन वुमन सामने आता है और न ही महिला विमर्श के ठेकेदार! भारत में तो इन महिलाओं की पीड़ा न जाने विमर्श के किस कोने में छिप जाती है।

Topics: ईरान फुटबॉल फेडरेशनमहिला अधिकार ईरानIran women's footballZahra GhanbariIranian footballers seek asylum in Australiaईरान महिला फुटबॉलIranian players returnजाहरा घानबरीIRGC pressureईरानी फुटबॉल खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया शरणShiva Aminiईरानी खिलाड़ी वापसीIran Football FederationIRGC दबावwomen's rights Iranशिवा अमीनी
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