अमेरिका के वर्जीनिया राज्य में ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी हुई गोलीबारी, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो अन्य घायल गया था। उसमें शामिल हमलावर मोहम्मद बेलोर जल्लोह को मार गिराया गया है। वह ISIS से प्रेरित था।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि वर्जीनिया के नॉर्फोक शहर में स्थित विश्वविद्यालय में आर्मी ROTC (रिजर्व ऑफीसर्स ट्रेनिंग कॉर्प्स ) की क्लास चल रही थी। उसी दौरान एक शख्स क्लासरूम में घुसा। इसके बाद उसने “अल्लाहु अकबर” के मजहबी मारे लगाते हुए फायरिंग शुरू कर दी। क्लास में मौजूद ROTC के छात्रों ने तुरंत हिम्मत दिखाई, हमलावर को पकड़ा और उसे मार गिराया। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस और FBI की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला।
हमलावर कौन था?
हमलावर की पहचान मोहम्मद बेलोर जल्लोह के रूप में हुई, उम्र 36 साल। वह पहले वर्जीनिया नेशनल गार्ड में था, जहां उसने 2009 से 2015 तक सर्विस की और ऑनरेबल डिस्चार्ज मिला। 2016 में उसने इस्लामिक स्टेट (IS) को मटेरियल सपोर्ट देने की कोशिश का जुर्म कबूल किया था। वह IS से जुड़े एक सदस्य से संपर्क में था और अमेरिका में फोर्ट हुड (2009) जैसा हमला करने की योजना बना रहा था। 2017 में उसे 11 साल की सजा हुई, लेकिन 2024 में वह जेल से रिहा हो गया था।
हताहत और घायल
इस आतंकी हमले में जिस शख्स की मृत्यु हुई है, वह लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रैंडन शाह था, जो ROTC में प्रोफेसर ऑफ मिलिट्री साइंस और ट्रेनर थे। वह अमेरिकी आर्मी में अफगानिस्तान और इराक में सर्विस कर चुके थे, ब्रॉन्ज स्टार से सम्मानित थे और पाकिस्तानी मूल के परिवार से थे। दो अन्य घायल भी आर्मी से जुड़े थे और उनका इलाज चल रहा है।
आतंकी हमला मानकर जांच शुरू
FBI ने इसे आतंकी हमले के तौर पर जांच शुरू की है। FBI के नॉर्फोक फील्ड ऑफिस के स्पेशल एजेंट डोमिनिक इवांस ने बताया कि छात्रों की बहादुरी से और ज्यादा नुकसान रुका। FBI डायरेक्टर काश पटेल ने X पर कहा कि छात्रों और कानून प्रवर्तन की टीम ने जानें बचाईं। वर्जीनिया की गवर्नर एबिगेल स्पैनबर्गर ने भी ब्रैंडन शाह की सेवा की तारीफ की और कहा कि वह छात्रों को नेतृत्व सिखाते थे।











