मार्च का महीना आते ही टैक्स देने वाले लोगों के लिए कुछ जरूरी काम पूरे करना बहुत जरूरी हो जाता है। क्योंकि 31 मार्च के साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 खत्म हो जाएगा और 1 अप्रैल से नया वित्त वर्ष 2026-27 शुरू हो जाएगा। अगर लोग समय रहते अपने जरूरी वित्तीय काम पूरे कर लेते हैं, तो वे टैक्स भी बचा सकते हैं और भविष्य में लगने वाली पेनल्टी या अतिरिक्त ब्याज से भी बच सकते हैं। इसलिए हर टैक्सपेयर को मार्च के अंत से पहले अपनी वित्तीय स्थिति की सही तरह से जांच कर लेनी चाहिए।
निवेश के दस्तावेज जमा करें और समय पर एडवांस टैक्स भरें- सबसे पहले नौकरी करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने निवेश से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज अपनी कंपनी या नियोक्ता को समय पर जमा कर दें। कई बार कर्मचारी साल की शुरुआत में टैक्स बचाने के लिए अलग-अलग योजनाओं में निवेश करने की जानकारी कंपनी को देते हैं। लेकिन अगर साल के अंत तक वे उन निवेशों के प्रमाण जमा नहीं करते हैं, तो कंपनी उनकी सैलरी से ज्यादा टीडीएस काट सकती है। इससे उनकी सैलरी कम हो सकती है। इसलिए 31 मार्च से पहले सभी जरूरी दस्तावेज जमा करना जरूरी है। इसके अलावा जिन लोगों की कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये से ज्यादा होती है, उन्हें एडवांस टैक्स भरना होता है। नियमों के अनुसार एडवांस टैक्स की आखिरी किस्त जमा करने की अंतिम तारीख 15 मार्च 2026 है। अगर कोई व्यक्ति इस तारीख तक एडवांस टैक्स जमा नहीं करता है, तो उसे बाद में ब्याज और पेनल्टी देनी पड़ सकती है। इसलिए समय पर एडवांस टैक्स भरना बहुत जरूरी है।
टैक्स बचत के लिए निवेश योजनाएं- जो लोग पुराने टैक्स सिस्टम को चुनते हैं, वे टैक्स बचाने के लिए कुछ खास योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। आयकर कानून की धारा 80C के तहत पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) जैसी योजनाओं में निवेश करने पर टैक्स में छूट मिलती है। इन योजनाओं में पैसा लगाने से भविष्य के लिए बचत भी होती है और टैक्स भी कम देना पड़ता है। इसके साथ ही इन खातों को चालू रखने के लिए हर साल इनमें कम से कम तय राशि जमा करना भी जरूरी होता है। अगर ऐसा नहीं किया जाता, तो खाते बंद या निष्क्रिय हो सकते हैं। इसलिए साल खत्म होने से पहले इन खातों की जांच कर लेना अच्छा रहता है।
हेल्थ इंश्योरेंस से टैक्स में छूट- इसके अलावा हेल्थ इंश्योरेंस लेना भी टैक्स बचाने का एक अच्छा तरीका है। आयकर की धारा 80D के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर टैक्स छूट मिलती है। कोई भी व्यक्ति अपने और अपने परिवार के लिए भरे गए प्रीमियम पर 25,000 रुपये तक की छूट ले सकता है। अगर माता-पिता की उम्र 60 साल से ज्यादा है, तो यह छूट 50,000 रुपये तक हो सकती है। इस तरह हेल्थ इंश्योरेंस स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ टैक्स बचाने में भी मदद करता है।












