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मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन: परियोजना की लागत क्यों बढ़ी? NHSRCL ने बताया कारण

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत 1.08 लाख करोड़ से बढ़कर 1.98 लाख करोड़ हो गई। NHSRCL ने जमीन अधिग्रहण, देरी और ग्लोबल बेंचमार्क का हवाला देते हुए कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया।

Published by
कुलदीप सिंह

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत बढ़ने को लेकर काफी शोर शराबा शुरू हो गया है। कई लोग तमाम तरह के सवाल उठा रहे हैं कि आखिर क्यों खर्चा इतना बढ़ गया और इसका बोझ कौन उठाएगा। इन सभी सवालों पर सरकार और नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने विराम लगाते हुए इस पर बयान दिया है।

परियोजना की शुरुआती और मौजूदा लागत

रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरू में 2015-16 के आसपास जब ये परियोजना तैयार की गई थी, तब इसकी अनुमानित लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये (या कुछ रिपोर्ट्स में 1.1 लाख करोड़) बताई गई थी। अब अपडेटेड अनुमान के अनुसार ये लागत बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यानी करीब 83-90 हजार करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है। इसी को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां आलोचना कर रही हैं। विपक्षी दल इसे “मोदी का वैनिटी प्रोजेक्ट” कह रहे हैं। विपक्षी पार्टियों ने इस परियोजना के आधा पूरा होने तक इस पर 2.5 लाख करोड़ तक जाने का दावा किया गया है।

लागत क्यों बढ़ी?

NHSRCL और सरकार का कहना है कि शुरुआती अनुमान प्रारंभिक स्टेज का था, जो करीब एक दशक पहले बनाया गया था। बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में ऐसा होना आम बात है। असल काम शुरू होने के बाद डिटेल्ड डिजाइन, इंजीनियरिंग, टेंडर फाइनल होने और खासकर जमीन अधिग्रहण में आई देरी से खर्च बढ़ा है। जमीन लेने में काफी समय लगा, सरकारी मंजूरियां लेने में देरी हुई और रोलिंग स्टॉक (ट्रेनें) फाइनल करने में भी देरी हुई। ये सब मिलाकर लागत में इजाफा हुआ। सरकार का कहना है कि अब ये अनुमान ग्लोबल बेंचमार्क के हिसाब से ठीक बैठते हैं, जैसे हाईवे, मेट्रो या एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स में रिवाइज्ड एस्टीमेट आते हैं।

भारत-जापान के सहयोग से हो रहा निर्माण

बुलेट ट्रेन परियोजना भारत और जापान की पार्टनरशिप से चल रहा है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) ने बहुत सस्ते ब्याज दर पर लोन दिया है – सिर्फ 0.1-0.25% के आसपास ब्याज, और रीपेमेंट पीरियड भी बहुत लंबा है। ये दुनिया के सबसे सस्ता इंफ्रा लोन्स में से एक है। शुरुआती योजना के अनुसार, JICA 81% फंडिंग कवर कर रही थी।

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कांग्रेस का बेबुनियाद आरोप

अब बढ़ी लागत पर कांग्रेस का आरोप है कि एक्स्ट्रा 90 हजार करोड़ का बोझ इंडियन रेलवे या सरकार पर पड़ेगा, और वो महंगे 7-8% ब्याज पर उठाएंगे। लेकिन NHSRCL ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि भारत-जापान का फंडिंग एग्रीमेंट बहुत व्यापक और क्लियर है। बढ़ी लागत के लिए कोई नया लोन JICA से नहीं लिया जाएगा, बल्कि सरकार की तरफ से बजटरी सपोर्ट (ग्रॉस बजटरी सपोर्ट) से पूरा किया जाएगा। ये स्पेशल स्पेशल एजेंसी के जरिए मैनेज होगा, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें शामिल हैं। साथ ही इसके लिए फंडिंग का कोई संकट नहीं है।

काम कितना पूरा हुआ?

परियोजना के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। गुजरात में जमीन अधिग्रहण और निर्माण तेजी से हुआ है। पूरा 508 किमी का कॉरिडोर दिसंबर 2029 तक तैयार होने की उम्मीद है। पहला सेक्शन (सूरत-बिलिमोरा) अगस्त 2027 तक शुरू हो सकता है। भारतीय रेल चालक जापान में शिंकानसेन तकनीक की ट्रेनिंग ले रहे हैं। टिकट कीमतें मौजूदा ट्रेन और एयर ट्रैवल के मुकाबले कॉम्पिटिटिव रखने की प्लानिंग है।

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