ईरान से युद्ध के बीच अमेरिका ने हाल ही में मिनटमैन III इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का एक टेस्ट किया है। यह मिसाइल न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है और अमेरिकी सेना के लिए काफी अहम हिस्सा है। यह टेस्ट 3 मार्च की रात 11:01 बजे पैसिफिक टाइम किया गया। परीक्षण की जगह थी कैलिफोर्निया स्थित वांडेनबर्ग स्पेसफोर्स बेस है। यहीं से अनआर्म्ड मिनटमैन III मिसाइल लॉन्च की गई, जिसका कोड GT-255 था।
मिसाइल में दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल लगे थे। यह हजारों मील की दूरी तय करके वेस्ट-सेंट्रल पैसिफिक ओशन में मार्शल आईलैंड के पास बने टारगेट एरिया पर सही से गिरी। दावा किया गया है कि यह टेस्ट पूरी तरह सफल रहा।
अमेरिकी सेना का बयान
अमेरिकी एयरफोर्स ग्लोबल स्ट्राइक फोर्स कमांड और उसकी स्पेस फोर्स ने कहा कि यह टेस्ट सालों पहले से प्लान किया हुआ था। यह किसी मौजूदा घटना या दुनिया की स्थिति से जुड़ा नहीं है। यह एक लंबे समय से चल रहे रूटीन इवैल्यूएशन प्रोग्राम का हिस्सा है, जिसमें दशकों से 300 से ज्यादा ऐसे टेस्ट हो चुके हैं।
एयरफोर्स की 576वीं फ्लाइट टेस्ट स्क्वाड्रन की लेफ्टिनेंट कर्नल कैरी रे ने कहा, “GT-255 से हमें मिसाइल सिस्टम के अलग-अलग कंपोनेंट्स की परफॉर्मेंस चेक करने का मौका मिला। अलग-अलग मिशन प्रोफाइल टेस्ट करके हम पूरी ICBM फ्लीट की परफॉर्मेंस बेहतर करते हैं, ताकि न्यूक्लियर ट्रायड के लैंड-बेस्ड हिस्से की रेडीनेस सबसे ऊपर रहे।” सेना का कहना है कि ऐसे टेस्ट से मिसाइल की रिलायबिलिटी, एक्यूरेसी और तैयार रहने की स्थिति की जांच होती है। डेटा से भविष्य में सिस्टम को और मजबूत किया जाता है।
मिनटमैन III मिसाइल की खासियत
मिनटमैन III अमेरिका की पुरानी लेकिन भरोसेमंद ICBM है, जो 1970 से सर्विस में है। यह न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकती है, जो हिरोशिमा पर गिराए गए एटम बम से 20 गुना तक ज्यादा ताकतवर हो सकते हैं। रेंज करीब 6,000 मील (लगभग 9,600 किलोमीटर) है। स्पीड 15,000 मील प्रति घंटा से ज्यादा होती है, यानी यह महाद्वीपों को पार करके मिनटों में टारगेट तक पहुंच सकती है। अभी अमेरिका के पास सैकड़ों ऐसी मिसाइलें अलर्ट मोड में तैनात हैं। यह न्यूक्लियर ट्रायड (लैंड, एयर, सी बेस्ड) का लैंड-बेस्ड हिस्सा है।











