ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए बड़े पैमाने पर जवाबी हमले शुरू किए हैं। खामेनेई की मौत अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में हुई, जिसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों व ड्रोनों से हमला किया। यह घटनाक्रम पिछले कुछ दिनों में तेजी से बढ़ा है और इलाके में तनाव बहुत ज्यादा हो गया है।
क्या है पूरा मामला
सबसे पहले अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया, जिसमें खामेनेई समेत कई बड़े नेता मारे गए। ईरानी राज्य मीडिया ने इसकी पुष्टि की। रविवार को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर कलीबाफ ने टीवी पर कहा कि अमेरिका और इजरायल ने हमारी लाल रेखा पार की है और इसकी कीमत चुकानी होगी। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की। ईरान ने नए सर्वोच्च नेता चुनने के लिए एक नेतृत्व परिषद बनाई है, जो एक-दो दिन में फैसला कर सकती है।
ईरान के तेहरान और दूसरे शहरों में हमले से 200 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसके साथ ही देश के दक्षिणी इलाके में एक स्कूल पर भी हमला किया गया, जिसमें 115 मौतें हुई हैं। यह दूसरा बड़ा संयुक्त हमला है, पिछले साल जून में भी 12 दिनों का युद्ध हुआ था, जिसमें ईरान की हवाई सुरक्षा और परमाणु ठिकाने प्रभावित हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी लोगों से अपनी सरकार के खिलाफ उठने की अपील की, लेकिन ईरान में कोई बड़ा विरोध नहीं दिखा।
हमलों का विवरण
ईरान ने इजरायल पर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे। तेल अवीव में धमाकों की आवाजें आईं। बेत शेमेश में एक यहूदी प्रार्थना स्थल पर हमला हुआ, जहां कई लोग मारे गए। इजरायली सेना ने कई मिसाइलों को रोक लिया, लेकिन कुछ जगहों पर नुकसान हुआ। खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने ड्रोन और मिसाइलों से हमले किए, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल व्यापार पर असर पड़ सकता है। अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य ठिकानों, नेताओं और मिसाइल साइटों पर लगातार हवाई हमले जारी रखे। तेहरान में धमाके हुए और सरकारी इमारतों के आसपास धुआं उठा।
किन देशों पर किए गए हमले
इजरायल: बेत शेमेश में 8-9 मौतें, कुल 10-11 मौतें और 120 से ज्यादा घायल। तेल अवीव और यरुशलम इलाकों में सायरन बजे।
यूएई: अबू धाबी और दुबई में हमले, मुख्य बंदरगाह और बुर्ज अल अरब होटल में आग लगी, 2-3 मौतें और दर्जनों घायल।
सऊदी अरब: रियाद और पूर्वी इलाकों पर हमले की कोशिश, ज्यादातर रोकी गईं।
जॉर्डन: 49 ड्रोन और मिसाइलों का सामना किया।
कुवैत, बहरीन, कतर: अमेरिकी ठिकानों पर हमले, मिसाइलें रोकी गईं।
पाकिस्तान: कराची में अमेरिकी दूतावास के पास हमला, 9 मौतें।
हताहत और नुकसान
ईरान में अमेरिका-इजरायल के हमलों से 200 से ज्यादा मौतें। वहीं ईरानी पलटवार में इजरायल में कुल 10-11 मौतें और 120+ घायल हुए हैं। अमेरिका के 3 सैनिक मारे गए, 5 गंभीर घायल। यूएई में 2-3 मौतें, पाकिस्तान में 9 मारे गए हैं। इसके अलावा कई जगहों पर आग और इमारतों को नुकसान हुआ है।
कौन क्या कह रहा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका-इजरायल को जिम्मेदार ठहराया और खाड़ी देशों से युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने को कहा। राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन ने बदला लेना अपना हक बताया। इजरायल के रक्षा मंत्री ने ईरान के सैन्य और नेतृत्व ठिकानों पर हमले जारी रखने की बात कही। ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लिया जाएगा और ईरान पर पहले जैसा हमला नहीं देखा गया होगा। सऊदी अरब, जॉर्डन और दूसरे खाड़ी देशों ने हमलों की निंदा की और अपनी रक्षा की।

















