ब्रिटेन की रॉयल नेवी ने नॉर्थ सी में एक खास तरह का ड्रोन फ्लीट तैयार करने का प्लान बनाया है। ब्रिटेन रूस से जुड़े तेल टैंकरों पर नजर रखने और उन्हें पकड़ने के लिए समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल करना चाहता है। ये टैंकर रूस का वो तेल ले जा रहे हैं, जिस पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगा रखे हैं।
मुख्य प्लान क्या है
संडे टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि रॉयल नेवी ने एक कमांड सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया है, जहां से दूर से कंट्रोल किए जाने वाले कई छोटे-छोटे बिना चालक वाली नावें (UAV) चलाई जा सकेंगी। इनका काम होगा नॉर्थ सी में घूमते उन टैंकरों की जासूसी करना, जो रूसी बंदरगाहों से आ-जा रहे हैं। इन ड्रोनों से इकट्ठा की गई जानकारी और सबूतों के आधार पर इंग्लिश चैनल में ऐसे जहाजों को जब्त किया जा सकेगा।
अक्टूबर 2025 में नॉर्थ सी में एक प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट एक्सरसाइज हुई थी, जिसमें HMS Tyne जहाज और Rattler नाम का UAV शामिल था। ये दिखाता है कि ब्रिटेन इस तरह की तकनीक पर पहले से काम कर रहा है।
रूस का ‘शैडो फ्लीट’ क्या है
2022 से ब्रिटेन ने रूसी कच्चे तेल और तेल उत्पादों के आयात पर पूरी तरह रोक लगा दी है। साथ ही, ऐसे जहाजों को बीमा, फाइनेंसिंग और समुद्री सेवाएं देने पर भी प्रतिबंध हैं। इसके बावजूद, रूस ने इंग्लिश चैनल से होकर 550 मिलियन टन तेल भेजा है, जिसकी अनुमानित कीमत 326 अरब डॉलर है। इनमें से कई जहाज पुराने हैं, फर्जी झंडे लगाकर चलते हैं और ‘शैडो फ्लीट’ कहलाते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये प्रतिबंध ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स में ये भी कहा गया है कि ब्रिटेन में भारत और तुर्की से आने वाले डीजल का करीब 40% हिस्सा असल में रूसी तेल से बना होता है।
कानूनी और व्यावहारिक बातें
अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत खुले समुद्र में जहाजों की आजादी होती है, इसलिए प्रतिबंधों को लागू करना आसान नहीं है। इस साल अब तक दो टैंकर पकड़े गए हैं – एक मरीना को अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से नॉर्थ अटलांटिक में पकड़ा, और दूसरा ग्रिन्च को फ्रांस ने मेडिटेरेनियन में। ब्रिटिश डिफेंस सेक्रेटरी जॉन हीली ने कहा है कि सहयोगी देशों के साथ मिलकर और जहाजों को रोकने की कोशिश जारी रहेगी।
लेकिन पकड़े गए जहाजों को रखना बहुत महंगा पड़ता है, इसलिए लंदन सोच रहा है कि जब्त तेल को बेचकर खर्च निकाला जाए।रूस की तरफ से प्रतिक्रियारूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने ऐसे कदमों को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और ‘समुद्री लूट’ बताया है। पुतिन ने फ्रांस द्वारा एक जहाज पकड़ने को ‘पाइरेसी’ कहा था। रूस का कहना है कि ये पुरानी ब्रिटिश आदत है, जहां प्रतिद्वंद्वी जहाजों को लूटने की इजाजत दी जाती थी।












