सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर पर एक हाई-लेवल कमिटी बनाने वाली है। फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने ये बात कही है। ये कमिटी ‘विकसित भारत’ के लिए बैंकिंग को तैयार करने का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी, ताकि आने वाले समय में देश को बड़े-बड़े फाइनेंसिंग की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
मुख्य बात क्या है?
ये कमिटी बैंकिंग सेक्टर की पूरी समीक्षा करेगी। इसका मकसद है कि बैंकिंग सिस्टम को भारत के अगले विकास चरण के साथ जोड़ा जाए। साथ ही फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, लोगों तक पहुंच (इनक्लूजन) और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को भी मजबूत रखा जाए। फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि बैंकिंग को इतना बड़ा और मजबूत बनाना है कि वो विकसित भारत के फंडिंग, क्रेडिट और आम आदमी तक बैंकिंग सुविधाओं की जरूरत पूरी कर सके।
उन्होंने ये भी जोर दिया कि “विकसित भारत” तक पहुंचने के लिए पैसा चाहिए, फाइनेंसिंग चाहिए, क्रेडिट चाहिए और बैंकिंग सुविधाएं आम आदमी तक पहुंचनी चाहिए। कमिटी बताएगी कि इसके लिए क्या-क्या कदम उठाने होंगे। फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि कमिटी को जल्द से जल्द बनाया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम इसे सबसे जल्दी करेंगे।”
बजट में क्या कहा गया था?
ये प्रस्ताव 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 में आया था। बजट स्पीच में निर्मला सीतारमण ने कहा था, “मैं ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई लेवल कमिटी’ बनाने का प्रस्ताव करती हूं, जो सेक्टर की पूरी समीक्षा करेगी और भारत के अगले विकास चरण के साथ इसे जोड़ेगी, जबकि फाइनेंशियल स्टेबिलिटी, इनक्लूजन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को सुरक्षित रखेगी।”
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NBFC में बदलाव का पहला कदम
बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन (REC) को रिस्ट्रक्चर करने का प्रस्ताव था। इन दोनों पब्लिक सेक्टर NBFC को स्केल बढ़ाने और एफिशिएंसी सुधारने के लिए ये पहला कदम है। PFC के बोर्ड ने पिछले हफ्ते REC के साथ मर्जर को इन-प्रिंसिपल अप्रूवल दे दिया है। REC पहले से PFC की सब्सिडियरी है और दोनों नव रत्न सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइज हैं, जो पावर सेक्टर के प्रोजेक्ट्स को फंडिंग देते हैं। 2019 में PFC ने सरकार से REC में 52.63% स्टेक ₹14,500 करोड़ में खरीदा था, जिससे मैनेजमेंट कंट्रोल मिला। ये भी उसी तरह की कंसॉलिडेशन की दिशा में था।
मर्जर पर क्या बोलीं वित्त मंत्री
जब उनसे पूछा गया कि क्या कमिटी पब्लिक सेक्टर बैंकों के मर्जर सुझाएगी, तो उन्होंने कहा कि इसे सिर्फ मर्जर तक सीमित मत करो। फोकस बैंकिंग सेक्टर को इतना बड़ा बनाने पर है कि वो विकसित भारत की जरूरतें पूरी कर सके। उन्होंने कहा, “बहुत सारा काम मिनिस्ट्री में हो चुका है, वो लोग उम्मीद लेकर आए हैं, देखते हैं कैसे आगे बढ़ता है।” बताया जाता है कि ये कदम बैंकिंग को मजबूत और बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी है, खासकर जब सेक्टर पहले से ही अच्छी हालत में है।

















