कनाडा मेडिकल असिस्टेंस इन डाईंग की सच्चाई: ठीक होने योग्य मरीजों को क्यों दी जा रही मौत?
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कनाडा मेडिकल असिस्टेंस इन डाईंग की सच्चाई: ठीक होने योग्य मरीजों को क्यों दी जा रही मौत?

कनाडा के MAID प्रोग्राम में ठीक होने योग्य मरीजों को मौत दी जा रही है। सरीब्रल पालसी और क्रोनिक बीमारियों के मामलों से उजागर हो रही सच्चाई, अकेलेपन का बोझ और समाज की भूमिका पर चर्चा।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Feb 2, 2026, 10:50 am IST
inविश्व
Canada Medical Assistence in dying

प्रतीकात्मक तस्वीर

कनाडा में मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग प्रोग्राम में जिस प्रकार से आँकड़े और मामले सामने आ रहे हैं, वे लोगों के भीतर गुस्सा भर रहे हैं। कहने के लिए यह प्रोग्राम उन लोगों के लिए था कि जिनके जीवन में कुछ ही दिन शेष हैं और ऐसी बीमारी है, जिसके ठीक होने की कोई भी संभावना नहीं है। परंतु कई मामले ऐसे आ रहे हैं, जिनमें ऐसे लोगों को भी ये मौत दी जा रही है, जो ठीक हो सकते हैं।

सरीब्रल पालसी से पीड़ित व्यक्ति को दी मौत

दो ऐसे मामले और निकलकर आए हैं। एक मामला है 60 की वय के एक व्यक्ति का जो सरीब्रल पालसी से पीड़ित था। यह ऐसी स्थिति होती है, जो व्यक्ति के चलने फिरने की क्षमता को प्रभावित करती है और जन्म से पहले से ही दिमाग जब क्षतिग्रस्त होता है, तो यह उसके कारण होती है। तो इसका अर्थ यह हुआ कि वह एक व्हीलचेयर तक ही सीमित व्यक्ति था। मीडिया और रिपोर्ट्स के अनुसार वह अपनी व्हील चेयर पर अपने आप कहीं भी आ जा सकता था। वह अपने काम अपने आप कर सकता था और बाथरूम भी अपने आप जा सकता था।

चूंकि उसे अत्याधुनिक चिकित्सीय देखभाल की आवश्यकता थी, तो वह लॉंग टर्म केयर परिसर में रहता था और वहीं पर काफी अरसे से रह रहा था। और यह भी सच है कि अपनी शारीरिक विवशताओं के कारण वह अकेलेपन का शिकार भी था। उसके पास न ही परिवार था और न ही कोई साथ। वह मन के स्तर पर टूटा हुआ व्यक्ति था। उसने अपने कष्ट और अकेलेपन के विषय में बातें कीं। और कहा कि उसे अकेलेपन का अनुभव काफी लंबे समय से रहा। और चूंकि वह लॉंग टर्म केयर परिसर में रहता था, तो उसका यह अकेलापन और भी अधिक बढ़ता गया। खाली जीवन का बोझ उस पर सहा नहीं जा रहा था।

फिर उसने मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग का अनुरोध किया, और उसने यह निर्णय करने से छ से आठ सप्ताह पहले खाना और पीना बंद कर दिया था। वह केवल एक या दो कैलोरी के पेय ही लेता था और फिर उसके फिजीशियन ने मेडिकल अससिस्टेंस इन डाइंग के लिए भेज दिया। मिस्टर बी के नाम से उल्लेख किये गए इस व्यक्ति की कमजोरी के कारण व्हील चेयर न चला पाना भी कारण गिना गया। रिपोर्ट ने यह बताया कि कैसे उसके कष्ट का कारण मुख्यतया मनोवैज्ञानिक एवं अस्तित्वगत था। उसके मूड का आँकलन किया गया और फिर यह बताया गया कि वह ट्रैक 2 के अंतर्गत MAID (Medical Assistence in dying) के लिए पात्र हो सकता है।

क्या है MAID 

MAID के प्रावधानों के अंतर्गत, ट्रैक 2 उन लोगों को MAID लेने की अनुमति देता है जिनकी मौत स्वाभाविक तो मानी जाती है, लेकिन वह “पहले से पता नहीं होती है”, जो ट्रैक 1 से अलग है, जिसमें MAID पाने के लिए मरीज़ों की “स्वाभाविक मौत” का “पहले से पता होना” ज़रूरी है।

इसमें उसे कमजोरी आई थी एक सप्ताह तक कुछ न खाने पीने से! और इसे कई लोगों ने बताया भी, परंतु यह संज्ञान में नहीं लिया गया और अंतत: मिस्टर बी को मरने में चिकित्सीय सहायता दे दी गई। www.westernstandard.new के अनुसार एक और घटना ऐसी हुई है। 60 के आयु दशक की एक महिला को भी मेडिकल असिस्टेंस इन डाइंग के चलते मौत दे दी गई, जबकि वह ठीक हो सकती थी।

ओंटारियो MAID डेथ रिव्यू कमेटी (OMDRC) की 2025 की रिपोर्ट में उन्हें मिसेज़ ए कहा गया है। वह हाइपरटेंशन, डिस्लिपिडेमिया, टाइप II डायबिटीज़, स्लीप एपनिया और डिप्रेशन से पीड़ित थीं, जिनका इलाज वह दवाओं से करती थीं।

समय के साथ इन बीमारियों के कारण उनके शरीर में कई समस्याएं पैदा हो गईं थीं और इस कारण उन्होंने कुछ समय तक हेल्थ केयर नहीं ली। ओएमडीआरसी के सदस्यों ने यह बताया कि मिसेज ए ने अपनी क्रोनिक बीमारियों के लक्षणों को सही करने में सहायता के लिए किसी भी सपोर्ट से इनकार कर दिया। और इसके कारण उसके जीवन की गुणवत्ता में कमी आई। और जो उसे कष्ट बढ़े तो उसने यह फैसला कर लिया कि अब वह जिंदा नहीं रहना चाहती है, जिसका परिणाम हुआ कि उसने अपने इलाज और दवाई बंद कर दीं।

जब MAID के लिए उसका आँकलन किया गया तो यह बताया गया कि उसकी हालत सुधर सकती है और वह मेडिकल मैनेजमेंट के साथ संभावित रूप से बेहतर हो सकती है। दोनों ही आँकलन करने वालों ने उसे एक्सटेन्सिव केयर के विकल्प दिए, परंतु मिसेज ए ने दोनों से ही इनकार कर दिया।

और रिपोर्ट में कहा गया है, “उनकी हालत, यानी मोटापे के साथ कई बीमारियां/कोमॉर्बिडिटीज़, मेडिकल मैनेजमेंट के बिना ठीक न होने वाली पाई गई।” यह कहा गया कि चूंकि वह दवाई नहीं लेना चाहती है, और इससे उसकी सेहत और खराब होगी ही। रिपोर्ट में यह नहीं कहा गया कि उसे किसी भी तरह का डिप्रेशन था या फिर आत्मघाती विचार थे, जिससे उसकी इच्छा मृत्यु को जोड़ा जा सके। इन दोनों ही मामलों पर बहसें हो रही हैं और कहीं न कहीं यह कथित विकसित देशों की ऐसी सच्चाई हैं, जिनपर बात नहीं होती है। हर काम सरकार के हवाले करने का यही परिणाम होता है क्या? जब समाज का कार्य सरकार करने लगे तो क्या व्यक्ति इतना टूट जाता है कि उसे साथ ही नहीं मिलता और वह सरकार से मौत ही मांग लेता है?

यह एक ऐसा पहलू है और घटनाएं हैं, जिनपर चर्चा होनी चाहिए, बात होनी ही चाहिए, क्योंकि अकेलेपन से घबराकर मौत मांग ली जाए, इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता है।

Topics: Medical Assistance in Dyingeuthanasia CanadaTrack 2 MAIDmental suffering MAIDMAID कनाडामेडिकल असिस्टेंस इन डाइंगeuthanasia कनाडाट्रैक 2 MAIDमानसिक कष्ट MAIDMAID Canada
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