छद्म सेकुलरवाद : देश को बदनाम करने के ये ठेकेदार
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छद्म सेकुलरवाद : देश को बदनाम करने के ये ठेकेदार

हामिद अंसारी दस साल देश के उप राष्ट्रपति रहे। उन्हें अपने कार्यकाल के अंतिम दिन विक्टिम कार्ड की याद आई। अंतिम कार्यदिवस पर अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना घर कर रही है

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jan 24, 2026, 03:18 pm IST
inभारत, विश्लेषण

हामिद अंसारी दस साल देश के उप राष्ट्रपति रहे। उन्हें अपने कार्यकाल के अंतिम दिन विक्टिम कार्ड की याद आई। अंतिम कार्यदिवस पर अल्पसंख्यकों का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश के मुस्लिमों में बेचैनी और असुरक्षा की भावना घर कर रही है। साथ ही कहा कि लोकतंत्र की पहचान इसी बात से होती है कि उसमें अल्पसंख्यकों को कितनी सुरक्षा मिली हुई है। अपनी एक किताब में भी उन्होंने इसी तरह के तमाम दावे किए। एक साक्षात्कार को लेकर वह खासे ट्रोल हुए, जिसमें उन्होंने कहा कि 2014 से सेक्युलरिज्म के मायने बदल गए। यह वही अंसारी हैं, जो दस साल तक उप राष्ट्रपति रहे। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे। अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रहे। भारत के राजदूत रहे। इतना सब इसी देश ने दिया और फिर यही देश, यही समाज ‘सांप्रदायिक’ हो गया।

आमिर खान ने 2015 में (2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनी) एक कार्यक्रम में कहा था, ‘पिछले 6-8 महीने से देश में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ी है। यहां तक कि मेरा परिवार भी अब इसको महसूस कर रहा है। मैं और मेरी पत्नी किरण राव पूरी जिंदगी भारत में ही जिए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने मुझसे देश छोड़ने की बात कही। उन्हें अपने बच्चे के लिए डर लगता है। उन्हें ये भी लगता है कि आने वाले समय में हमारे इर्द-गिर्द कैसा माहौल होगा। वह जब भी अखबार खोलती हैं, उन्हें डर लगता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि समाज में अशांति बढ़ी है।’ विक्टिम कार्ड खेलने के बावजूद आमिर खान कहीं नहीं गए। जिस पत्नी के कंधे पर बंदूक रखकर उन्होंने अपने दिल की बात कही, उसे तलाक दे दिया। इसी असुरक्षा के बीच उन्होंने पीके जैसी फिल्म बनाई और महादेव का अपमान करने का दुस्साहस किया। यह वही आमिर खान हैं, जिन्होंने भारत के प्रति शत्रुता रखने वाले व दिल में खलीफा बनने की हसरत पाले तुर्की के राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन की खातिरदारी कबूल की थी।

शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान जब ड्रग्स मामले में फंसे तो उनके बचाव में मुस्लिम कट्टरपंथियों की सबसे बड़ी पैरोकार आरफा खानम ने ट्वीट किया कि ‘आर्यन खान मामले का कोई भी लेना देना ड्रग्स का सेवन करने से नहीं है, मगर इसमें शाहरुख खान को निशाना बनाया जा रहा है। आर्यन खान के जमानत लेने के मूल अधिकार को भी इस स्वतंत्र देश में नकारा जा रहा है। शाहरुख खान निश्चित ही हमारे समय के सबसे बड़े मुस्लिम सुपर स्टार हैं। यह शाहरुख खान के लिए सन्देश है कि या तो हमारा साथ दो या फिर सजा के लिए तैयार हो जाओ।’ आरफा ने जो लिखा, सो लिखा, लेकिन शाहरुख खान ने उनके इस दावे का कभी विरोध नहीं किया।

नसीरुद्दीन शाह ने 2021 में एक साक्षात्कार में कहा था कि मुसलमानों को दोयम दर्जे का नागरिक बनाया जा रहा है। मुसलमानों के बीच डर पैदा करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मुसलमान हार नहीं मान लेंगे। मुसलमान इसका सामना करेंगे क्योंकि हमें अपना घर बचाना है। हमें अपने बच्चों को बचाना है। मुसलमानों को असुरक्षित महसूस कराने की संगठित कोशिश की जा रही है। यह शीर्ष से किया जा रहा है। सत्ताधारी पार्टी के लिए अलगाववाद नीति बन गया है।

मोहम्मद अजहरुद्दीन को एक खिलाड़ी के तौर पर सारे देश ने प्यार दिया। वे लंबे समय तक भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे, लेकिन जैसे ही हैंसी क्रोनिए मैच फिक्सिंग मामले में अजहरुद्दीन का नाम आया, तो उन्होंने भी चिर-परिचित मुस्लिम विक्टिम कार्ड ही खेला। पुख्ता सुबूत होने के बावजूद अजहरुद्दीन ने कहा कि उन्हें अल्पसंख्यक (मुस्लिम) होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है, कुछ खिलाड़ी उनसे ईर्ष्या करते हैं।

शबाना आजमी ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि ‘1992 में मुझे पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि मैं मुसलमान हूं।’ याद रखिए, यही वह समय था, जब कारसेवकों ने बाबरी ढांचे को गिरा दिया था। शबाना आजमी के मुताबिक, इस घटना के बाद उनसे लोग कहने लगे कि आप तो मुस्लिम हो। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्हीं के साथ ऐसा क्यों हो रहा था। यह फेहरिस्त बहुत लंबी है। कभी अवैध हथियार रखने के मामले में जेल में रहे संजय दत्त को लगने लगा कि उन्हें उनकी मां के मजहब के कारण निशाना बनाया जा रहा है तो कभी फारुख अब्दुल्ला को लगता है कि वह अगर मुसलमान न होते, तो देश के प्रधानमंत्री बन जाते। यह चिर-परिचित वैश्विक प्रवृत्ति है। व्यवस्था से लाभ उठाओ और फिर उसी को कोसो। गीतकार लकी अली को भी लगता है कि मुसलमान होने का मतलब है कि एक दिन आप अकेले रह जाओगे। यह प्रवृत्ति मुसलमानों में सर्वव्यापी है। दिल्ली दंगे के लिए जेल में बंद उमर खालिद को ही देख लीजिए। 53 लोगों की जिंदगी लील लेने वाले दंगे के आरोपी को लगता है कि उसे मुसलमान होने के कारण गिरफ्तार किया गया।

Topics: उमर खालिदशाहरुख खानहामिद अंसारीआमिर खाननसीरुद्दीन शाहपाञ्चजन्य विशेषशबाना आजमीमोहम्मद अजहरुद्दीनबॉलीवुड पर प्रहारसंजय दत्त
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