आजकल ज्यादातर घरों में नॉन-स्टिक पैन और कढ़ाही का इस्तेमाल होता है। इनमें खाना जल्दी बन जाता है और तेल भी कम लगता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही बर्तन आपकी सेहत के लिए धीरे-धीरे नुकसानदेह साबित हो सकते हैं? अमेरिका के अरबपति और एंटी-एजिंग एक्सपर्ट ब्रायन जॉनसन ने हाल ही में लोगों को नॉन-स्टिक बर्तनों से सावधान रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने एक रिसर्च का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है कि नॉन-स्टिक बर्तनों में इस्तेमाल होने वाले कुछ केमिकल्स बच्चों और किशोरों में फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं।
आखिर समस्या क्या है- नॉन-स्टिक बर्तनों में PFAS नाम के केमिकल्स इस्तेमाल होते हैं। इन्हें “फॉरएवर केमिकल्स” कहा जाता है, क्योंकि ये न तो जल्दी खत्म होते हैं और न ही शरीर से आसानी से बाहर निकलते हैं। इनमें से दो केमिकल खास तौर पर खतरनाक माने गए हैं- PFOA, PFHpA। रिसर्च के मुताबिक, अगर शरीर में PFOA का स्तर बढ़ता है तो फैटी लिवर होने का खतरा लगभग 169% तक बढ़ सकता है। वहीं PFHpA बढ़ने से यह खतरा 73% तक बढ़ जाता है।
बच्चों और किशोरों के लिए ज्यादा खतरा- स्टडी में पाया गया कि किशोरावस्था के आसपास बच्चे इन केमिकल्स के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं। इस उम्र में शरीर में हार्मोनल बदलाव तेजी से होते हैं, इसलिए PFAS का असर लिवर और मेटाबॉलिज्म पर ज्यादा पड़ता है। स्मोकिंग करने वालों के लिए खतरा और बढ़ जाता है। युवाओं में आमतौर पर इसका असर थोड़ा कम देखा गया, लेकिन जो युवा स्मोकिंग करते हैं, उनके लिए यह केमिकल और भी खतरनाक हो सकता है। ऐसे लोगों में फैटी लिवर और मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
क्या करें, क्या न करें- पुराने या खरोंच लगे नॉन-स्टिक बर्तन इस्तेमाल न करें। बच्चों के घर में नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल कम से कम करें। स्टील, कास्ट आयरन या मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता दें। “PFOA-फ्री” लिखे बर्तनों को ही चुनें, फिर भी सावधानी रखें। नॉन-स्टिक बर्तन सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन सेहत से बड़ा कुछ नहीं। खासकर बच्चों और किशोरों की सेहत को देखते हुए इन बर्तनों के इस्तेमाल पर दोबारा सोचने की जरूरत है।











