अफगानिस्तान में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों की एक और तस्वीर सामने आई है। एक 22 वर्षीय ताइक्वांडो खिलाड़ी और कोच खदीजा अहमद को उनके ही घर से तालिबान ने गिरफ्तार कर लिया है। तालिबान सरकार द्वारा महिला खिलाड़ियों पर प्रतिबंध के बाद वह हेरात में अपने घर में चुपके से ही लड़कियों को ताइक्वांडो सिखाती थीं। सोशल मीडिया पर जो समाचार आ रहे हैं, उनके अनुसार उन्हें उनके घर से तालिबान की मॉरल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
खदीजा को कहां ले गए पता नहीं
rukhsana.com के अनुसार स्थानीय स्रोतों ने गोपनीयता की शर्त पर उन्हें बताया कि उन्हें नहीं पता चल पाया था कि खदीजा को कहाँ पर ले जाया गया था और काफी मशक्कत के बाद यह पता चला कि उन्हें जेल में भेज दिया गया है। उनके वालिद और घर के मालिक को भी जेल भेज दिया गया है। यह कहा जा रहा है कि उन्होंने हेरात में लड़कियों के लिए अभ्यास के लिए घर में ही ट्रेनिंग स्पेस बना रखा था। चूंकि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने लड़कियों के लिए पढ़ाई और खेलकूद के तमाम दरवाजे बंद कर दिए हैं तो वहाँ पर लड़कियां चोरी छिपे कई काम कर रही हैं।
हालांकि इसमें खतरा भी काफी है क्योंकि पता लगने पर उन्हें गिरफ्तार भी तुरंत कर लिया जाता है। इससे पहले 11 जनवरी को एक महिला पत्रकार को भी गिरफ्तार करने का समाचार था। नजीरा रशीदी नामक महिला पत्रकार को 30 दिसंबर को गिरफ्तार कर लिया था, जब वे कुंदुज शहर में अपने घर से एक तालिबान खुफिया अधिकारी से मिलने के लिए निकली थीं, मगर वे घर नहीं आईं। जब घरवालों ने अस्पताल और तालिबान के सुरक्षा कार्यालयों में जाकर खोजा तो उन्हें पता चला कि नाज़िया को तो उनकी मीडिया गतिविधियों के कारण हिरासत में ले लिया है।
खदीजा को रिहा करने की मांग
नाज़िया दो बच्चों की माँ हैं और अपने घर में इकलौती कमाने वाली हैं। rukhsana. com के अनुसार अफगानिस्तान मीडिया सपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन ने इस घटना की निंदा की थी और नाज़िया को तत्काल रिहा करने की मांग की थी।
खदीजा अहमदजादा की रिहाई को लेकर सोशल मीडिया सक्रिय
ताइक्वांडो खिलाड़ी खदीजा की गिरफ़्तारी को लेकर सोशल मीडिया भी सक्रिय है। कुछ लोग खदीजा की रिहाई की मांग कर रहे हैं तो वहीं कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो यह बात उठा रहे हैं कि आखिर वह पकड़ी कैसे गई? दरअसल AVROTROS TV The Nederland ने कुछ दिनों पहले अफ़गान की इस खिलाड़ी के विषय में एक कार्यक्रम किया था और उसकी गतिविधियों के विषय में रिपोर्ट बनाई थी।
नीदरलैंड में अफगानी महिलाओं के लिए कार्य करने वाली गोलचेराह याफ़्ताली नामक महिला ने यह प्रश्न उठाया कि जैसा कि सभी को पता है कि अफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं की खेलकूद गतिविधियों पर रोक लगा दी थी, मगर फिर भी खदीजा गुप्त रूप से यह काम कर रही थीं। उन्होंने आगे लिखा कि हमारी मुख्य चिंता इस बात को लेकर है कि नीदरलैंड्स में रहने वाली एक अफ़गान महिला पत्रकार ने AVROTROS TV के माध्यम से एक कार्यक्रम में उन सभी महिला खिलाड़ियों की पहचान और नेटवर्क को सामने ला दिया है, जो खदीजा से प्रशिक्षण ले रही थीं और जाने-अनजाने तालिबान को उन महिलाओं की पहचान बता दी है।
महिलाओं का दमन कर रहा तालिबान
उन्होंने लिखा कि यह देखते और जानते हुए भी कि तालिबान का शासन एक सुनियोजित तरीके से अफगानी महिलाओं का दमन कर रहा है और इन महिलाओं की पहचान जाहिर होने से इनपर खतरा है। तो क्या इस कार्यक्रम को ब्रॉडकास्ट करने से पहले इन परिवारों की सुरक्षा के विषय में कोई कदम उठाए गए? और क्या इन महिलाओं से कोई स्वीकृति ली गई थी?
उन्होंने आगे लिखा कि AVROTROS TV को इस संबंध में स्पष्टीकरण देना होगा और मीडिया को इस जिम्मेदारी के विषय में स्पष्ट करना होगा कि इस कार्यक्रम के क्या परिणाम हो सकते हैं और साथ ही यदि उनकी तरफ से कोई लापरवाही पाई जाती है तो इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने लिखा कि “अफगानिस्तान में महिलाओं का जीवन मीडिया स्टोरी टेलिंग का विषय नहीं है: यह महत्वपूर्ण और गंभीर विषय है!”
लोग सोशल मीडिया पर हैशटैग चला रहे हैं कि खदीजा को रिहा किया जाए। खदिजा वर्ष 2021 में तालिबान की सत्ता आने से पहले कई प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेती थीं। उन्हें रिहा कराने को लेकर जहां हैशटैग सोशल मीडिया पर चल रहे हैं तो वहीं यूएन ने भी यह अनुरोध किया है कि खदीजा को रिहा किया जाए।
भारत के फेमिनिस्ट खेमे में चुप्पी है
जहां सोशल मीडिया पर खदीजा की रिहाई को लेकर तमाम तरह के हैशटैग चल रहे हैं, तो एक बार फिर से भारत के फेमिनिस्ट खेमे में चुप्पी है। खदिजा की गिरफ़्तारी को लेकर उनके बीच कोई भी विमर्श नहीं बन रहा है, जो लगातार ही खुद को महिला अधिकारों का ठेकेदार दशकों से बताते हुए आ रहे हैं। न ही महिलाएं इस मामले पर बोल रहे हैं और न ही पुरुष!















