नई दिल्ली: आज देशभर में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति के दिन सूर्यदेव का धनु से मकर राशि में प्रवेश होता है। इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के पाप कटते हैं और उसे पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। बड़ी तादाद में श्रद्धालु हरिद्वार और प्रयागराज में डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। इस कारण से इन दोनों ही जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रयागराज में 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात हैं। साथ ही पीएसी, आरएएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी तैनात की गई हैं।
मकर संक्रांति के दिन दान करने से पितरों को मोक्ष प्राप्त होता है। पौराणिक कथा अनुसार, राजा सगर के पुत्रों को कपिल मुनि ने भस्म कर दिया था। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने माता पार्वती की कठिन तपस्या की थी। इसके बाद मां गंगा धरती पर अवतरित हुईं। उनके स्पर्श से राजा सगर के पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ। यही कारण है कि गंगासागर में मकर संक्रांति पर श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं।
दोपहर 3 बजकर 13 मिनट में सूर्य देव मकर राशि में करेंगे प्रवेश
मकर संक्रांति के दिन दोपहर 3 बजकर 13 मिनट पर सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी क्षण से पुण्य काल शुरू माना जाता है। इस दिन सूर्यास्त तक का समय स्नान, दान और पूजा के लिए सबसे शुभ रहेगा। मकर संक्रांति पर कई सिद्धि योग बन रहे हैं। ज्योतिषों के मुताबिक, मकर संक्रांति पर रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग एक साथ बन रहे हैं। वाराणसी के शास्त्री दीपक जोशी का कहना है कि इस मकर संक्रांति पर बुधादित्य योग, चतुर्ग्रही योग और त्रिग्रही योग जैसे खास संयोग बन रहे हैं। ये योग जातकों की बुद्धि, निर्णय क्षमता, धन और प्रगति को मजबूती देते हैं। इसके अलावा सूर्य भी उत्तरायण होकर अपनी शुभ और मजबूत स्थिति में रहेंगे।
मकर संक्रांति पुण्य काल – दोपहर 03:13 से सायं 05:45 तक
मकर संक्रांति महा पुण्य काल – दोपहर 03:13 से सायं 04:58 तक
मकर संक्रांति के अन्य नाम क्या? क्यों इस दिन खाते हैं तिल-गुड़?
मकर संक्रांति को तमिलनाडु पोंगल कहा जाता है। गुजरात में इसे उत्तरायण कहा जाता है। पश्चिम उत्तर प्रदेश और बिहार में इसे खिचड़ी पर्व के तौर पर मनाया जाता है। उत्तराखंड में इस दिन घुघुती मनाते हैं और इसे घुघती का त्योहार कहा जाता है। असम में इस पर्व को माघ बिहू के रूप में मनाया जाता है। इस दिन तिल-गुड़ खाने की परंपरा बहुत पुरानी है। तिल को दुर्गति और दारिद्रय दूर करने वाला बताया गया है। गुड़ स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है। जनवरी में ठंड भी बहुत अधिक होती है ऐसे में तिल-गुड़ खाने से शरीर में गर्माहट और स्फूर्ति आती है। इससे आरोग्य मिलता है। ज्योतिष कहता है कि इस दिन तिल-गुड़ खाने से व्यक्ति पर सूर्य और शुक्र ग्रह की कृपा बनी रहती है। उसके जीवन मे खुशहाली आती है।

















