महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने मराठी अस्मिता की बात करते हुए बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर किसी चीज से महाराष्ट्र को फायदा होता है तो वो ट्रंप का समर्थन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। ठाकरे ने ये बात उद्धव ठाकरे के साथ हाथ मिलाने के मुद्दे पर कही है।
NDTV को दिए इंटरव्यू के दौरान राज ठाकरे कहते हैं कि राजनीति में लचीलापन बरतना मतलब विचारधारा से समझौता करना नहीं होता। उनका फोकस सिर्फ और सिर्फ मराठी लोगों की भलाई, मराठी भाषा की सुरक्षा और एक मजबूत महाराष्ट्र पर है।
मराठी अस्मिता से समझौता नहीं
राज ठाकरे ने बताया कि वो मराठी अस्मिता के मुद्दे पर बहुत सख्त हैं। चाहे चुनाव हार ही क्यों न जाएं, इस मामले पर वो पीछे नहीं हटेंगे। ये कोई राजनीतिक स्टंट नहीं है, बल्कि उनके लिए ये एक गहरी आस्था है। उन्होंने कहा कि ये सोच उन्हें अपने चाचा और शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे, पिता और दादा से मिली है। वो खुद को “extremely Marathi” बताते हैं और इस मुद्दे पर कोई रियायत बिल्कुल नहीं देंगे।
ट्रंप के समर्थन की बात
इंटरव्यू की सबसे चर्चित बात ये रही कि राज ठाकरे ने कहा – “अगर महाराष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए किसी दिन डोनाल्ड ट्रंप जैसा व्यक्ति भी सपोर्ट करना पड़े, तो मुझे कोई झिझक नहीं होगी।” उन्होंने एक उदाहरण दिया कि अगर किसी जगह पानी पहुंचाना हो तो कोई भी रास्ता अपनाया जा सकता है, बशर्ते मकसद साफ और पाक हो। उनके लिए राजनीतिक लेबल या नाम मायने नहीं रखते, राज्य के हित सबसे बड़े हैं।
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उद्धव के साथ गठजोड़ सिर्फ मराठी मुद्दे पर
उल्लेखनीय है कि राज ठाकरे ने हाल ही में उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT) के साथ हाथ मिलाया है। ये गठबंधन BMC चुनाव के लिए है। दरअसल, 15 जनवरी को मुंबई की बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) समेत राज्य के कई नगर निगमों के चुनाव होने जा रहे हैं। राज ठाकरे ने साफ किया कि ये एकता सिर्फ और सिर्फ मराठी भाषा और अस्मिता के मुद्दे पर है। इसका मतलब ये नहीं कि राज्य या केंद्र स्तर पर भी कोई स्थायी गठबंधन होगा। चुनावी गठजोड़ तो एक पूरी तरह अलग चीज है। दोनों परिवारों के बीच पहले लंबे समय से मतभेद थे, लेकिन अब मराठी हितों को लेकर वो एक साथ आ गए हैं।















