गत 4 जनवरी को रोहतक में सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी आयोजित हुई। इसका विषय था- ‘सज्जन शक्ति की समाज परिवर्तन में भूमिका।’ इसे संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत विश्व का मार्गदर्शन कर सके इसके लिए देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करना होगा, आंतरिक ताकत देनी होगी और संघ पिछले 100 वर्ष से इसके लिए ही कार्यरत है।
देश को आंतरिक तौर पर मजबूत करने के लिए समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट होकर आगे आना होगा। सद्भाव के साथ सभी महापुरुषों की जयंती मिलकर मनानी होगी, तभी राष्ट्र मजबूत होगा और जात-पात की खाई को पाटा जा सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल में सोने की चिड़िया कहलाता था। इसलिए भारत ने विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों को भी झेला है। 1600 ई में जब इंग्लैंड में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना हुई, उस समय भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार व्यवस्था में 23 प्रतिशत हिस्सा था। इससे पता चलता है कि प्राचीन काल में भारत आर्थिक तौर पर कितना समृद्ध था।
उन्होंने कहा कि हमारी ज्ञान परंपरा, संस्कृति सर्वोच्च कोटि की थी। हम एक चींटी में भी ईश्वर का अंश देखते हैं, लेकिन हम जाति-पाति, भिन्न-भिन्न पंथों में बंट गए। विदेशी आक्रांताओं ने इसका फायदा उठाया और हमें लंबे समय तक गुलामी झेलनी पड़ी। इसका परिणाम यह रहा कि देश की स्वतंत्रता के वर्षों बाद भी हम गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं। हम अपना आत्मविश्वास खो बैठे हैं। इस आत्मविश्वास को पुन: प्राप्त करने के लिए समाज की सज्जन-शक्ति को आगे आकर प्रयास करने होंगे।
एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना के समय डॉ. हेडगेवार ने कहा था कि समाज का कार्य पूर्ण होने के बाद संघ को समाज में विलीन हो जाना है। अगर समाज एक बार जाग्रत हो जाए तो फिर संघ को अलग से काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मंच पर उत्तर क्षेत्र संघचालक श्री पवन जिंदल और प्रांत संघचालक श्री प्रताप सिंह उपस्थित रहे।

















