नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेले के 53वें संस्करण आयोजन दिल्ली के भारत मंडपम में 10 जनवरी से आरंभ होगा। यह पुस्तक मेला 18 जनवरी तक चलेगा। 9 दिनों तक चलने वाले पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के 1000 से अधिक प्रकाशकों के 3000 से ज्यादा स्टॉल लगेंगे। इस बार बुक फेयर में 600 से अधिक आयोजन होंगे जिनमें 1000 से अधिक वक्ता संवाद करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बार विश्व पुस्तक मेले में 20 लाख से अधिक लोगों के आने की संभावना है। मेले का उदघाटन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान करेंगे। उनके साथ कतर और स्पेन के उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे।
विश्व पुस्तक मेले की थीम इस बार भारतीय सैन्य इतिहास…
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष प्रो मिलिंद सुधाकर मराठे का कहना है कि हमने स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे किए हैं और अपनी सशस्त्र सेनाओं को नमन करते हुए इस बार के पुस्तक मेले की थीम ‘भारतीय सैन्य इतिहास : शौर्य एवं प्रज्ञा@75’ रखी गई है। पहली बार पुस्तक मेला में प्रवेश सभी के लिए निःशुल्क रखा गया है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के निदेशक युवराज मलिक का कहना है कि हम पुस्तकों के साथ नए साल की शुरुआत कर रहे हैं। इस बार इसका स्वरूप उल्लेखनीय रूप से विशाल है।
- हॉल 2 : भारतीय भाषाओं के प्रकाशक एवं लेखक मंच
- हॉल 3 : भारतीय भाषा प्रकाशक और न्यू दिल्ली राइट्स टेबल
- हॉल 4 : गेस्ट ऑफ ऑनर कंट्री, फोकस कंट्री और अंतरराष्ट्रीय मंडप
- हॉल 5 : थीम पवेलियन, ऑथर्स कॉर्नर और सामान्य/व्यावसायिक प्रकाशक
- हॉल 6 : बाल मंडपम और शैक्षिक, मानविकी एवं आध्यात्मिक पुस्तकें
- एम्फीथिएटर-I : सांस्कृतिक कार्यक्रम
कतर और स्पेन के मुख्य अथिति विश्व मेले में होंगे शामिल
विश्व पुस्तक मेला 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सशक्त भागीदारी देखने को मिलेगी। इसमें कतर सम्मानित अतिथि देश एवं स्पेन फोकस देश के रूप में शामिल होंगे। सम्मानित अतिथि देश के रूप में कतर की भागीदारी पर बोलते हुए कतर के राजदूत मोहम्मद हसन जबीर अल जाबेर ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले को दुनिया के सबसे प्रमुख सांस्कृतिक मंचों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि भारत और कतर दो प्राचीन सभ्यताएं हैं, जो समृद्ध इतिहास और विविध सांस्कृतिक विरासत की साझा विरासत से जुड़ी हुई हैं। कतर का मानना है कि पुस्तक केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य की समझ को बढ़ावा देने वाला एक सशक्त साधन है, जो भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ता है। यह पुस्तक मेला विचारों के आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच होगा और हमें आशा है कि क़तर की भागीदारी इस आयोजन को और समृद्ध करेगी।














