बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली इस्लामिक कट्टरपंथी सरकार में हिन्दुओं पर लगातार अत्याचार हो रहे हैं। ताजा मामले में 6 जनवरी 2026 की रात को बांग्लादेश के नरसिंदी जिले के पलाश उपजिला में चरसिंदुर बाजार में एक हिंदू किराना दुकानदार की हत्या कर दी गई। पीड़ित का नाम मणि चक्रवर्ती (या कुछ रिपोर्टों में सरत चक्रवर्ती मणि) था, उम्र करीब 40 साल। वह शाम को अपनी दुकान पर ही था, जब अज्ञात हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। हमले में उसे गंभीर चोटें आईं। स्थानीय लोगों ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन रास्ते में या अस्पताल पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। हमले का तरीका चाकू या अन्य धारदार हथियार से किया गया बताया जा रहा है।
पीड़ित के बारे में
मणि चक्रवर्ती शिबपुर उपजिला के सधाचार यूनियन का रहने वाला था। उसके पिता का नाम मदन ठाकुर है। बाजार के अन्य व्यापारी उसे शांत और साधारण व्यापारी बताते हैं, जिसके साथ किसी तरह का कोई पुराना झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। वह कई सालों से चरसिंदुर बाजार में किराना का काम कर रहा था और इलाके में जाना-पहचाना चेहरा था।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इस घटना पर अभी तक पुलिस की ओर से कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, इसी दिन शाम को जशोर जिले में एक अन्य हिंदू व्यक्ति राणा प्रताप (45) की गोली मारकर हत्या हुई थी, जिसके मामले में स्थानीय पुलिस अधिकारी राजिउल्लाह खान ने बताया कि घटनास्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी गई है। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है और हमलावरों की तलाश की जा रही है। मणि चक्रवर्ती के मामले में भी ऐसी ही जांच चल रही होगी, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी या संदिग्ध व्यक्ति का नाम सामने नहीं आया।
हाल के घटनाक्रम
यह हत्या पिछले 18 दिनों में हिंदू समुदाय के सदस्यों पर हुई छठी घातक घटना है। इससे पहले की कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं: 6 जनवरी शाम को ही जशोर जिले के मणिरामपुर में राणा प्रताप नाम के व्यक्ति को बाजार में गोली मार दी गई। मयमनसिंह जिले में बाजेंद्र बिस्वास नाम के व्यक्ति को गोली मारी गई। दिसंबर अंत में शरियतपुर जिले के खोकन चंद्र दास नाम के व्यापारी को भीड़ ने चाकू मारा और आग लगा दी, जिसमें उनकी मौत हो गई (इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया)। अन्य मामलों में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल जैसे लोगों की भी हत्या हुई।
इन घटनाओं से हिंदू समुदाय में काफी डर और असुरक्षा का माहौल है। समुदाय के लोग बार-बार अपराधियों को पकड़ने और सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं। अभी तक ज्यादातर मामलों में हमलावरों का पता नहीं चला है और मोटिव भी स्पष्ट नहीं हुआ है।
















