क्या चीन ताइवान पर हमला करने वाला है? क्या दुनिया में एक और युद्ध का फ्रंट खुलने जा रहा है? जिस तरह से चीन ने युद्धाभ्यास के बहाने से ताइवान को चारों तरफ से घेर लिया है, उससे तो इसी के संकेत मिल रहे हैं। चीनी हरकतों के कारण ताइवान सागर में तनाव चरम पर पहुंच गया है। यह सर्दियों के मौसम में हो रहा है, जब आमतौर पर ऐसी गतिविधियाँ कम होती हैं। ताइवान की तरफ से उड़ानें रद्द करने की खबर आई है, जिससे दुनिया भर के करीब एक लाख यात्रियों पर असर पड़ रहा है।
सैन्य अभ्यास की शुरुआत
चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने ‘जस्टिस मिशन 2025’ नाम से बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभ्यास शुरू किया है। इसमें थल सेना, नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स शामिल हैं। अभ्यास ताइवान स्ट्रेट के साथ-साथ उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, दक्षिण-पूर्व और पूर्व दिशाओं में हो रहा है। इसमें लाइव फायर ड्रिल, बंदरगाहों की नाकाबंदी का अभ्यास और जमीन-समुद्र पर सिमुलेटेड हमलों का प्रैक्टिस शामिल है।
चीनी सेना ने ताइवान को चारों तरफ से घेरने जैसी स्थिति बनाई है। पूर्वी थिएटर कमांड ने कहा कि यह अभ्यास अलगाववादी ताकतों और बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त चेतावनी है। अभ्यास में फाइटर जेट, बॉम्बर, ड्रोन, लॉन्ग रेंज मिसाइलें और युद्धपोत शामिल हैं।
उड़ानों पर असर
ताइवान की सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बताया कि इन अभ्यासों के कारण हवाई क्षेत्र और कई रूट्स पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। मंगलवार को होने वाले अभ्यास में 850 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित हुईं, जिससे 1 लाख से अधिक यात्रियों को परेशानी हुई। करीब 80-84 घरेलू उड़ानें रद्द की गईं, जिनमें किनमेन और मात्सु द्वीपों से जुड़ी 68 और 16 उड़ानें शामिल हैं। इससे लगभग 6,000 घरेलू यात्री प्रभावित हुए।कई उड़ानों को वैकल्पिक रास्तों पर भेजा गया, जिससे समय और ईंधन दोनों ज्यादा लग रहा है। ताइवान ने हवाई यातायात नियंत्रण के साथ मिलकर फ्लो कंट्रोल लगाया, लेकिन फिर भी देरी की उम्मीद जताई गई।
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ताइवान का रुख
ताइवान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रखा है। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हम किसी भी खतरे से निपटने के लिए तैयार हैं। ताइवान की तरफ से कहा गया कि चीन दुनिया में शांति को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने अपनी सुरक्षा बलों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है और स्थिति पर नजर रख रहे हैं।
वजह क्या है
यह तनाव हाल ही में अमेरिका द्वारा ताइवान को 11 अरब डॉलर (करीब 11.1 बिलियन) के हथियार पैकेज की मंजूरी देने के बाद बढ़ा है। यह अब तक का सबसे बड़ा हथियार सौदा माना जा रहा है। इसके अलावा जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने कहा था कि अगर चीन ने ताइवान पर कोई कार्रवाई की तो जापानी सेना भी शामिल हो सकती है। चीन इन दोनों बातों से नाराज है। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और ‘वन चाइना’ नीति के तहत इसे अलगाववादी मानता है। ताइवान खुद को स्वतंत्र लोकतंत्र मानता है और इन दावों को खारिज करता है।











