उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 24 दिसंबर, 2025 को वीर बाल दिवस 2025 के शुभ अवसर पर I.R.D.T. ऑडिटोरियम, सर्वे चौक, देहरादून में एक शानदार, गरिमापूर्ण और प्रेरणा देने वाला कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम को ऑर्गनाइज करने का मकसद साहिबज़ादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबज़ादा फतेह सिंह जी के अनोखे साहस, बलिदान और अटूट विश्वास को श्रद्धांजलि देना और बच्चों में साहस, नैतिक मूल्यों, आत्म-सम्मान और अधिकारों के बारे में जागरूकता फैलाना था। वीर बाल दिवस भारत के इतिहास में उन अमर बाल वीरों की स्मृति को समर्पित है, जिन्होंने अत्यंत कम आयु में भी अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया और सत्य एवं धर्म के मार्ग पर अडिग रहते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम ने न केवल उनके शौर्य का स्मरण कराया, बल्कि वर्तमान समय में बच्चों के अधिकारों की रक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के महत्व को भी रेखांकित किया।
उद्घाटन एवं पंजीकरण सत्र
कार्यक्रम की शुरुआत रजिस्ट्रेशन से हुई, जिसमें अलग-अलग स्कूलों के स्टूडेंट्स, टीचर्स, सोशल वर्कर्स, एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर्स, कमीशन के अधिकारी और आम लोग बड़ी संख्या में मौजूद थे। पंजीकरण सत्र के दौरान प्रतिभागियों को कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराया गया तथा बच्चों के लिए विशेष रूप से तैयार की गई सामग्री को वितरित किया गया। सत्र का आरम्भ मंचासीन गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन करतें हुये कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय के साथ विशिष्ट अतिथियों का सम्मान कर किया गया। मा0 अध्यक्ष महोदया, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मुख्य अतिथि माननीय मंत्री श्रीमती रेखा आर्य जी (महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग) को पुष्पगुछ भेंट किए। दीप प्रज्वलन के माध्यम से सत्य, साहस और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीकात्मक संदेश दिया गया। उद्घाटन सत्र ने पूरे कार्यक्रम को एक गंभीर, प्रेरक और भावनात्मक स्वर प्रदान किया। उद्घाटन के उपरान्त सभागार में उपस्थित सभी बच्चों, शिक्षकों एंव गणमान्य अतिथियों द्वारा एक सुर में भारत का राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ गया, जिसे सरकारी विद्यालय के बच्चों द्वारा प्रस्तुत किया गया। बच्चों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने सभागार को देशभक्ति और गर्व की भावना से भर दिया। यह प्रस्तुति कार्यक्रम के उद्देश्य देश, समाज और बच्चों के प्रति उत्तरदायित्व को सशक्त रूप से दर्शाती थी।
वीर बाल दिवस पर प्रेरक विचार एवं बच्चों के कल्याण पर संदेश
जिसके उपरान्त आयोग की माननीय अध्यक्ष डॉ. गीता खन्ना द्वारा मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने वीर बाल दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहिबजादों की शहादत केवल अतीत की घटना नहीं, बल्कि आज के समाज के लिए एक जीवंत संदेश है। उन्होंने बच्चों के अधिकारों, शिक्षा, संरक्षण, सम्मान और सहभागिता पर विस्तार से चर्चा की तथा कहा कि आयोग बच्चों के सर्वांगीण विकास एवं सुरक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है.मा0 अध्यक्ष महोदया के सम्बोधन के उपरान्त श्री अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी जनपद देहरादून द्वारा अतिथि संबोधन दिया गया। उन्होंने प्रशासन की ओर से बच्चों के कल्याण के लिए चल रही योजनाओं की जानकारी दी तथा कहा कि समाज का भविष्य बच्चों के हाथों में है, इसलिए उन्हें सुरक्षित, शिक्षित और सशक्त बनाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उनके द्वारा बताया गया किया राज्य सरकार द्वारा बच्चों के चलायी जा रही सभी योजनाओं पर सक्रिय रूप से कार्य किया जा रहा है तथा अधिक से अधिक बच्चों को लाभाविंत करने का प्रयास निरंतर जारी है।
बाल दिवस पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण वीर बाल दिवस पर आधारित संगीतमय कार्यक्रम रहा। कार्यक्रम में गुरमत संगीत बाल विद्यालय, हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के विद्यार्थियों द्वारा गुरुबाणी कीर्तन की हार्दिक और आध्यात्मिक प्रस्तुति दी गई, जिसे सुनकर सभी उपस्थित जन हृदय से भावविभोर हो उठे, और गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा जी की गरिमामयी उपस्थिति एवं मार्गदर्शन ने कार्यक्रम की भव्यता और उद्देश्य को हार्दिक रूप से और अधिक बल प्रदान किया। यह आयोजन साहिबजादों के साहस, त्याग और धर्मनिष्ठा से प्रेरणा लेने तथा नई पीढ़ी में नैतिक और सांस्कृतिक मूल्यों के संचार का सशक्त संदेश देता है।
वीर बाल दिवस पर बच्चों को मंत्री रेखा आर्य जी का प्रेरक संदेश और पुरस्कार वितरण
इसके पश्चात उत्तराखंड सरकार की माननीय मंत्री रेखा आर्य जी (महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग) ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बच्चों को आर्शीवाद व आर्शीवचन देते हुये उपस्थित हुये, उनके प्रेरणादायी संबोधन में उन्होंने साहिबजादों के बलिदान को नमन करते हुए कहा कि वीर बाल दिवस केवल स्मरण का दिन नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। संकल्प कि हर बच्चे को सुरक्षित, सम्मानजनक और अवसरों से भरपूर भविष्य मिलेगा। श्रीमती रेखा ने बच्चों को देश का उज्ज्वल भविष्य बताते हुए उन्हें आत्मविश्वास और मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मा0 मंत्री द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में अपना उत्कृष्ठ प्रर्दशन देनो वाले 8 बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पुस्कार प्राप्त करने वाले बच्चों मे दनिराजा त्रिपुरा, टेबल टेनिस, हेम्फु सारमोन एंग्धी निबंध लेखन, सूरज देववर्मा, खेल, अंकित पटेल, खेल, वैष्णी सिंह द्वारा योग में तथा तीन बच्चों (वैष्णी सिंह, यमायर तौमर व योहाना तोमर द्वारा शूटिंग में) द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वोच्च प्रर्दशन दिया गया हैं। जिनमें जिससे बच्चों का उत्साहवर्धन हुआ। इसके पश्चात सभी अतिथियों, बच्चों और आयोजकों के साथ समूह चित्र लिया गया।
उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखण्ड सरकार को मुख्य अतिथि के रूप में आतंत्रित किया गया था, किन्तु पूर्व निर्धारित एवं शासकीय कार्यों में अत्याधिक व्यस्तता के कारण कार्याक्रम में उपस्थित न होने पर उनके द्वारा अपने आर्शीवचन पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराये गये।
वीर बाल दिवस: साहस, बलिदान और बच्चों के अधिकारों का सम्मान
मुख्यमंत्री धामी द्वारा कहा गया कि वीर बाल दिवस उन महान वीर बालकों के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अनुपम बलिदान की स्मृृति का प्रतीक है, जिन्होनें अल्प आयु में भी अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरूद्ध खडे होकर सत्य और धर्म की रक्षा के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया। सहिबजादे बाबा जोरावर ंिसंह जी और बाबा फतेह सिंह जी जैसे वीर बाल इतिहास के पन्नों में ही नही बल्कि राष्ट्र की आत्मा मे सदैव अमर है। मा0 मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें आशा है कि उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा अपने उद्देश्यों के अनुरूप बच्चों के अधिकारों की रक्षा, जागरूकता के प्रसार तथा संवेदनशील मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप की दिशा में किये जा रहे कार्यो के क्रम में इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा, जो कि बच्चांे में निसंदेह आत्मविश्वास, नैतिक मूल्यों, संवैधानिक अधिकारों एंव कर्तव्यों केे प्रति चेतना विकसित करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगा। उन्होेने कहा कि राज्य सरकार बच्चों को सुरक्षित, सम्मानजनक और सशक्त वातावरण प्रदान करने के लिये पूर्णतः प्रतिबद्ध रहेंगें।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, बच्चों, शिक्षकों एवं सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का औपचारिक समापन हुआ तथा उपस्थित जनों के लिए भोजन वितरण की व्यवस्था की गई। वीर बाल दिवस, 2025 का यह आयोजन न केवल ऐतिहासिक स्मरण था, बल्कि एक सशक्त सामाजिक संदेश भी था, कि बच्चे केवल भविष्य नहीं, बल्कि वर्तमान के भी निर्माता हैं। उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ। कार्यक्रम में नरेन्द्रजीत सिंह बिंद्र, अध्यक्ष, हेमकुण्ड सहिब ट्रस्ट/पूर्व अध्यक्ष, अल्पसंख्यक आयोग, विनोद कपरवाण, पूर्व सदस्य, उत्तराखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, श्री अभिनव शाह, मुख्य विकास अधिकारी, देहरादून, पी0एल0 भारती, शिक्षा विभाग, डा0 शिव कुमार बरनवाल, सचिव, उत्तरााखण्ड बाल अधिकार संरक्षण आयोग, डा0 सतीश कुमार सिंह, अनुसचिव व टीम उपस्थित रही।












