लोकसभा ने आज (18 दिसंबर 2025) को एक नया विधेयक पारित कर दिया, जिसका पूरा नाम है विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025। इसे संक्षेप में VB-जी राम जी बिल या जी राम जी बिल कहा जा रहा है। यह बिल पुरानी मनरेगा योजना की जगह लेगा, जिसमें ग्रामीण परिवारों को साल में 100 दिन की गारंटीड मजदूरी वाली नौकरी मिलती थी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बिल को सदन में पेश किया था और इसका बचाव भी किया।
बिल में क्या नए प्रावधान हैं
इस नए बिल में ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को सालाना 125 दिन की अकुशल मजदूरी वाली काम की गारंटी दी गई है, जो मनरेगा के 100 दिनों से 25 दिन ज्यादा है। फंड का बंटवारा बदल गया है – अब यह सेंट्रली स्पॉन्सर्ड स्कीम होगी, जहां ज्यादातर राज्यों के लिए केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 होगा, जबकि उत्तर-पूर्वी और हिमालयी राज्यों के लिए 90:10। पहले मनरेगा में केंद्र अकुशल मजदूरी का पूरा खर्च और सामग्री का तीन-चौथाई उठाता था। अब केंद्र हर साल राज्यों के लिए नॉर्मेटिव अलोकेशन तय करेगा, और अगर खर्च इससे ज्यादा हुआ तो राज्य खुद वहन करेंगे।
बिल में कृषि सीजन में काम रोकने का प्रावधान भी है – राज्य सरकारें हर साल 60 दिन तक की अवधि पहले से घोषित कर सकती हैं, जब कोई काम नहीं चलेगा। पानी की सुरक्षा, ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट रेसिलिएंस पर फोकस बढ़ाया गया है। सरकार का कहना है कि ये बदलाव भ्रष्टाचार कम करेंगे और योजना को ज्यादा प्रभावी बनाएंगे।
सदन में विपक्ष का हंगामा
बिल पर चर्चा और वोटिंग के दौरान विपक्षी सांसदों ने काफी विरोध किया। कई सांसदों ने बिल की कॉपियां फाड़कर सदन में फेंक दीं और कागज के टुकड़े उछाले। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यह बिल मनरेगा को खत्म करने की साजिश है और ग्रामीण गरीबों के अधिकार कमजोर करेगा। विपक्ष का आरोप था कि चर्चा के लिए बहुत कम समय दिया गया और बिल को स्टैंडिंग कमिटी में भेजा जाना चाहिए था।
शिवराज सिंह चौहान का जवाब
शिवराज सिंह चौहान ने बिल के पक्ष में बोलते हुए कहा कि मनरेगा में भ्रष्टाचार बहुत हो गया था, अब नए बदलाव से इसे रोका जा सकेगा। महात्मा गांधी का नाम हटाने पर उन्होंने कहा कि बापू तो आज भी हमारे बीच जिंदा हैं, राम राज्य उनका ही सपना था। विपक्ष के हंगामे पर बोले कि बिल फाड़ना गांधीजी की अहिंसा के खिलाफ है। स्पीकर ओम बिरला ने भी हंगामे पर ऐतराज जताया और कहा कि सदन में जनता के मुद्दे उठाने चाहिए, न कि इस तरह शोर मचाना।
क्या बोले दूसरे नेता
विपक्षी दलों ने बिल को मनरेगा के अधिकारों को कमजोर करने वाला बताया। कुछ सहयोगी दलों जैसे टीडीपी ने भी राज्य पर बोझ बढ़ने की चिंता जताई, लेकिन समर्थन करने की बात कही। सरकार का पक्ष है कि राज्य सरकारों की हिस्सेदारी बढ़ने से जवाबदेही आएगी और योजना बेहतर चलेगी। बिल पास होने के बाद सदन स्थगित कर दिया गया।

















