भारत ने बांग्लादेश को एक बार फिर जता दिया है कि ‘जितने हो, उतने रहो!’। ढाका में आगामी आम चुनाव की सुगबुगाहटों के बीच कट्टरपंथी तत्वों को वहां भारत विरोधी नफरत फैलाने का मौका मिला है। शेख हसीना को भारत द्वारा शरण देने से कुढ़े इस्लामवादियों ने अब अपने कद से बाहर जाकर भारत के उच्चयोग तक को निशाना बनाने की धमकियां दी हैं, पूर्वोत्तर भारत को काटने के भड़काने वाले बयान दिए हैं। लेकिन अब नए भारत की सरकार यह सब सहन नहीं करने वाली। भारत के विदेश मंत्रालय ने फौरन बांग्लादेश के उच्चायुक्त को मंत्रालय में बुलाकर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
कल यानी 17 दिसम्बर को भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाजुद्दीन हमीदुल्ला को विदेश मंत्रालय में तलब कर ढाका में भारतीय उच्चायोग को मिली धमकियों और पूर्वोत्तर भारत को निशाना बनाने वाली भारत-विरोधी बयानबाजी पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश में यह माहौल पिछले साल अगस्त माह में शेख हसीना की सत्ता हटने के बाद बढ़ते इस्लामी कट्टरपंथ और पाकिस्तान समर्थित तत्वों की साजिशों का हिस्सा माना जा रहा है। यूनुस की अंतरिम सरकार के कथित संरक्षण में ये ताकतें चुनाव से पहले भारत को बदनाम कर रही हैं।

उच्चायुक्त को किया तलब
भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्ला को नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय बुलाकर एक दिन पूर्व ढाका के सेंट्रल शहीद मीनार पर नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) नेता हसनत अब्दुल्ला के भाषण का जिक्र किया, जहां उसने पूर्वोत्तर भारत को शेष देश से अलग करने और अलगाववादियों को पनाह देने की धमकी दी। भारत ने अपने ढाका स्थित उच्चायोग को मिली हमले की धमकियों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए अपना कड़ा एतराज दर्ज कराया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश ऐसी ताकतों को समर्थन देना बंद करे जो भारत की संप्रभुता को चुनौती दें।

भारत-विरोधी नफरत का सिलसिला
शेख हसीना को अगस्त 2024 में सत्ता से हटाने के बाद से ही बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथी ताकतें सक्रिय हैं। हसनत अब्दुल्ला जैसे नेता खुलेआम पूर्वोत्तर को अस्थिर करने की बात करते हैं, जो 1990-2000 के दशक में बांग्लादेश द्वारा उग्रवादियों को पनाह देने की पुरानी साजिश की याद दिलाती हैं। तब हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (HuJI) और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) जैसे समूहों ने बांग्लादेश की जमीन से भारत पर हमले किए थे। आज यूनुस सरकार के दौर में पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत करने की आड़ में जिन्ना के देश की साजिशी आईएसआई को उसके भारत विरोधी एजेंडे को चलाने के लिए खुला मैदान दे दिया गया है। स्वाभाविक है कि इस सबसे भारत—बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ रहा है। हसीना को भारत में शरण देने को बहाना बनाकर ढाका ने कई बार भारतीय राजनयिकों को तलब करके दबाव बनाने का प्रयास किया था।

क्या है मंशा यूनुस सरकार और कट्टरपंथियों की
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार अपने यहां भारत को ‘शत्रु’ बताकर आंतरिक असंतोष को हवा दे रही है। 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित चुनाव से पहले भारत-विरोधी माहौल बनाकर वह वोटबैंक साधने की कोशिश में है। कट्टरपंथी तत्व हसीना को फांसी दिलवाना चाहते हैं और भारत पर दबाव बनाकर उन्हें सौंपने की मांग कर रहे हैं। संभवत: मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के समय उनके द्वारा वहां दिए गए बयानों से ही शह पाकर चीन ने भी भारत के पूर्वोत्तर राज्यों पर वक्र दृष्टि डालने की कोशिश की थी। टिप्पणी की। यह सब वहां कट्टरपंथियों का खुलकर उभरना ही दिखाता है।
पाकिस्तान का संभावित हाथ
यह कोई छुपा राज नहीं है कि बांग्लादेश-पाकिस्तान संबंधों में तेजी से सुधार हुआ है, जिसके चलते वहां भारत-विरोधी इस्लामी नेटवर्क सक्रिय हुआ है। वहां के HuJI-JMB जैसी जमातें जिन्ना के देश के करीब मानी जाती हैं। यूनुस की चुप्पी इस साजिश के प्रति उनकी रजामंदी दर्शाती है। जबकि भारत ने हाल में साफ कहा है कि उसने अपनी जमीन कभी किसी पड़ोसी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं होने दी है, न होने देगा। लेकिन इसके उलट बांग्लादेश अपने यहां जिन्ना के देश को हर तरह की हरकत की खुली छूट देता दिख रहा है।
भारत की नीति
भारत ने कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश की हर शरारत का जवाब दिया है। यूनुस सरकार को कई मौकों पर समझाया गया है। यूनुस की अपरिपक्वता उन्हें यह नहीं समझने दे रही है कि बांग्लादेश का भविष्य भारत से दोस्ती करके ज्यादा सुरक्षित है, बजाय उस जिन्ना के देश के जिसने 1971 तक वहां बर्बर आतंक मचाया हुआ था, जिससे छुटकारा भी भारत ने ही दिलाया था।

















