एक और यूरोपीय देश ऑस्ट्रिया ने हिजाब को लेकर कदम उठाया है और नेशनल काउंसिल ने यह घोषणा की है कि अब चौदह वर्ष से कम उम्र की लड़कियां स्कूल्स में हिजाब पहनकर नहीं आएंगी। इसमें तीन मुख्य दल के लोग शामिल थे। और उन्होनें साफ कहा कि यह कानून लैंगिक समानता को लाने के लिए है। यह कानून केवल सरकारी स्कूल्स में ही नहीं बल्कि निजी स्कूल्स के विद्यार्थियों पर भी लागू होगा।
यूरोप में हिजाब को लेकर चल रहा अभियान
यूरोप के कई देशों में हिजाब को लेकर एक अभियान चलाया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि हिजाब महिलाओं और लड़कियों के शोषण का एक माध्यम है। जहां हिजाब के समर्थक इसे वस्त्र पहनने की आजादी कहते हैं तो वहीं इसका विरोध करने वाले लोग इसे महिलाओं का शोषण बताते हैं। वे कहते हैं कि इससे पॉलिटिकल इस्लाम को बढ़ावा मिलता है।
हिजाब को मजहबी अलगाव का माध्यम मानने वालों की दलील
विरोध करने वालों का कहना है कि इससे मुस्लिम लड़कियों को अलग मजहबी पहचान मिलती है और वे समाज में और लोगों के साथ घुलमिल नहीं पाती हैं। वे अपनी मुस्लिम पहचान पर ही अडिग रहती हैं और दूसरी पहचानों को अजनबी या पराया मानती हैं और जहां जाती हैं, वहाँ आत्मसात नहीं हो पाती हैं। वे पॉलिटिकल इस्लाम के हाथों का उपकरण बन जाती हैं। उनके माध्यम से पॉलिटिकल इस्लाम उस देश में अपना स्थान बनाता है।
कानून की शब्दावली को लेकर विरोध
ऑस्ट्रिया में हालांकि इस कानून का विरोध करने वालों ने यह कहा कि इससे इस्लाम के खिलाफ और भी नफरत बढ़ेगी क्योंकि इसकी शब्दावली में यह लिखा है कि “14 वर्ष से कम की लड़कियों पर “परंपरागत मुस्लिम” हेड कवरिंग जैसे कि हिजाब या बुर्का पहनने पर प्रतिबंध लगाया जाता है।“
2020 में भी हो चुका है ऐसा प्रयास
इससे पहले वर्ष 2020 में भी ऐसे ही प्रयास सरकार ने किये थे और 10 वर्ष से कम की आयु की लड़कियों पर हेडस्कार्फ पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था, मगर उसे न्यायालय ने यह मानते हुए हटा दिया था कि यह विशेषकर मुस्लिम लड़कियों को निशाना बना रहा है।
नए कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई.?
अब एक बार फिर से ऑस्ट्रिया में हिजाब पर प्रतिबंध लगाया गया है और अब यह चौदह वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के लिए है। बीबीसी के अनुसार यदि कोई छात्रा इस कानून का उल्लंघन करती है तो उसे स्कूल के अधिकारियों और अपने कानूनी अभिभावकों के साथ चर्चा करनी होगी और साथ ही बार-बार उल्लंघन किया जाता है तो चाइल्ड एंड यूथ वेल्फेयर एजेंसी को सूचित करना होगा।
न मानने पर लगेगा अर्थदंड
और फिर भी यदि वे लोग नहीं मानते हैं तो परिवारों या अभिभावकों पर अर्थदंड लगाया जाएगा।
कानून समर्थकों की दलील
इसका विरोध भी हो रहा है, परंतु कानून बनाने वाले और समर्थन करने वाले सांसदों का यह कहना है कि यह लड़कियों को शोषण से बचाने के लिए उठाया गया कदम है।
सोशल मीडिया पर मिल रहा समर्थन
यूरोप में इस्लामीकरण तेजी से बढ़ रहा है और इसमें लोगों का कहना है कि हिजाब और अन्य इस्लामिक पोशाकों ने बहुत बड़ा योगदान दिया है। क्योंकि वे अपने में ही सिमट कर रह जाते हैं और धीरे धीरे वे अपने ही लोगों का दायरा बना लेते हैं और जिस देश में जाते हैं, उस देश में अपना नया इलाका बना लेते हैं, जहां पर उस देश की भाषा, संस्कृति, धर्म और पहनावे का कोई स्थान नहीं होता है।
स्थानीय लड़कियों को हिजाब पहनने की सलाह से जुड़े दावे
इतना ही नहीं स्थानीय लड़कियों को भी यौन हमलावर अवैध शरणार्थियों से बचने के लिए भी हिजाब या नकाब पहनने की सलाह दी जाने लगती है। ऐसे ही कई वीडियोज़ सोशल मीडिया पर ऑस्ट्रिया को लेकर भी थे कि लड़कियों को आप्रवासियों द्वारा यौन हमलों से बचने के लिए हिजाब पहनना चाहिए।
बच्चों की सहमति का सवाल
इस कानून की चर्चा और तैयारी भी एक साल से हो रही थी। कानून बनाने वालों का कहना है कि बच्चे अपने आप को ढाकने की सहमति नहीं दे सकते हैं। यह महत्वपूर्ण पहलू है, जो बच्चों को हिजाब पहनने को लेकर ध्यान में रखना चाहिए।
हिजाब को चॉइस कहने वालों पर सवाल.?
जो भी लोग हिजाब या बुर्के को पसंद या चॉइस कहते हैं, वे यह बात भूल जाते हैं कि कैसे कोई बच्ची अपने आप को पूरी तरह ढकने की अनुमति दे सकती है, जबकि उसे इस बारे में पता ही नहीं है कि उसके नन्हे शरीर को क्यों जबरन ढाका जा रहा है।
किन देशों में है हिजाब या नकाब पर प्रतिबंध
ऑस्ट्रिया पहला ऐसा यूरोपीय देश नहीं है, जहां पर हिजाब पर प्रतिबंध है, बल्कि कई यूरोपीय देश हैं, जहां पर हिजाब पर प्रतिबंध है। फ्रांस ऐसा पहला देश था, जिसने वर्ष 2011 में सार्वजनिक स्थानों पर पूरे चेहरे को ढकने पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस पर भी काफी हंगामा हुआ था, विरोध हुआ था। वर्ष 2011 में ही बेल्जियम में भी सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने को लेकर प्रतिबंध लगा दिया गया था। इटली, जर्मनी, बेल्जियम, नॉर्वे, स्पेन, डेनमार्क जैसे देशों में भी सार्वजनिक स्थानों पर पूरा चेहरा ढकने पर प्रतिबंध है।
बरहाल ऑस्ट्रिया में इस कानून के बाद एक बार फिर से इस विषय पर बहस होने की संभावना है।














