खबर है कि भारत के पड़ोसी जिन्ना के देश में बहावलपुर में जैशे-मोहम्मद और लश्करे-तैयबा के बड़े कमांडरों की संयुक्त बैठक हुई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि पहली बार इन दोनों जिहादी गुटों ने हाथ मिलाया है और यह संकेत हो सकता है कि दोनों मिलकर भारत विरोधी जिहादी गतिविधियां चलाएं। बेशक, यह भारत के लिए और सतर्क होने का संकेत है। बताते हैं, इस बैठक में लश्कर के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी और जैश कमांडर शामिल हुए थे और मौका ‘सीरत-ए-नबी’ नाम का कोई मजहबी कार्यक्रम था। पता यह भी चला है कि महिला जिहादी इकाई भी वहां मौजूद थी। दोनों जिहादी गुटों के कमांडरों का यूं मिलना पहलगाम हमले जैसी आतंकी घटना से पहले रची गई संयुक्त साजिश को दोहराता मालूम देता है। नि:संदेह भारत की खुफिया एजेंसियां और सतर्क हो चुकी हैं।
ध्यान रहे, जैशे-मोहम्मद की स्थापना साल 2000 में जिहादी सरगना मौलाना मसूद अजहर ने की थी, जो तालिबान और अल-कायदा से जुड़ा रहा था। इसी आतंकी ने संसद हमले (2001), नगरोटा कैंप हमले (2016) और पुलवामा हमले (2019) की साजिश रची थी। लश्करे-तैयबा का सरगना है हाफिज सईद जिसने 26/11 मुंबई हमलों (2008) को अंजाम दिया था। उस हमले में 166 निर्दोष मारे गए थे। दोनों गुट भारत के जम्मू कश्मीर में घुसपैठ, हत्याओं और बम धमाकों के जरिए भारत को अस्थिर करने में शामिल रहे हैं।

भारत ने गत मई माह में आपरेशन सिंदूर में जिस बहावलपुर मरकज को ध्वस्त किया था उसी जगह यह बैठक होना भी एक संकेत हो सकता है कि जिहादी गुट यह संदेश देना चाह रहे हैं कि वह एक बार फिर सिर उठा चुके हैं। पहलगाम हमले जिम्मेदारी जैशे मोहम्मद की ही एक शाखा टीआरएफ ने ली थी।

पाकिस्तान के इसी बहावलपुर इलाके में जामिया उम्म अब्दुल अजीज है जहां यह बैठक हुई थी। जैसा पहले बताया, इसमें सैफुल्लाह कसूरी जैश के कमांडरों के साथ नजर आया था। यहां एक मजहबी कार्यक्रम रखा गया था जिसमें शामिल होने के बहाने ये आतंकी कमांडर जुटे थे। जानकारों के अनुसार, इस बैठक में निश्चित रूप से भारत-विरोधी आतंकी आर्रवाइयों का खाका तैयार करने के लिए हुई है। इसमें भविष्य के हमलों की रणनीति तय की गई होगी। पीओजेके के रावलकोट में लश्कर का नया लॉन्च पैड भी इसी गठजोड़ का हिस्सा मालूम दे रहा है, जहां मरकज बनाकर आतंकी ट्रेनिंग की तैयारी चल रही है।

भारत के लिए चुनौती
आतंकी गुटों का यह गठजोड़ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर होगा ही क्योंकि यह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर आगे कोई बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। इससे यह भी साफ हुआ है कि आपरेशन सिंदूर में सीमा पार ध्वस्त किए गए अड्डों को फिर से सक्रिय करने की छटपटाहट है। सर्दी के इस मौसम में आतंकियों की घुसपैठ बढ़ सकती है।

उल्लेखनीय है कि ये दोनों जिहादी गुट संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित हैं, लेकिन साफ है कि पाकिस्तान सरकार की पनाह में वे सक्रिय हैं।
पाकिस्तान में पल रहे इन जिहादी गुटों को भारत-अमेरिका संयुक्त कार्यबल की बैठक में लश्करे तैयबा पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव क्र. 1267 के तहत शिकंजा और कसने का आह्वान किया गया था। जैशे मोहम्मद की शाखा टीआरएफ विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया गया था।
पीओजेके में चल रहे लॉन्च पैड
पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू कश्मीर के रावलकोट में खैगला इलाके में लश्करे-तैयबा द्वारा ‘अल-अक्सा मरकज’ नाम की नई इमारत बनाई जा रही है, जिसे आंतकियों के लॉन्च पैड और पनाहगाह के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह आतंकी केन्द्र मस्जिद की आड़ में बनाया जा रहा है, जहां आतंकी भारत में घुसपैठ से पहले जमा होते हैं और हथियार इकट्ठे करते हैं। मीडिया में इस इमारत के बनने की कई तस्वीरें भी प्रकाशित हुई हैं। नियंत्रण रेखा से सटे रावलकोट में ऑपरेशन सिंदूर में ध्वस्त किए गए लांच पैड्स को फिर से बनाए जाने की खबर मिल ही रही है। उधर सीमा सुरक्षा बल ने भी पुष्टि की कि कुछ आतंकी लांच पैड्स अभी सक्रिय हैं।

















