वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद में चर्चा हुई। पीएम मोदी ने आजादी से आपातकाल तक का जिक्र किया और कांग्रेस पर वंदे मातरम की उपेक्षा का निशाना साधा। पढ़िए पीएम मोदी के संबोधन की 14 बड़ी बातें….
- वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा कई महत्वपूर्ण पड़ावों से गुजरी।
- वंदे मातरम् ने हमेशा देशवासियों को आजादी की ऊर्जा दी। 150 साल पूरे होने पर यह हमारे गौरव और इतिहास को याद करने का अवसर है।
- वंदे मातरम् सिर्फ संघर्ष का मंत्र नहीं था,यह मातृभूमि को आजाद कराने की पवित्र लड़ाई का प्रतीक था।
- बंकिम चंद्र ने वंदे मातरम् के माध्यम से देशभक्ति का संदेश फैलाया।
- अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, लेकिन वंदे मातरम् गली-गली में गूंजता रहा। यह गीत अंग्रेजों के लिए चुनौती और देशवासियों के लिए शक्ति बन गया।
- अंग्रेज समझ चुके थे कि भारत में लंबे समय तक टिक पाना उनके लिए मुश्किल होगा,“बांटो और राज करो” की नीति अपनाकर उन्होंने लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश की।
- हमारे स्वतंत्रता आंदोलन में सैकड़ों महिलाओं ने नेतृत्व और योगदान दिया,बारिसाल की वीरांगना सरोजिनी बोस ने वंदे मातरम् के लिए अपनी चूड़ियां नहीं पहनने का संकल्प लिया।
- बच्चे भी कोड़े की सजा झेलते हुए प्रभात फेरियों में वंदे मातरम् का नारा लगाते थे।
- मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में अखबार निकाला और उसका नाम ‘वंदे मातरम्’ रखा।
- 1907 में वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै के स्वदेशी जहाज पर भी ‘वंदे मातरम्’ लिखा गया।
- 1937 में मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज हो गई थी। 5 अक्टूबर को मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से वंदे मातरम के विरोध में नारा बुलंद किया।
- नेहरू ने मुस्लिम लीग के बयानों का जवाब देने के बजाय वंदे मातरम की पड़ताल शुरू की। जिन्ना के विरोध के पांच दिन बाद, 20 अक्टूबर को नेहरू ने सुभाष चंद्र बोस को पत्र लिखा। नेहरू ने माना कि ‘आनंदमठ’ जैसी पृष्ठभूमि कुछ मुस्लिमों को परेशान कर सकती है। कांग्रेस ने कोलकाता में बैठक करके वंदे मातरम पर समीक्षा करने की घोषणा की। देशभक्तों ने विरोध किया और प्रभात फेरियां निकालीं। 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम के कुछ हिस्सों को हटा दिया। इसे सद्भाव का काम बताया गया, लेकिन असलियत में यह मुस्लिम लीग के दबाव में झुकने का संकेत था।
- वंदे मातरम के टुकड़े करने का निर्णय कांग्रेस की नर्म नीति का प्रतीक बन गया। इस तुष्टिकरण ने धीरे-धीरे राजनीतिक कमजोरियों और समझौतों की नींव डाली। ये कमजोरियां अंततः भारत के विभाजन में भी नजर आईं। आज भी कुछ लोग वंदे मातरम को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं।
- वंदे मातरम् पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण हर भारतीय का संकल्प बन गया,यह गीत देशभक्ति, साहस और मातृभूमि के प्रति प्रेम का प्रतीक है।

















