सुप्रीम कोर्ट में हल्द्वानी रेलवे बनभूलपुरा मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर तक इलाके में पुलिस बल तैनात रहेगा। SIR केस की सुनवाई में देरी की वजह से 2 दिसंबर को सुनवाई टाल दी गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की कोर्ट नंबर 1 में उत्तराखंड सरकार, रेलवे और दूसरी पार्टियों, यानी विवादित ज़मीन पर कब्जा करने वाले लोगों की तरफ से वकील पूरी तैयारी के साथ थे। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता भी फाइनल क्रॉस-एग्जामिनेशन के लिए ऑनलाइन तैयार बैठे थे। लेकिन, समय की कमी के कारण सुनवाई एक हफ़्ते के लिए टाल दी गई। अब सुनवाई 10 दिसंबर को होगी और उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उसी तारीख को अपना फ़ैसला सुनाएगा। 2 दिसंबर को सुनवाई के चलते नैनीताल पुलिस ने बनभूलपुरा इलाके में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की थी। SSP मंजूनाथ टीसी खुद फोर्स के साथ पेट्रोलिंग करते दिखे। पुलिस के साथ-साथ रिजर्व पुलिस फ़ोर्स को भी तैनात किया गया और फ़्लैग मार्च किया गया। पुलिस ने पहले ही लगभग दो दर्जन संदिग्ध बदमाशों को हिरासत में ले लिया था। सौ से ज्यादा युवकों को हिरासत में लेकर निजी मुचलकों पर रिहा किया गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 10 दिसंबर को होने वाली सुनवाई को देखते हुए रिजर्व पुलिस फोर्स को हल्द्वानी में ही रोक दिया गया है और सेंसिटिव इलाकों में पेट्रोलिंग जारी रखी गई है। SSP मंजूनाथ टीसी ने कहा कि सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं। सुनवाई की तारीख़ ज़्यादा दूर नहीं है, और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफ़वाहों से दूर रहें और सुरक्षित रहें।
उल्लेखनीय है कि बनभूलपुरा क्षेत्र में हल्द्वानी रेलवे की भूमि पर कथित अवैध कब्जे हैं, जिनकी संख्या चार हजार से अधिक है। रेलवे अपनी योजनाओं के विस्तार देने के लिए ये कब्जे मुक्त करवा कर अपनी भूमि वापिस लेना चाहता है। उत्तराखंड सरकार की भी भूमि अवैध कब्जेदारी में है जिसे वो भी हटवाना चाहती है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तराखंड सरकार और रेलवे ने अपनी भूमि का संयुक्त सर्वे करके अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर दी है।

















