सर्दी-खांसी का मौसम आते ही ज्यादातर लोग गले में खराश, नाक बंद होने, सिर भारी रहने और कमजोरी जैसी समस्या से जूझने लगते हैं। कई बार दवाइयां लेने के बाद भी आराम नहीं मिलता। ऐसे में घरेलू नुस्खे सबसे ज्यादा कारगर साबित होते हैं। भारतीय घरो में सदियों से काढ़ा पिया जाता है, जो शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ सर्दी और खांसी को जल्द ठीक करने में बेहद असरदार होता है। अगर आप भी ठंड, खांसी या गले की जलन से परेशान हैं, तो यह झटपट बनने वाला काढ़ा आपके लिए रामबाण साबित हो सकता है।
काढ़ा क्यों फायदेमंद है- काढ़ा आयुर्वेद में एक प्राकृतिक दवा माना गया है। इसमें ऐसे मसाले और जड़ी-बूटियां डाली जाती हैं, जिनमें एंटी-वायरल, एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। ये गुण न सिर्फ सर्दी-खांसी के वायरस से लड़ते हैं बल्कि गले की सूजन कम करते हैं, बलगम ढीला करते हैं और शरीर को भीतर से गर्माहट देते हैं।
काढ़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री- 1 टुकड़ा अदरक (कुचला हुआ), 4–5 तुलसी की पत्तियाँ, 1 छोटा टुकड़ा दालचीनी, 4 काली मिर्च, 1 चम्मच शहद, 1 कप पानी।
यह भी पढ़ें- सर्दियों में सुबह खाली पेट आंवला मुरब्बा खाने के 7 जबरदस्त फायदे
काढ़ा कैसे बनाएं- सबसे पहले एक छोटे पैन में एक कप पानी गर्म करें। पानी गुनगुना होते ही उसमें अदरक, तुलसी, काली मिर्च और दालचीनी डालें। अब इसे धीमी आंच पर 5–7 मिनट तक उबलने दें, ताकि सभी औषधीय गुण पानी में घुल जाएँ। पानी जब आधा रह जाए, तब गैस बंद कर दें। मिश्रण को छानकर कप में डालें और थोड़ा ठंडा होने पर इसमें शहद मिलाएँ। आपका काढ़ा तैयार है, इसे धीरे-धीरे चुस्की लेकर पिएं। गर्म काढ़ा साइनस को राहत देता है और सांस लेने में आसानी होती है। अदरक और तुलसी गले की सूजन कम करते हैं। काली मिर्च बलगम को ढीला कर खांसी को नियंत्रित करती है। दालचीनी और तुलसी शरीर को वायरस से लड़ने की ताकत देती हैं। ठंड के मौसम में इसे पीने से शरीर अंदर से गर्म रहता है। सर्दी-खांसी के दौरान आप यह काढ़ा दिन में 1–2 बार पी सकते हैं। सुबह खाली पेट और रात सोने से पहले पीने पर इसका असर ज्यादा तेजी से होता है।
(इस लेख में दी गई जानकारी और सुझावों को अमल में लाने से पहले पाठक किसी डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।)













