भुवनेश्वर। जगतसिंहपुर जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने उस घर को ध्वस्त कर दिया, जहां संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को पनाह देने का आरोप था। यह कार्रवाई पुलिस पर हुए हमले के बाद की गई जिसमें एक महिला कॉन्स्टेबल सहित दो पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल की जांच के बाद इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती बताया है।
अवैध निर्माण ध्वस्त, अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
जगतसिंहपुर सदर थाना क्षेत्र में स्थित बेहरामपुर बस्ती का यह घर सरकारी ‘गोचर’ यानी चरागाह भूमि पर बनाया गया था। मौके पर मौजूद एक वरिष्ठ मजिस्ट्रेट ने कहा कि घर न सिर्फ अवैध रूप से खड़ा किया गया था बल्कि इसे अवैध प्रवासियों को आश्रय देने के लिए उपयोग किया जा रहा था। पुलिस पर हमला करने के बाद सभी निवासी फरार हो गए। घर पूरी तरह सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बना था और संदिग्ध बांग्लादेशियों के ठहरने का ठिकाना बन चुका था।
जगतसिंहपुर कलेक्टर जे. सोनाल ने ध्वस्तीकरण अभियान की निगरानी करते हुए संबंधित फील्ड अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए, जिन्होंने इस निर्माण को अनुमति दी और अवैध संरचना को बिजली कनेक्शन मुहैया कराया।
छापेमारी में अवैध कत्लखाने, प्रतिबंधित सामान बरामद
कई घंटों तक चले तलाशी अभियान में पुलिस को इलाके में कई अवैध कत्लखाने मिले। घटनास्थल से मोटी रस्सियां, लकड़ी के तने और पेड़ों पर खून के निशान बरामद हुए, जिससे संकेत मिलता है कि यहां अवैध पशु वध का धंधा चल रहा था।
पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क सिर्फ अवैध शरण देने और पहचान धोखाधड़ी तक सीमित नहीं था बल्कि मांस से जुड़े अवैध व्यापार में भी शामिल था।

अवैध मदरसा, आपत्तिजनक गतिविधियों के संकेत
एक बड़े खुलासे में पुलिस ने बताया कि सिकंदर किराए के घर के भीतर एक अवैध मदरसा चला रहा था, जहां संदिग्ध बांग्लादेशी ठहराए गए थे। जांच में इस बात के संकेत मिले हैं कि वहां आपत्तिजनक शिक्षण सामग्री भी संचालित की जा रही थी। तलाशी के दौरान कई बंद कमरों से कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां और निजी सामान बरामद हुए, जिससे वहां कथित अनैतिक गतिविधियों के चलने का संदेह गहरा गया है।साथ ही, कई आधार कार्ड भी मिले हैं, जिनसे फर्जी दस्तावेज बनाने के संभावित रैकेट की आशंका उत्पन्न हुई है।
स्थानीय पुलिस का मानना है कि यह केस विदेशी नागरिकों को आश्रय देने के अलावा मानव तस्करी, पहचान धोखाधड़ी और अवैध हथियार रखने जैसी गंभीर गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है।
सिकंदर आलम पर शिकंजा—अंतरराष्ट्रीय यात्रा रिकॉर्ड ने बढ़ाया शक
पुलिस की जांच अब इस पूरे नेटवर्क के कथित संचालक सिकंदर आलम उर्फ सिको पर केंद्रित है, जो छापेमारी के बाद फरार हो गया था । मामले में उसका नाम प्रमुख ‘फैसिलिटेटर’ के रूप में सामने आया है, जो कथित तौर पर संदिग्ध बांग्लादेशियों को जगतसिंहपुर लाने और उन्हें आश्रय देने में शामिल था।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने उसका पासपोर्ट जब्त किया, जिसमें पिछले कुछ वर्षों में पांच से अधिक देशों की यात्रा के रिकॉर्ड मिले हैं। इससे पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या वह किसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट से जुड़ा था या विदेशी नागरिकों की अवैध तस्करी से उसका कोई संबंध था।

सूत्रों के मुताबिक, सिकंदर करीब दस वर्ष तक मर्चेंट नेवी में काम कर चुका है और बाद में एक तेल रिफाइनरी में भी नौकरी की। घर लौटने के बाद उसने कथित रूप से विदेशी नागरिकों को जिले में लाना, उन्हें ठहराना और कथित तौर पर कई अवैध गतिविधियों में शामिल करना शुरू कर दिया। जांच के दौरान मौके से “ट्रेनिंग एक्टिविटीज़” से जुड़े संकेत भी मिले हैं।
परिवार के सदस्य भी गिरफ्तार
पुलिस ने रविवार देर रात सिकंदर की दो बहनों—शाओबान अजमी और परवीन बीबी—को पुलिस टीम पर हमले के आरोप में गिरफ्तार किया। पांच आरोपी, जिनमें सिकंदर, उसकी बहनें और उसके दो भाई—अब्दुल मोतलिफ खान उर्फ टिकी और बहुनिशा—के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के विभिन्न धाराओं में केस (नं. 912/25) दर्ज किया गया है। दो विशेष पुलिस टीमों को फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई स्थानों पर छापेमारी में लगाया गया है।
संदिग्धों की धरपकड़ तेज, होटल-लॉज में भी जांच
जगतसिंहपुर एसपी अंकित कुमार वर्मा ने बताया कि अभियान के पहले चरण में तीन लोगों को हिरासत में लिया गया था, जबकि अगले दिन दस से अधिक संदिग्धों को पकड़ा गया। कुछ ने स्वयं को बांग्लादेशी बताया, जबकि कई कोई पहचान संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
एसपी ने मकान मालिकों को चेतावनी दी है कि वे बाहर से आने वाले किरायेदारों की पहचान अनिवार्य रूप से सत्यापित करें और इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें। जिले के होटलों, गेस्ट हाउसों और लॉजों में भी गहन सत्यापन अभियान शुरू किया गया है, जो कई जिलों और राज्यों में एक साथ चल रहा है।

बिजली कनेक्शन देने में लापरवाही पर जांच
बिजली विभाग पर सवाल उठने लगे हैं कि चरागाह भूमि पर बने इन अवैध घरों को किस आधार पर बिजली कनेक्शन दिया गया।कलेक्टर ने कहा कि विभाग से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। जांच में यह भी सामने आया कि तारिकुंडा कॉलेज के पीछे भी कई निर्माण गोचरन भूमि पर किए गए हैं।
पश्चिम बंगाल से लिंक की जांच
कुछ संदिग्धों द्वारा पश्चिम बंगाल के जिलों से आने का दावा करने के बाद प्रशासन ने अब वहां के अधिकारियों से समन्वय शुरू कर दिया है। कलेक्टर ने बताया कि यह जांच की जा रही है कि ये लोग यहां कैसे पहुंचे, किसने इन्हें पनाह दी और क्या इनका संगठित आपराधिक नेटवर्क से कोई संबंध है।
जिले भर में ऐसे सभी अवैध निर्माणों की पहचान और सत्यापन के लिए बड़े स्तर पर सर्वेक्षण भी शुरू किया गया है। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में दो प्लाटून (लगभग 60 जवान) पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान और प्रत्यर्पण हेतु SOP
पुलिस ने सभी हिरासत में लिए गए संदिग्धों की पहचान की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। कई व्यक्तियों ने पश्चिम बंगाल में जारी आधार कार्ड प्रस्तुत किए हैं। जगतसिंहपुर एसपी इन आधार विवरणों को संबंधित जिलों के एसपी को भेजेंगे। इसके लिए 30 दिन की अनिवार्य अवधि तय की गई है। इस दौरान सभी संदिग्धों को प्रशासन द्वारा बनाए गए विशेष शिविर में रखा जाएगा। निर्धारित समय सीमा में पुष्टि नहीं मिलने पर उन्हें “बांग्लादेशी नागरिक” घोषित कर भारत सरकार की दिशानिर्देशों के अनुसार निर्वासन (डिपोर्टेशन) प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
जिले भर में अवैध घुसपैठियों की पहचान को विशेष टास्क फोर्स गठित
कलेक्टर जे. सोनाल ने बताया कि जिले में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान के लिए एक विशेष टास्क फोर्स (STF) बनाई गई है। डीआईजी के निर्देशन में 1,300 से अधिक राजस्व गांवों और 198 पंचायतों में व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया गया है।उन्होंने कहा कि संदिग्ध घुसपैठियों के विरुद्ध जांच के बाद कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।











