भुवनेश्वर: जगतसिंहपुर जिले में रविवार देर शाम पुलिस ने तरिकुंद क्षेत्र के बेराहिमपुर बस्ती में बांग्लादेशी नागरिकों के ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान पुलिस ने एक देसी पिस्तौल सहित बड़ी संख्या में घातक हथियार बरामद किए। छापेमारी के दौरान अवैध रूप से रह रहे लोगों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया, जिसमें एक महिला कांस्टेबल घायल हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है ।
अचानक हुई छापेमारी, हिंसा भड़की, मुख्य आरोपी फरार
पुलिस को विश्वसनीय सूचना मिली थी कि बेराहिमपुर स्थित कुछ मकानों में बांग्लादेशी नागरिक संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। इसी जानकारी के आधार पर रविवार शाम अचानक छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी सिकंदर आलम ने पुलिस टीम पर हमला कर फरार हो गया।
जगतसिंहपुर एसडीपीओ अजिंक्य बाबुराव माने ने बताया कि तलाशी के दौरान कई घर बाहर से बंद मिले। पुलिस ने ताले तोड़कर तलाशी ली, जिसमें देसी पिस्तौल, बंदूक, कटर, फावड़ा, कुल्हाड़ी, सहित कई घातक हथियार बरामद किए गए।
हथियारों की बरामदगी से बढ़ा शक, कई संदिग्ध मौके से भागे
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन घरों में संदिग्ध लोग रह रहे थे, वे सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए थे। पुलिस को आशंका है कि अचानक हुई कार्रवाई की भनक लगते ही कई संदिग्ध बांग्लादेशी पुरुष क्षेत्र से भागने में सफल रहे।
पुलिस बरामद हथियारों के स्रोत और इतने बड़े पैमाने पर हथियार जमा करने के उद्देश्य की जांच कर रही है। अधिकारियों को संदेह है कि सिकंदर आलम ही इस नेटवर्क का संचालक था, जो कथित तौर पर बांग्लादेशी नागरिकों को यहां ला कर उनके ठहरने की व्यवस्था करता था।

कुछ दिनों पूर्व अवैध मदरसा मिला था—संदेह और गहराया
इसी क्षेत्र में कुछ दिन पहले एक अवैध मदरसे का भंडाफोड़ हुआ था, जहां से बिहार के कई नाबालिग लड़कों को रेस्क्यू कर बाल गृह भेजा गया था। यह कार्रवाई एसपी अंकित कुमार वर्मा को मिली प्रारंभिक सूचना के आधार पर की गई थी।लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने तरिकुंद और आसपास के क्षेत्रों के निवासियों में बाहरी और संभवतः विदेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।
तनाव के बाद भारी पुलिस बल की तैनाती
पुलिस टीम पर हमले और हथियार मिलने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। इसे देखते हुए प्रशासन ने भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया, जिसमें अतिरिक्त एसपी सत्यव्रत दास और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे, जो पूरे तलाशी अभियान और एरिया-डोमिनेशन ऑपरेशन की निगरानी करते रहे।
तलाशी के दौरान कई घर पूरी तरह खाली मिले, जिससे संदेह गहरा गया कि पुलिस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही उनके निवासी फरार हो गए। सूत्रों के अनुसार 10 से अधिक परिवार छापेमारी के बाद इलाके से भाग गए से। पुलिस ने अब इन घरों से जुड़े सभी व्यक्तियों के पहचान दस्तावेज, आव्रजन कागजात और व्यक्तिगत पृष्ठभूमि की जांच शुरू कर दी है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि क्या इनमें से कोई व्यक्ति अवैध रूप से रहने के अलावा अन्य गतिविधियों में भी शामिल था।

सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण का जाल
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले चार–पांच वर्षों में माछगांव नहर, धनिपुर लॉक और आसपास के इलाकों में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर एस्बेस्टस से ढके अवैध मकान बनाए गए हैं। ये घर आबादी से दूर ऐसे क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां संदिग्ध लोग आसानी से शरण ले सकें। पुलिस को संदेह है कि इन्हीं अवैध घरों में कई बांग्लादेशी नागरिक छिपकर रह रहे थे।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ये अवैध निर्माण संभवतः एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो बिना वैध दस्तावेज वाले बांग्लादेशी नागरिकों को शरण और रहने की सुविधा उपलब्ध कराता है। हथियारों की बरामदगी, संदिग्धों का फरार होना और पूर्व में अवैध गतिविधियों का उजागर होना—इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जगतसिंहपुर पुलिस ने जिले में निगरानी और सत्यापन अभियान को और तेज कर दिया है।











