देवभूमि उत्तराखंड की स्थापना के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण और सीएम पुष्कर सिंह धामी के संबोधन में कई विषयों में समानता रही। विशेष रूप से, प्रधानमंत्री मोदी ने पुष्कर धामी सरकार द्वारा राज्य के हित में लिए गए मजबूत निर्णयों का समर्थन किया। अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण हटाने की धामी सरकार की नीति की प्रशंसा की और जनसांख्यिकीय परिवर्तन के खिलाफ धामी सरकार के मजबूत प्रयासों को उचित ठहराया।
प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य में सख्त धर्मांतरण कानून लागू करने के प्रयासों को राज्य और देश के हित में बताया। उन्होंने दंगा-रोधी कानून को भी उचित ठहराते हुए कहा कि राज्य हित में यह सख्त फैसला जरूरी है। प्रधानमंत्री ने समान नागरिक संहिता को देश के लिए एक उदाहरण और धामी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। पीएम मोदी का भाषण को राज्य के विकास का रोड मैप बताया गया लेकिन उसे सनातन से भी जुड़ा महसूस किया गया। उन्होंने बद्री, केदारनाथ, चारधाम और मानस खंड तीर्थ स्थलों के विकास के बारे में बात की।
पीएम मोदी से पूर्व सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार के कार्यों का उल्लेख किया तो उसमें भी सख्त निर्णयों की बाते कही गई। CM धामी ने देवभूमि का सांस्कृतिक स्वरूप बनाए रखने के लिए किए जा रहे प्रयासों की विस्तार से चर्चा कर पीएम मोदी का ध्यान उस ओर आकृष्ट किया। सीएम धामी जब अतिक्रमण के खिलाफ अभियान, धर्मांतरण कानून, दंगा निरोधी कानून, मदरसा बोर्ड खत्म करने आदि विषयों का उल्लेख कर रहे थे तब प्रधान मंत्री मोदी भी उसे गौर से सुन रहे थे।
सीएम धामी ने जब ” राजा धर्म का पालन करता है” विषय पर अपने विचार रख रहे थे तब भी श्री मोदी उनकी तरफ देख रहे थे। सीएम धामी इस बात का उल्लेख श्री मोदी के सनातन विचारों ,उनके द्वारा सनातन तीर्थ स्थलों के विकास, उत्तराखंड के देव स्थलों के प्रति उनकी आस्था के संदर्भ में था। श्री धामी भी श्री मोदी से प्रेरणा लेकर देवभूमि के तीर्थ स्थलों के प्रति आस्था प्रकट करते हुए यहां के स्थल विकास के कार्यों में जुटे हुए कई बार दिखे है। बरहाल धामी मोदी की जोड़ी या ये कहें बीजेपी की डबल इंजन की सरकारों ने उत्तराखंड के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है और इस विकास गाथा में सनातन के पुनर्जागरण के विषय भी दर्ज किए गए है।
















