भारत के जिस इस्लामवादी जाकिर नाइक को भगोड़ा घोषित किया हुआ है, उसे बांग्लादेश में इस समय राज चला रही हिन्दू विरोधी, भारत विरोधी सरकार ने अपने यहां न सिर्फ बुलाया है, बल्कि उसके लिए लाल कालीनें बिछाई जा रही हैं। यूनुस सरकार एक महीने तक चलने वाले उसके कार्यक्रमों को अंमित रूप देने में जुटी है। यह वही व्यक्ति है जो मजहब के नाम पर दुनिया भर में कट्टर सोच का प्रसार करता आ रहा है, खुद को बड़ा वाला विद्वान बताता है और हिन्दुओं की आस्था को निशाने पर रखता है। ऐसा व्यक्ति तो बांग्लादेश के लिए हीरो से कम हो ही नहीं सकता इसलिए ढाका उसकी सरकारी मेहमान के तौर पर आवभगत की तैयारी में जुट गया है। जाकिर 28 नवंबर से 20 दिसम्बर तक बांग्लादेश के विभिन्न शहरों में अपने भाषण देगा, जिनके मजमून का अंदाजा लगाना कोई मुश्किल नहीं है।
आखिर भारत में इस जाकिर लाइक को भगोड़ा क्यों घोषित किया गया है? असल में जाकिर नाइक मुंबई से एक इस्लामिक प्रसारक है। वह ‘इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन’ (IRF) और ‘पीस टीवी’ का संस्थापक है। भारत सरकार ने उसके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, मजहबी कन्वर्जन और आतंकवाद को बढ़ावा देने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं। उसके नफरत और उकसावे वाले भाषणों को सुनकर युवा आतंकी गतिविधियों की ओर आकर्षित होते रहे हैं। उनमें कट्टरपंथी भावनाएं पैदा होती हैं। जैसे, 2016 में ढाका की होली आर्टिसन बेकरी हमले के आरोपी जाकिर नाइक की तकरीरों से प्रभावित पाए गए थे। यही कारण है कि भारत में उसे भगोड़ा घोषित कर किया गया। इंटरपोल के माध्यम से भी उसके खिलाफ नोटिस जारी हो चुका है।
जाकिर नाइक जिस किस्म की मजहबी तकरीरें करता है, वे कट्टर वहाबी/सलाफी विचारधारा से प्रेरित होती हैं। अपने भाषणों में वह इस्लाम को सबसे श्रेष्ठ मजहब के रूप में प्रस्तुत करता है, अन्य मत—पंथ को मानने वालों की आलोचना करता है। वह अक्सर गैर-मुसलमानों के लिए नफरत तथा पूर्वाग्रह को बढ़ावा देता है। अपने भाषणों को तार्किक दिखाने की कोशिश में वह मजहबी किताबों के हवाले देता है। नाइक की अगुआई में ‘पीस’ टीवी चैनल के जरिए मजहबी उन्माद तथा अलगाववाद को खुलकर प्रसारित किया जाता रहा है। उसकी तकरीरें कट्टर सोच में इतनी डूबी होती हैं कि उसे सुनने वाले युवा ‘जिहादी सोच’ की ओर जाने लगते हैं।

भारत समेत दुनियाभर में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल युवाओं में जाकिर नाइक की तकरीरों से दूसरे मत—पंथ वालों के विरुद्ध नफरत पैदा होने की पुष्टि हुई है। महाराष्ट्र के मालवणी क्षेत्र का अयाज सुल्तान ISIS से जुड़ने से पहले नाइक के वीडियो और भाषणों से बहुत प्रभावित रहा था। केरल में लापता हुए संदिग्धों में से एक को उसके संगठन आईआरएफ का सदस्य बता कर गिरफ्तार किया गया था। उसकी कट्टर सोच को खाड़ी देशों सहित मुस्लिम बहुल राष्ट्रों के कई संगठनों और वित्तीय स्रोतों से समर्थन मिलता है, जो कन्वर्जन और उन्माद फैलाने में लगातार काम में लिया जाता है। इन गतिविधियों के तहत युवाओं की सोच भ्रष्ट करने, कट्टरता की ओर झुकाने तथा सेकुलरवाद को बढ़ावा देने का काम होता है। वह अपनी कैसी भी आलोचना को नकारता है। उसकी ऐसी सोच अल-कायदा व ISIS जैसे संगठनों के विचारों से मेल खाती है। भारत ही नहीं, उसकी गतिविधियों पर दुनिया भर की एजेंसियों की विशेष नजर बनी रहती है।
जाकिर नाइक को कई मुस्लिम देशों में भी उसकी विवादित तकरीरों के कारण मर्यादित किया गया है। भारत में उसके ‘पीस टीवी’ को प्रतिबंधित किया गया है, उसके संगठन आईआरएफ पर भी पाबंदी लगाई गई है। मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध विदेशी फंडिंग और कन्वर्जन के मामलों में वह सख्त कानूनी कार्रवाई से बचता रहा है।
लेकिन बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अपने यहां उसके कार्यक्रमों को हरी झंडी दिखाकर पूरे दक्षिण एशिया में राजनीतिक और कूटनीतिक बहस को जन्म दिया है, जहां भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है और बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना की आड़ लेते हुए उसका एक प्रकार से बचाव किया है।

















