भारत के लिए चाबहार बंदरगाह न केवल एक व्यापारिक परियोजना है, बल्कि यह उसकी कूटनीतिक और रणनीतिक सोच का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच हमेशा से भारत के लिए मुश्किल रही है। ऐसे में ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह भारत को एक नया, सुरक्षित और वैकल्पिक मार्ग देता है, जिससे इन देशों से सीधा संपर्क स्थापित किया जा सके।
हाल ही में भारत को इस परियोजना से जुड़ी एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। अमेरिका ने ईरान स्थित चाबहार पोर्ट परियोजना को अपने प्रतिबंधों से अप्रैल 2026 तक छूट दे दी है। इसका मतलब है कि भारत अब बिना किसी डर या रुकावट के इस बंदरगाह के विकास और संचालन को जारी रख सकता है। यह फैसला भारत के लिए इसलिए खास है क्योंकि अमेरिका के प्रतिबंधों के कारण ईरान से जुड़े किसी भी प्रोजेक्ट में निवेश करना जोखिम भरा माना जाता है। यह छूट अमेरिका ने पहली बार 2018 में ईरान फ्रीडम एंड काउंटर-प्रोलिफरेशन एक्ट (IFCA) के तहत दी थी। हाल ही में जब यह चर्चा होने लगी कि अमेरिका इस छूट को खत्म कर सकता है, तो भारत की चिंताएं बढ़ गई थीं। लेकिन अब जब इस छूट को 2026 तक बढ़ा दिया गया है, तो भारत को चाबहार बंदरगाह के संचालन और विस्तार में नई ऊर्जा मिली है।
चाबहार बंदरगाह कहां है- चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर, ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित है। यह ईरान का एकमात्र ऐसा बंदरगाह है जो सीधे समुद्र से जुड़ा हुआ है। इसकी भौगोलिक स्थिति भारत के लिए बहुत लाभदायक है, क्योंकि यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान के रास्ते को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया से जोड़ता है। भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच यह बंदरगाह एक रणनीतिक गलियारे के रूप में उभर चुका है। भारत ने चाबहार के रास्ते अफगानिस्तान को कई बार गेहूं और यूरिया की खेपें भेजी हैं, जो मानवीय सहायता के तौर पर वहां पहुंचाई गईं। इससे यह साबित हुआ कि यह बंदरगाह न केवल व्यापार के लिए बल्कि मानवीय मदद के लिए भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
भारत और ईरान के बीच समझौता- मई 2024 में भारत और ईरान के बीच 10 साल का समझौता हुआ था, जिसके तहत भारत चाबहार के शहीद बेहेश्ती टर्मिनल का विकास कर रहा है। भारत ने अब तक इस परियोजना में 120 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इस निवेश के अंतर्गत आधुनिक मशीनें, टर्मिनल अपग्रेड और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) से जुड़ाव जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। INSTC एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय परिवहन परियोजना है, जिसका लक्ष्य भारत को रूस, यूरोप और मध्य एशिया से जोड़ना है। इस गलियारे में चाबहार पोर्ट एक मुख्य कड़ी की तरह काम करता है।

















