ब्रिटेन में इन दिनों ऐसा लग रहा है कि सब कुछ ठीक नहीं है। लगभग रोज ही नए मामले सामने आते रहते हैं। अब वहाँ पर इस बात पर हंगामा मचा हुआ है कि वहाँ पर बनने वाले विज्ञापनों में अश्वेत और एशियाई लोगों को अधिक अवसर मिल रहे हैं और श्वेत लोगों को विज्ञापन नहीं मिल रहे हैं। कुछ लोग इसे नस्लवादी आरोप कह रहे हैं तो वहीं कई लोग ऐसे हैं, जो इसे सही ठहरा रहे हैं।
रिफॉर्म पार्टी की सांसद सारा पोंछिन का विवादित बयान
रिफॉर्म पार्टी की सांसद सारा पोंछिन ने 25 अक्टूबर को यह कहकर एक नए विवाद को जन्म दे दिया कि जो भी टीवी पर विज्ञापन आ रहे हैं, उनमें अश्वेत और एशियाई लोगों का प्रतिनिधित्व अधिक है और वह यूके की जनसांख्यकीय का समर्थन नहीं करता है। अब इसे लेकर वहाँ पर राजनीति हो रही है, जहां प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इसे नस्लवादी और ब्रिटिश मूल्यों के खिलाफ बताया तो लेबर पार्टी के अन्य नेता भी इसका विरोध कर रहे हैं। और यहाँ तक कि रिफॉर्म यूके के नेता निगेल फेरेग ने भी कहा कि वे सारा के दिए गए बयान से दुखी हैं, मगर उन्हें यह विश्वास नहीं होता कि वह किसी नस्लवादी मंशा से कहा गया था।
लोगों ने सोशल मीडिया पर कई विज्ञापनों की तस्वीरें साझा कीं
जो बात सारा ने कही है, वह बात काफी समय से लोग सोशल मीडिया पर कहते आ रहे थे कि डाइवर्सिटी के नाम पर बड़े ब्रांड कुछ असहज करने वाला कर रहे हैं। कई लोग यह बात कई वर्षों से उठाते आ रहे थे कि ब्रिटिश टीवी विज्ञापनों में एथनिक-माइनोरिटी कलाकारों का प्रतिनिधित्व काफी अधिक है। वर्ष 2021 की जनगणना के अनुसार यूके में अश्वेतों की संख्या 4% है तो वहीं 81.7% लोग श्वेत हैं। सारा का कहना था कि जनसंख्या में इतना कम अनुपात होने के बाद भी विज्ञापनों में उनका अनुपात अधिक क्यों है?
सारा का विरोध कर रहे कुछ लोगों का उत्तर कुछ यूजर्स ने तस्वीरों से दिया। नॉरमन लीड्स नामक इतिहासकार और नेता ने कुछ ब्रांडस के विज्ञापनों की तस्वीर साझा की और लिखा कि विज्ञापन उद्योग के साथ कुछ तो गलत है, जो ब्रिटेन में जीवन की वास्तविकताओं को अनदेखा करता है। और सबसे बढ़कर, विज्ञापनों में जो जोड़े होते हैं, उनमें हमेशा श्वेत महिला ही क्यों होती है, अश्वेत नहीं?
ट्वीट देखें
You are already in a gutter of your own making. There is an issue with an advertising industry which ignores the reality of life in Britain. What is even worse, the adverts with couples always show white women, never black. Why do you suppose that is? 🤪 pic.twitter.com/AXK5Jh0nw1
— Norman Leeds (@NormanLeedsPhD) October 26, 2025
सारा ने एक्स पर अपने बयान की सफाई दी
सारा ने इन तमाम आलोचनाओं के बीच अपने बयान की सफाई भी एक्स पर दी। उन्होंने लिखा कि उनके बयान को गलत समझा गया। उन्होंने लिखा कि उन्होंने जो बात कही थी, वह यह थी कि “कई ब्रिटिश टीवी विज्ञापन डीईआई के प्रति पागल हो गए हैं और अब समग्र रूप से ब्रिटिश समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करते। यह किसी समूह पर हमला नहीं है, बल्कि हमारे देश को पर्दे पर जिस तरह से दिखाया जाता है, उसमें संतुलन और निष्पक्षता की बात है।”
उन्होंने आगे लिखा कि चैनल 4 ने एक अध्ययन में यह पाया था कि वर्ष 2022 में अश्वेत लोग आधे से अधिक विज्ञापनों में दिखे थे, जो 2020 में ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के बाद 37% की बढ़ोत्तरी दिखा रहा था। जबकि 2021 की जनगणना के अनुसार अश्वेत समुदाय की भागीदारी जनसंख्या में लगभग 4% है।
उन्होंने लिखा कि विज्ञापन उद्योग में आधुनिक ब्रिटेन की डाइवर्सिटी दिखनी चाहिए, मगर यह आनुपातिक होनी चाहिए और इसमें सभी लोग होने चाहिए। उनकी टिप्पणियों को गलत अर्थ में लिया गया, मगर वे समानता के सिद्धांत को सभी के लिए निष्पक्षता के रूप में देखती हैं।
लोगों की प्रतिक्रिया — “आप माफी क्यों मांग रही हैं?”
इस पर लोगों ने कहा कि आप माफी क्यों मांग रही हैं, हम इन सबसे थक चुके हैं। सैम्युल वीप्स नामक यूजर ने लिखा कि विज्ञापन उद्योग ब्रिटिश समाज का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उसने आगे लिखा कि “हमें वोक लोगों द्वारा अपने ही देश से बहुत चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जा रहा है और विज्ञापनों में हमेशा अश्वेत नायक होते हैं और अगर श्वेत महिला है, तो उसमें भी साथी अश्वेत ही होता है, बहुत ही कम श्वेत पुरुष दिखाई देते हैं।”
सोशल मीडिया पर उठी आवाजें
एक यूजर ने लिखा कि “ब्रिटिश टीवी पर अश्वेतों की अत्यधिक संख्या के बारे में सारा पोचिन की टिप्पणी के बाद, हमने कुछ विज्ञापन देखने का फैसला किया। हमें हर विज्ञापन में अश्वेत या मिश्रित नस्ल के लोग दिखाई दिए, सिवाय मैकडॉनल्ड्स के, जिसमें एक श्वेत व्यक्ति को डकैती करते हुए दिखाया गया था।”
एक यूजर ने लिखा कि सारा ने वही कहा, जो हम लोगों ने नोटिस किया था। विज्ञापन इतने डाइवर्स हो गए हैं, कि ब्रिटेन की असली तस्वीर दिखाते ही नहीं हैं। ब्रिटेन अभी तक श्वेत बहुमत वाला देश है, और विज्ञापन ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नहीं बनाए जा रहे हैं।
फिल्मों और ऐतिहासिक ड्रामों पर भी असर
यह भी देखा गया है कि जो भी हाल ही में ऐतिहासिक ड्रामा बनाए गए हैं, और वह भी श्वेत इतिहास के, तो उनमें भी नायक या नायिका को अश्वेत या ब्राउन लिया गया है, जैसा हाल ही में हमने स्नोव्हाइट मूवी में भी देखा था, जो अब तक की सबसे महंगी और सबसे फ्लॉप फिल्म साबित हुई थी।
लोगों की मांग — वास्तविकता दिखाएँ, डाइवर्सिटी नहीं थोपें
लोगों का कहना है कि विज्ञापनों में भी वास्तविकता दिखनी चाहिए, डाइवर्सिटी के नाम पर ब्रिटेन के श्वेत समुदाय के साथ अन्याय न हो।












