घातक महामारी पोलियो भारत पड़ोसी पाकिस्तान और अफगानिस्तान में तेजी से फैल रहा है। इसे देखते हुए भारत सरकार पहले से ही सतर्क हो गई है, ताकि अगर गलती से भी यह वायरस भारत में प्रवेश करे तो उसे खत्म किया जा सके। भारत पहले ही एक बार पोलियो से जंग जीत चुका है और देश को 2014 में आधिकारिक तौर पर पोलियो-मुक्त घोषित किया गया था। यहां आखिरी पोलियो का केस 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में सामने आया था।
उसके बाद से बड़े पैमाने पर टीकाकरण कार्यक्रमों और सतत निगरानी से भारत ने अपना पोलियो-मुक्त दर्जा बनाए रखा है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस (वीडीपीवी), पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान से खतरा, और इम्यूनिटी में कुछ कमियां अभी भी जोखिम पैदा कर रही हैं। खासकर वर्ल्ड पोलियो डे पर ये बातें सामने आईं।
पड़ोसी देशों में स्थिति
पाकिस्तान और अफगानिस्तान में इस साल पोलियो के 36 मामले दर्ज हुए हैं। ये दोनों देश अभी भी पोलियो के एंडेमिक हैं, यानी यहां वायरस का प्रकोप बना हुआ है। भारत की सीमा इनसे सटी होने से वायरस के यहां पहुंचने का डर हमेशा बना रहता है। अगर निगरानी में थोड़ी सी ढील हो जाए, तो ये आसानी से फैल सकता है।
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भारत में वैक्सीनेशन की चुनौतियां
पिछले साल भारत में 9 लाख से ज्यादा बच्चों को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत एक भी डोज नहीं मिली या कोई एक डोज मिस हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि कुछ बच्चे अभी भी वैक्सीन से वंचित हैं, जो वायरस के छिपने और फैलने की गुंजाइश पैदा करता है। हर बच्चे को सभी तय डोज OPV (ओरल पोलियो वैक्सीन) की जरूरत है। माता-पिता को किसी भी टीकाकरण राउंड को मिस नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक मिस्ड डोज ही सुरक्षा की पूरी चेन तोड़ सकती है।
सतर्कता के कदम
2017 में रोटरी इंटरनेशनल की इंडिया नेशनल पोलियोप्लस कमिटी (आरआई-आईएनपीपीसी) ने यूनियन हेल्थ मिनिस्ट्री के साथ एमओयू साइन किया, जो पोलियो उन्मूलन, रूटीन इम्यूनाइजेशन, मिशन इंद्रधनुष और इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष को सपोर्ट करता है। स्वास्थ्यकर्मी हर घर पहुंचकर सुनिश्चित करते हैं कि कोई बच्चा पीछे न छूटे।
टीकाकरण अभियान की भूमिका
2011 के बाद से बड़े टीकाकरण अभियान ही वायरस को काबू में रखे हुए हैं। समय पर वैक्सीनेशन और लोगों की भागीदारी से ही यूनिवर्सल प्रोटेक्शन मिल सकती है। ये अभियान भारत की पोलियो-मुक्त विरासत को मजबूत बनाते हैं। रोटरी इंटरनेशनल की आरआई-आईएनपीपीसी के चेयरमैन दीपक कपूर कहते हैं, “भारत 2014 में पोलियो-मुक्त घोषित हुआ, लेकिन लड़ाई अभी जारी है। पड़ोसी देशों में आउटब्रेक से खतरा करीब है। अनवैक्सीनेटेड बच्चे वायरस को छिपने की जगह देते हैं। हर बच्चे को सभी डोज मिलनी चाहिए, और मजबूत सर्विलांस से ही एराडिकेशन संभव है।”













