अमेरिका में काम करने वाले विदेशी प्रोफेशनल्स को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के द्वारा एच-1बी वीजा की फीस को 2000-5000 से बढ़ाकर एक 1,00000 डॉलर करने की योजना आज से देश में लागू हो गई है। इसी के साथ ही अमेरिकी सरकार ने इसको लेकर अपनी सफाई पेश की है, जिसमें उसने कहा कि ये वन टाइम फीस है।
नई फीस का मतलब: वन-टाइम ही, न कि सालाना
ट्रंप के प्रोजेक्ट ने एच-1बी को स्पेशलाइज्ड ऑक्यूपेशन के लिए इस्तेमाल करने वालों पर फोकस किया, जैसे टेक, इंजीनियरिंग और मेडिसिन। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी करोलिन लेविट ने साफ कहा कि 100,000 डॉलर की ये फीस सिर्फ नई एप्लीकेशन्स के लिए है। ये कोई एनुअल चार्ज नहीं, बल्कि वन-टाइम पेमेंट है। पहले कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने इसे एनुअल बताया था। अब कहा जा रहा है कि ये सिर्फ नए आवेदन पर लागू होगा, रिन्यूअल्स या एक्स्टेंशन्स पर नहीं। एच-1बी प्रोग्राम में हर साल 85,000 वीजा लॉटरी से मिलते हैं, और ये फीस अगली लॉटरी साइकल से, यानी मार्च 2026 से शुरू होगी।
कौन देगा फीस?
सबसे बड़ा सवाल ये कि पैसे कौन भरेगा? अमेरिकी कंपनियां, जो एच-1बी वर्कर्स को स्पॉन्सर करती हैं, वो ये फीस देंगी। ये उन 70 पर्सेंट एप्लीकेशन्स पर लगेगी जो विदेश से आती हैं, जिनमें ज्यादातर इंडिया से है। लेकिन अच्छी बात ये कि मौजूदा एच-1बी होल्डर्स को कोई टेंशन नहीं। अगर आपका वीजा वैलिड है और आप बाहर हैं, तो री-एंट्री पर 100,000 डॉलर नहीं लगेगा। कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (सीबीपी) ने भी स्टेटमेंट जारी किया कि 21 सितंबर 2025 से पहले फाइल की गई पेटिशन्स पर कोई असर नहीं। ट्रैवलिंग इंडियंस को रश करने की जरूरत नहीं, सेफ है। छोटी कंपनियां और स्टार्टअप्स पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ेगा, क्योंकि उनके लिए ये अमाउंट बहुत भारी है।
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अब क्या?
प्रोजेक्ट साइन होते ही सोशल मीडिया पर अफवाहें उड़ने लगीं। लोग सोच रहे थे कि रिन्यूअल पर भी फीस लगेगी, या बाहर घूमने वालों को रिटर्न पर पैसे देने पड़ेंगे। इंडियन आउटसोर्सिंग फर्म्स ने तो एम्प्लॉयीज़ को इंडिया विजिट से जल्दी लौटने को कह दिया। लेकिन सीनियर यूएस ऑफिशियल ने एएनआई को बताया कि “ट्रैवलर्स को रश करने की जरूरत नहीं, ये सिर्फ नई एप्लीकेशन्स के लिए है।” इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये चेंज इनोवेशन को हिट कर सकता है, क्योंकि हाई-स्किल्ड टैलेंट अमेरिका आने से हिचकिचाएगा। ट्रंप एडमिन का तर्क है कि ये एब्यूज रोकने के लिए है, जैसे लो-वेज वर्कर्स को लाकर अमेरिकी जॉब्स छीनना। अब ये फीस 12 महीने के लिए लागू है, सितंबर 2025 से।
आगे क्या बदलाव हो सकते हैं?
ट्रंप एडमिन लॉटरी सिस्टम को भी चेंज करने की प्लानिंग कर रहा है। नया प्रपोजल है वेटेड सिलेक्शन, जहां हाई-स्किल्ड और हाई-पे वाले वर्कर्स को प्रायोरिटी मिलेगी। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने फेडरल रजिस्टर में नोटिस दिया कि रैंडम लॉटरी की जगह वेज-बेस्ड सिलेक्शन आएगा। इससे स्मॉल बिजनेस को फायदा हो सकता है, अगर वो हाई-पेड स्टाफ हायर करें। लेकिन अभी ये प्रपोजल स्टेज पर है। लीगल चैलेंज भी शुरू हो चुके हैं – यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स और लेबर यूनियन्स ने सूट फाइल किया, कहते हुए कि ये कांग्रेस के रूल्स के खिलाफ है। प्लेंटिफ्स का कहना है कि प्रेसिडेंट फीस इंपोज नहीं कर सकता, ये कांस्टीट्यूशनल राइट्स वॉयलेट करता है।
19 सितंबर को जारी किया था नया आदेश
गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वीजा प्रोग्राम में बड़ा बदलाव करते हुए 19 सितंबर 2025 इस प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किया था। इसके तहत एच-1बी आवेदन की फीस को 2,000-5,000 डॉलर से बढ़ाकर 100,000 डॉलर कर दिया गया। इस आदेश का नाम है “रिस्ट्रिक्शन ऑन एंट्री ऑफ सर्टेन नॉनइमिग्रेंट वर्कर्स”। ये बदलाव नेशनल सिक्योरिटी और अमेरिकी वर्कर्स की प्रोटेक्शन के नाम पर लाया गया था।











