Adina Mosque: भारत में कई मस्जिदें ऐसी हैं, जहां की दीवारें चीख-चीख कर यह कहती हैं कि यह मंदिर ही थीं। पहचान छिपाने के तमाम प्रयास कर लिए गए हैं, उन्हें मस्जिदों में बदला गया, फिर भी प्रमाण अपने आप ही यह बताते हैं कि उनकी असली पहचान क्या रही होगी।
ऐसी ही एक मस्जिद है अदीना, जो बंगाल में मालदा में है और जिसे 14वीं शताब्दी में सिकंदर शाह ने कथित रूप से बनवाया था। यह उस समय की उस क्षेत्र की सबसे बड़ी मस्जिद थी। हालांकि, यह इमारत अभी भारतीय पुरातत्व सर्वे के अंतर्गत संरक्षित है, परंतु कागजों में इसे मस्जिद ही कहा जाता है। दीवारों पर हिन्दू मंदिरों के प्रतीक चिह्नित हैं। नृत्य करते हुए गणेश की प्रतिमाएं उकेरी हुई हैं, तो वहीं महादेव भी हैं। पूरे परिसर में हिन्दू देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं। हालांकि इसके विषय में यह भी कहा जाता है कि इसमें हिन्दू प्रतीकों को बनाया गया था।
TMC सांसद यूसुफ पठान की पोस्ट वायरल
टीएमसी के सांसद यूसुफ पठान की एक पोस्ट एक्स पर वायरल हुई। एक्स पर यूसुफ पठान ने इस इमारत की तस्वीरें पोस्ट की और लिखा, “पश्चिम बंगाल के मालदा में स्थित अदीना मस्जिद एक ऐतिहासिक मस्जिद है जिसका निर्माण 14वीं शताब्दी में इलियास शाही वंश के दूसरे शासक सुल्तान सिकंदर शाह ने करवाया था। 1373-1375 ई. में निर्मित, यह अपने समय में भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे बड़ी मस्जिद थी, जो इस क्षेत्र की स्थापत्य कला की भव्यता को दर्शाती है।“
The Adina Mosque in Malda, West Bengal, is a historic mosque built in the 14th century by Sultan Sikandar Shah, the second ruler of the Ilyas Shahi dynasty. Constructed in 1373-1375 CE, it was the largest mosque in the Indian subcontinent during its time, showcasing the region's… pic.twitter.com/EI0pBiQ9Og
— Yusuf Pathan (@iamyusufpathan) October 16, 2025
मस्जिद असल में है मंदिर
इसे लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह मस्जिद दरअसल हिंदुओं का मंदिर थी और ये दावे उन तमाम प्रतीकों के कारण सामने आते हैं, जो मस्जिद की दीवारों पर विद्यमान हैं। मस्जिद में कमल, फूल, और गैर इस्लामिक प्रतीकों की भरमार है। मस्जिद की पहचान की बात कई वर्षों से उठ रही हैं और साथ ही वर्ष 2022 में भाजपा नेता राथीन्द्र बोस ने एक्स पर पोस्ट लिखा था कि मस्जिद की संरचना के नीचे एक प्राचीन आदिनाथ मंदिर दबा हुआ है और इस इतिहास के विषय में कम लोगों को ही पता है।
पुस्तक में लिखा है मंदिर का इतिहास
भारत के मंदिरों पर लिखी हुई पुस्तक HINDU TEMPLES, WHAT HAPPENED TO THEM में भी सीताराम गोयल ने इस तथ्य को लिखा है कि अदीना मस्जिद का निर्माण कई हिन्दू मंदिरों के अवशेषों पर हुआ था। इसे लेकर वर्ष 2024 में हरिशंकर जैन का भी एक वीडियो सामने आया था। जिसमें उन्होनें कहा था कि एक नहीं कई प्रमाण ऐसे हैं, जो यह प्रमाणित करते हैं, जो यह बताते हैं, कि यह मस्जिद एक भव्य मंदिर पर बनी है। उन्होंने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भी लिखा है और यह अनुरोध किया कि जो यह कथित मस्जिद है, वहां पर पूजा होनी चाहिए, और इसे एएसआई के कब्जे से मुक्त कराना चाहिए।
A video by @adv_hsjain asking for the reclamation of the Adinath Temple at Pandua, West Bengal.
The Shiva-Adinath temple was destroyed, and in its place the Adina masjid was built by Sikandar Shah (r. 1358-89).
Along with this there must be also be a reclamation request for… pic.twitter.com/NLzTZSEPVP
— Monidipa Bose – Dey (মণিদীপা) (@monidipadey) March 9, 2024
सोशल मीडिया पर आज टीएमसी के सांसद यूसुफ पठान को लोगों ने सच का आईना दिखाया। और प्रश्न किये कि जिस प्रकार से मस्जिद के भीतर हिन्दू वास्तुकला और हिन्दू मंदिरों के अवशेष हैं, क्या उन्हें किसी भी प्रकार मस्जिद कहा जा सकता है? इस मस्जिद में टेराकोट्टा और पत्थरों से दीवारों पर प्रतिमाएं उकेरी गई हैं। जो सोशल मीडिया पर वीडियोज़ और तस्वीरें हैं, उनसे यह कहीं न कहीं सत्य ही प्रतीत होता है कि यह मस्जिद दरअसल किसी न किसी हिन्दू इतिहास को तो समेटे ही है। इस मेहराब में गुलाब की डिजाइन हैं और जंजीरें और घंटियों की आकृतियाँ हैं, जो पूरी तरह से हिन्दू प्रतीक हैं।
लोगों ने वे वीडियो साझा किये, जिनमें लोग यह बता रहे हैं कि कैसे इस मस्जिद का निर्माण टूटे हुए मंदिरों के अवशेषों से हुआ था।
Saw this post by Yusuf Pathan, and right after scrolling the TL, this video popped up.
algorithm lit.pic.twitter.com/8XIv1CiBb9 https://t.co/UX4fuKC2gp— Lala (@FabulasGuy) October 17, 2025
लोगों ने यूसुफ पठान की ही तस्वीर के पीछे के हिन्दू प्रतीकों को चिह्नित करते हुए कहा कि यह पहले एक मंदिर था। भारत की ऐसी मस्जिदों पर बात करने से लोग डरते हैं, उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे ऐसा करने से उनपर इस्लामोफोबिया का ठप्पा लग जाएगा, परंतु जो प्रत्यक्ष प्रमाण होते हैं, वे अपना सच निरंतर कहते हैं। जिस मस्जिद में शिव लिंग हों और कमल उकेरे गए हों, क्या वह मस्जिद हो सकती है? टूटे हुए सिंहासन हैं, और गणेश एवं अन्य देवी देवताओं की खंडित प्रतिमाओं को समेटे यह मस्जिद यदि किसी जनप्रतिनिधि के मन में गर्व का भाव जागृत करती है, तो अपने आप में ही तमाम प्रश्न उठाती है।
अब्दुल किताबी नामक यूजर ने एक्स पर पोस्ट लिखा कि यार यूसुफ पठान। आप सबसे बड़े हिंदू मंदिरों में से एक, मंदिर आदिनाथ मंदिर के परिसर में खड़े हैं, जिसे इस्लामी आक्रमणकारियों ने नष्ट कर दिया था और उस पर कब्जा कर लिया था, और आपके संदर्भ के लिए कुछ तस्वीरें संलग्न हैं।
https://Twitter.com/KitabiAbdul/status/1979007724517290404?
उन्होंने आगे लिखा कि अन्याय और बर्बरता को मिटाने और मंदिर के गौरव को पुनः स्थापित करने का समय आ गया है। एक सच्चे मुसलमान होने के नाते हमें यह मस्जिद हिंदुओं को वापस करनी चाहिए। परंतु प्रश्न यही है कि ऐसी पहचान लिए तो तमाम मस्जिदें खड़ी हैं और उन पर गर्व करने वाले अभी भी गर्व करते हैं, परंतु जो दावा होता है और जो प्रमाण चीख-चीखकर कहते हैं, उनके बीच तालमेल नहीं होता है।











